SELAQUI WORKERS PROTEST: देहरादून के सेलाकुई में श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने के बाद पुलिस और प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों में नारेबाजी, मुख्य गेट तोड़ने की कोशिश, धक्का-मुक्की, तोड़फोड़ और मारपीट जैसी घटनाओं के बाद पुलिस ने तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं।
इन मामलों में कुल मिलाकर एक हजार से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में अज्ञात प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं। हालात पर नियंत्रण बनाए रखने और कानून व्यवस्था को बिगड़ने से रोकने के लिए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में तत्काल प्रभाव से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है।
SELAQUI WORKERS PROTEST में हंगामा और पुलिस पर पथराव
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र स्थित डिक्सन, लाइटेनियम टेक्नोलॉजीज और ग्लोबल मेडिकिट जैसी प्रमुख कंपनियों में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर श्रमिक आंदोलन चल रहा था।
SELAQUI WORKERS PROTEST दौरान कई जगहों पर प्रदर्शन उग्र हो गया और औद्योगिक परिसरों में भारी अव्यवस्था फैल गई। प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्रियों के मुख्य गेटों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया और मौके पर मौजूद पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की भी की।
पुलिस पर पथराव
स्थिति तब और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब कुछ असामाजिक तत्वों ने प्रदर्शन की आड़ में फैक्ट्री परिसर और पुलिस कर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। हालात बिगड़ने पर पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।

मौके पर पहुंचे पुलिस, प्रशासन और श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने वार्ता के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज
SELAQUI WORKERS PROTEST को लेकर सेलाकुई थाने में तीन अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पहला मुकदमा 15 मई की रात पुलिस की ओर से दर्ज कराया गया।
पुलिस का कहना है कि डिक्सन कंपनी के बाहर लगभग 1500 से 1600 श्रमिक एकत्रित हो गए थे। आरोप है कि भीड़ ने जमकर नारेबाजी की, पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की और मुख्य गेट को क्षतिग्रस्त करने की कोशिश की। इस मामले में 500 से 600 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
दूसरा मामला
दूसरा मामला 16 मई को लाइटेनियम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड में हुए बवाल से जुड़ा है। पुलिस ने इस प्रकरण में 10 लोगों को नामजद करते हुए 300 से 400 अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया है।
नामजद आरोपियों में शोएब अली, तैय्यब खान, नवीन कुमार, अखिल कुमार, अजरा, इकरा, फरमान, अल्सिफा, इमामुद्दीन और मुखिया शामिल हैं। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कंपनी परिसर में अव्यवस्था फैलाने, प्रबंधन को धमकाने और मारपीट जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया।
महिला कर्मचारियों से अभद्रता और तोड़फोड़ का आरोप
SELAQUI WORKERS PROTEST में तीसरी प्राथमिकी ग्लोबल मेडिकिट लिमिटेड के प्रबंधक निकुंज पंवार की शिकायत पर दर्ज की गई है। कंपनी प्रबंधन का आरोप है कि कुछ बाहरी उपद्रवी और स्थानीय कर्मचारी जबरन कंपनी की तीनों इकाइयों में घुस आए।
आरोप है कि उन्होंने महिला कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज और मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी दी। कंपनी प्रबंधन के मुताबिक इन इकाइयों में करीब 750 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं।

उपद्रवियों पर कंपनी की मशीनरी और तैयार उत्पादों को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है। थाना प्रभारी लोकपाल परमार ने बताया कि घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंप दी गई है, जिसके आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
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सेलाकुई और सिडकुल में धारा 163 लागू
औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार बढ़ते SELAQUI WORKERS PROTEST और कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) कृष्ण कुमार मिश्रा ने सेलाकुई और सिडकुल क्षेत्र में BNSS की धारा 163 लागू करने के आदेश जारी किए हैं।
प्रशासन के मुताबिक कुछ बाहरी तत्व श्रमिकों को उकसाकर श्रम कानूनों से परे अनुचित मांगें करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही सोशल मीडिया के जरिए वेतन और श्रमिकों से जुड़ी भ्रामक सूचनाएं फैलाकर असंतोष भड़काने की कोशिश की जा रही है।
अतिरिक्त पुलिस बल तैनात
SELAQUI WORKERS PROTEST को देखते हुए स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) को सक्रिय कर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि वीडियो फुटेज में दिखाई दे रहे अन्य उपद्रवियों की पहचान भी तेजी से की जा रही है।
वहीं जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी श्रमिक संगठनों, औद्योगिक इकाइयों और आम नागरिकों से शांति बनाए रखने तथा किसी भी अपुष्ट सूचना या अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।
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