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SHARE MARKET में भारी गिरावट, सेंसेक्स 2,496 अंक टूटा, निफ्टी 23,000 के स्तर पर

SHARE MARKET में मार्च 2026 के दौरान पिछले 22 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस बड़ी हलचल ने दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। आज यानी 19 मार्च 2026 को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांकों में भारी बिकवाली देखी गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स लगभग 2,500 अंक यानी करीब 3.26 प्रतिशत गिरकर 74,207 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 776 अंक यानी 3.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,002 के स्तर पर आ गया।

SHARE MARKET में डूबे करीब 12 लाख करोड़ रुपये

बाजार की इस गिरावट के कारण केवल एक ही दिन में निवेशकों की करीब 12 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई है। मार्च महीने में अब तक निफ्टी में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है जो कि कोरोना महामारी के बाद किसी एक महीने में बाजार का दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन बताया जा रहा है। बाजार में इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। सबसे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में डर का माहौल बना दिया है।

SHARE MARKET
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विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया है। केवल मार्च 2026 के शुरुआती नौ कारोबारी सत्रों में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग 56,883 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ने के कारण ये निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले निवेश जैसे सोना या डॉलर में लगा रहे हैं।

रुपया 92.30 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया

इसी का असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिला है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.30 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया है। कमजोर रुपये के कारण आयात महंगा हो जाता है, जिससे ऑटो, पेंट और एविएशन जैसे सेक्टरों की लागत बढ़ जाती है और उनके मुनाफे पर बुरा असर पड़ता है।

अमेरिका के केंद्रीय बैंक ‘फेडरल रिजर्व‘ की नीतियों ने भी भारतीय SHARE MARKET को झटका दिया है। फेडरल रिजर्व ने अपनी हालिया नीति में ब्याज दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखा है, लेकिन उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम जताई है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई को फिर से भड़का सकती हैं।

इस सख्त रुख के कारण वैश्विक स्तर पर नकदी की उपलब्धता कम होने की आशंका है, जिससे शेयर बाजारों में गिरावट आई है। भारतीय आईटी सेक्टर के शेयरों पर इसका सीधा असर पड़ा क्योंकि इन कंपनियों का बड़ा राजस्व अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों से आता है।

इन सेक्टरों में गिरावट

घरेलू स्तर पर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आई भारी गिरावट ने SHARE MARKET को और नीचे धकेला। बैंक के अंशकालिक चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक के शेयर 8 प्रतिशत से अधिक टूटकर अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर 722 रुपये पर आ गए। चूंकि एचडीएफसी बैंक का निफ्टी और सेंसेक्स में काफी अधिक वजन है, इसलिए इसके गिरने से पूरे इंडेक्स पर बड़ा दबाव बना।

इसके अलावा बैंकिंग, ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर के सूचकांकों में भी 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों यानी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट रही, जिससे यह साफ होता है कि बिकवाली का दौर पूरे बाजार में फैला हुआ है।

SHARE MARKET
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विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें तो भारतीय बाजार ने पहले भी कई बड़े संकटों और युद्धों का सामना किया है और हर बार गिरावट के बाद नई ऊंचाई हासिल की है। फिलहाल निवेशकों को SHARE MARKET की इस भारी उथल-पुथल के बीच संयम बरतने और अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

ये भी पढ़िए- SHARE MARKET में लगातार दूसरे दिन रिकवरी, सेंसेक्स 76,000 के पार और निफ्टी में 172 अंकों का उछाल

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(बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, इसलिए कोई भी ट्रेड लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। यह समाचार केवल सामान्य जानकारी के लिए है, इसे किसी भी तरह की निवेश सलाह न मानें।)

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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