STARLINK SATELLITE INTERNET: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा संचालित स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) लाइसेंस मिल गया है। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने 7 मई 2025 को स्टारलिंक को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया था, जिसके बाद कंपनी ने सभी सुरक्षा मानकों और नियमों का पालन करते हुए अंतिम स्वीकृति हासिल कर ली है। अब कंपनी भारतीय अंतरिक्ष नियामक संस्था IN-SPACe से अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में है। यह मंजूरी मिलने के बाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू हो जाएंगी।

क्या है STARLINK SATELLITE INTERNET?
स्टारलिंक एक उन्नत सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है जो पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित लगभग 7,000 छोटे उपग्रहों के नेटवर्क के माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रदान करती है। यह सेवा खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए तैयार की गई है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड या मोबाइल नेटवर्क पहुंच नहीं पाता। स्टारलिंक की तकनीक 25 से 220 Mbps की डाउनलोड स्पीड और 5 से 20 Mbps की अपलोड स्पीड देती है, जिससे गांव, पहाड़ और दूरदराज के इलाकों में तेज और स्थिर इंटरनेट कनेक्शन मिल सकेगा।

भारत में स्टारलिंक की शुरुआत और अब तक का सफर
स्टारलिंक ने 2022 में भारत में सेवा शुरू करने के लिए आवेदन किया था, लेकिन सुरक्षा और डेटा स्थानीयकरण से जुड़े नियमों के कारण इसमें देरी हुई। भारत सरकार ने कंपनी से देश में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने और सुरक्षा एजेंसियों को कॉल इंटरसेप्शन की अनुमति देने जैसी शर्तें रखी थीं, जिन्हें अब कंपनी ने पूरा कर लिया है। इसके बाद अब स्टारलिंक रिलायंस जियो और एयरटेल के बाद तीसरी ऐसी कंपनी बन गई है जिसे भारत में GMPCS लाइसेंस मिला है।

ग्रामीण भारत को होगा सबसे ज्यादा फायदा
स्टारलिंक की सेवाओं से उन इलाकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जहां अब तक इंटरनेट की सुविधा नहीं पहुंच पाई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा, मरीजों को टेलीमेडिसिन और लोगों को डिजिटल बैंकिंग जैसी सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी। कंपनी 100 Mbps से अधिक औसत स्पीड देने की क्षमता रखती है जिससे वीडियो कॉल, स्ट्रीमिंग और डिजिटल कारोबार की गुणवत्ता बढ़ेगी। लाइसेंस मिलने के बाद अब स्टारलिंक भारत में तीन अर्थ स्टेशन यानी गेटवे स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। जैसे ही IN-SPACe से अंतिम मंजूरी मिलती है, कंपनी की सेवाएं भारत में शुरू हो सकती हैं।

स्टारलिंक भारत में शुरुआती ऑफर के तहत लगभग 850 रुपये प्रति माह में असीमित डेटा प्लान पेश कर सकती है। हालांकि इसके साथ लगने वाले सैटेलाइट डिश और वाई-फाई राउटर की कीमत 21,000 से 32,000 रुपये के बीच हो सकती है। बावजूद इसके, यह सेवा उन क्षेत्रों के लिए बेहद कारगर होगी जहां अन्य नेटवर्क कंपनियों की पहुंच अभी नहीं है। स्टारलिंक ने भारत में अपने उपकरणों और सेवाओं की आसान उपलब्धता के लिए जियो और एयरटेल से साझेदारी की है। इससे देशभर में इन कंपनियों के स्टोर्स के जरिए स्टारलिंक डिवाइस और सेवाएं ग्राहकों तक पहुंच सकेंगी।

चुनौतियों का भी करना होगा सामना
स्टारलिंक को भारत में इंटरनेट सेवा क्षेत्र में मौजूद अन्य कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा। इसमें जियो, एयरटेल की साझेदारी में चल रही Eutelsat OneWeb और अमेजन का प्रोजेक्ट कुइपर शामिल हैं। इसके अलावा, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) द्वारा प्रस्तावित सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमतें भी कंपनी के लिए एक चुनौती हो सकती हैं। TRAI ने 4% एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू और प्रति MHz के लिए 3,500 रुपये वार्षिक शुल्क का प्रस्ताव दिया है।

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