UP Education : विद्यालयों में हाल बेहाल,आधा सत्र बीता; किताबें नदारद

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UP Education प्रकाशकों की मनमानी से विद्यालय बेहाल, नोटिस जारी

जहां उत्तर प्रदेश सरकार हर क्षेत्र में अच्छा काम और पारदर्शिता लाने की जी तोड़ कोशिश कर रही है वहीं कुछ लोग इसमें रोड़े अटकाने का काम करते हैं। क्षेत्र भी जो शिक्षा हमारे मूल अधिकार से जुड़ा हुआ है वहां इस तरह की लापरवाही देखने को मिल रही है जहां साल का आधा सत्र बीत चुका है लेकिन विद्यालयों में किताबें नदारद हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि बिना किताबों के कैसे पढ़ाई हो।

बताया जा रहा है कि प्राथमिक विद्यालयों में बेसिक शिक्षा विभाग ने 13 प्रकाशकों को किताबों की आपूर्ति का जिम्मा सौंपा था लेकिन आज तक आधा सत्र बीतने के बाद भी किताबों की आपूर्ति विद्यालयों को नहीं की गयी. इस घोर लापरवाही पर बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रकाशकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

UP Education :प्रकाशकों की मनमानी, बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़,कौन है जिम्मेदार

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सरकार द्वारा स्थापित बेसिक शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों को निःशुल्क किताबें दिलाना जिन की कुल संख्या 1करोड़ 92 लाख है. इसी के तहत 11करोड़ 50 लाख से अधिक पुस्तकों के प्रकाशन की जिम्मेदारी विभाग ने 13 प्रकाशकों को June में सौंपीं थी जिसमें 6 सितम्बर तक सभी छात्र छात्राओं को को किताबें पहुंचानी थी। वर्तमान में अभी तक सारे जिलों को मिलाकर सिर्फ 7 करोड़ 87 लाख किताबें ही पहुंच सकी हैं.

UP Education: बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रकाशकों पर लगाया आर्थिक हर्जाना

UP education विभाग के अधिकारी श्याम किशोर तिवारी ने बताया है कि प्रकाशकों को नोटिस भेजी जा चुकी है और करार का उल्लंघन करने [किताबों की आपूर्ति ना होने की स्थिति ]में क्यों न आर्थिक हर्जाना लगाते हुए कटौती की जाए। उन्होंने बताया है कि सप्ताहवार 1 -1 प्रतिशत की कटौती और प्रकाशकों को ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी चल रही है.

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UP Education: राजधानी लखनऊ समेत मुख्यमंत्री के जिले भी प्रभावित

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जहां इस तरह की घोर लापरवाही शिक्षा जैसे क्षेत्र में की गयी है वहां लाजिमी है कि हो सकता है कि जो किताबें आपूर्ति में आयीं वो बड़े जिलों को दे दी गयी हों लेकिन आपको बता दें की ऐसा बिलकुल नहीं है उल्टा तो राजधानी लखनऊ और गोरखपुर जिले के विद्यालय भी प्रभावित हुए हैं और सिद्धार्थनगर, बस्ती, देवरिया , एवं कुशीनगर में भी हालात यही हैं. इसके अलावा गोंडा, रामपुर, कन्नौज, आजमगढ़,संतकबीरनगर और सहारनपुर में वितरण बहुत खराब है.

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