RAJYA SABHA ELECTIONS 2026: की प्रक्रिया के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ 10 राज्यों की कुल 37 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में सात राज्यों के 26 उम्मीदवार बिना किसी मुकाबले के निर्विरोध चुन लिए गए हैं। इन निर्वाचित नेताओं में एनसीपी (शरद) प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले जैसे भारतीय राजनीति के कई दिग्गज नाम शामिल हैं। कई राज्यों में विपक्षी दलों द्वारा उम्मीदवार न उतारे जाने के कारण इन नेताओं का चयन बिना मतदान के ही संपन्न हो गया है।
RAJYA SABHA ELECTIONS 2026: इन राज्यों के उम्मीदवार पहुँचे निर्विरोध राज्यसभा
RAJYA SABHA ELECTIONS 2026 निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार महाराष्ट्र की सभी 7 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, जिनमें शरद पवार, रामदास आठवले, विनोद तावड़े, रामराव वडुकुटे, माया इवनाते, ज्योति वाघमारे और पार्थ पवार के नाम शामिल हैं। तमिलनाडु की 6 सीटों पर तिरुची शिवा, जे कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन, एम थंबीदुरई, अंबुमणि रामदास, एम क्रिस्टोफर तिलक और एल के सुदीश का चयन हुआ है।
पश्चिम बंगाल की 5 सीटों पर भाजपा के राहुल सिन्हा के साथ टीएमसी के बाबुल सुप्रियो, पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी और कोएल मलिक निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इसके अतिरिक्त असम की 3 सीटों पर जोगेन मोहन, तेरोस गोवाला और प्रमोद बोरो ने जीत दर्ज की है।

RAJYA SABHA ELECTIONS 2026 में अन्य राज्यों की स्थिति
तेलंगाना की 2 सीटों पर कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी निर्विरोध चुने गए हैं। छत्तीसगढ़ की 2 सीटों पर भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम का चयन हुआ है, जबकि हिमाचल प्रदेश की एकमात्र सीट पर कांग्रेस के अनुराग शर्मा निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। इन निर्विरोध निर्वाचनों के बाद अब राज्यसभा की राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है, जहाँ कई अनुभवी चेहरों ने एक बार फिर उच्च सदन में अपनी जगह पक्की कर ली है।
तीन राज्यों की 11 सीटों पर फँसा मुकाबला
भले ही 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हों, लेकिन बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला होना अभी तय है। इन राज्यों में निर्धारित सीटों की संख्या से अधिक उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव आयोग को मतदान कराना होगा। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद अब बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर आगामी 16 मार्च को मतदान प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। इन 11 सीटों के लिए कुल 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिससे इन तीन राज्यों की एक-एक सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
चुनावी मैदान में शेष उम्मीदवारों की स्थिति
बिहार में होने वाले RAJYA SABHA ELECTIONS 2026 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के नितिन नबीन के राज्यसभा पहुँचने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है कि शुरुआत में 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए कुल 40 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। अब शेष 11 सीटों पर होने वाले मतदान के परिणाम ही अंतिम स्थिति स्पष्ट करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र विशेष रूप से बिहार और हरियाणा के चुनावी नतीजों पर टिकी है, जहाँ समीकरण दिलचस्प बने हुए हैं।

राज्यसभा का चुनाव प्रक्रिया
राज्यसभा का चुनाव एक अप्रत्यक्ष निर्वाचन (Indirect Election) प्रक्रिया है, जिसमें देश की जनता सीधे वोट नहीं देती। इसके बजाय, जनता द्वारा चुने गए राज्यों के विधायक (MLAs) इन चुनावों में हिस्सा लेते हैं। RAJYA SABHA ELECTIONS 2026 की मुख्य प्रक्रिया इस प्रकार है:
- निर्वाचक मंडल: केवल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, पुदुचेरी और जम्मू-कश्मीर) की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य ही वोट डाल सकते हैं। मनोनीत सदस्य या विधान परिषद के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते।
- चुनाव प्रणाली: यह चुनाव ‘आनुपातिक प्रतिनिधित्व’ (Proportional Representation) प्रणाली के तहत एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) के माध्यम से होता है।
- वरीयता आधारित मतदान: विधायक उम्मीदवारों को अपनी पसंद के आधार पर वरीयता (1, 2, 3…) देते हैं। यदि उनकी पहली पसंद का उम्मीदवार जीत जाता है या रेस से बाहर हो जाता है, तो उनका वोट अगली पसंद को स्थानांतरित कर दिया जाता है।
- जीत का फॉर्मूला (कोटा): एक उम्मीदवार को जीतने के लिए वोटों की एक निश्चित संख्या (कोटा) की आवश्यकता होती है, जिसे इस फॉर्मूले से निकाला जाता है:

- खुला मतदान (Open Voting): 2003 के बाद से राज्यसभा चुनावों में ‘ओपन बैलेट’ सिस्टम लागू है, जिसका अर्थ है कि विधायकों को अपना वोट अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना होता है ताकि क्रॉस-वोटिंग रोकी जा सके।
- कार्यकाल और अंतराल: राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता। इसके सदस्य 6 साल के लिए चुने जाते हैं, और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं, जिसके कारण हर दो साल में चुनाव कराए जाते हैं।
- इसके अतिरिक्त, भारत के राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
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