SANJIV KHANNA ने देश के 51वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति भवन में जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें इस पद की शपथ दिलाई। उनके कार्यभार संभालने के बाद जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल समाप्त हो गया, जो 10 नवंबर को सेवानिवृत्त हुए। जस्टिस संजीव खन्ना छह महीने के लिए इस पद पर रहेंगे और 13 मई 2025 को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। जस्टिस संजीव खन्ना का सुप्रीम कोर्ट में एक प्रभावशाली कार्यकाल रहा है। जज के रूप में उन्होंने 65 फैसले लिखे हैं। इसके अलावा, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लगभग 275 बेंचों का हिस्सा रहते हुए अनेक मामलों की सुनवाई की है।
कौन है SANJIV KHANNA?
न्यायमूर्ति खन्ना ने 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया और अपने करियर की शुरुआत दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट से की। 2004 में उन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए स्थायी वकील (सिविल) के रूप में नियुक्त किया गया। इसके बाद, 2005 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और 2006 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बना दिया गया। 18 जनवरी 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। उन्होंने 17 जून 2023 से 25 दिसंबर 2023 तक सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष का पद संभाला।

JUSTICE SANJIV KHANNA के करियर के मुख्य कार्य
- जस्टिस खन्ना उस सुप्रीम कोर्ट की बेंच का हिस्सा थे जिसने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जो एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद परियोजना थी।
- इसके अलावा, उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में अंतरिम जमानत दी थी।
- न्यायमूर्ति खन्ना संविधान पीठ का भी हिस्सा रहे हैं, जिसने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को सही ठहराया था, जिसने जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद को निरस्त किया।
- इसके अलावा, 2018 में उन्होंने चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करने वाले निर्णय का भी हिस्सा लिया था, जो राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता पर केंद्रित था।


