आजकल ज्यादातर सॉफ्टवेयर खरीदने की बजाय किराए पर लिया जाता है, यानी बिना किसी CD या डाउनलोड के सीधे ब्राउज़र से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरीके को SaaS यानी Software as a Service कहा जाता है, जो आज बिजनेस सॉफ्टवेयर का सबसे आम तरीका बन चुका है। इस पोस्ट में आसान भाषा में समझेंगे कि SaaS क्या है, यह कैसे काम करता है और यह पारंपरिक सॉफ्टवेयर से किस तरह अलग है।
SaaS क्या है?
SaaS यानी Software as a Service, एक ऐसा मॉडल है, जिसमें सॉफ्टवेयर को खरीदने या डाउनलोड करने की बजाय इंटरनेट के जरिए सीधे इस्तेमाल किया जाता है। यूजर को सिर्फ ब्राउज़र या ऐप के जरिए लॉगिन करना होता है, और पूरा सॉफ्टवेयर कंपनी के सर्वर पर चलता रहता है। इसके लिए यूजर को कोई इंस्टॉलेशन या अपने कंप्यूटर पर स्टोरेज खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती, बस एक सब्सक्रिप्शन लेकर सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जा सकता है।
SaaS कैसे काम करता है?
इसमें सॉफ्टवेयर कंपनी अपने सर्वर पर पूरा एप्लिकेशन होस्ट करती है, और यूजर इंटरनेट के जरिए उससे जुड़कर उसका इस्तेमाल करता है। डेटा भी ज्यादातर मामलों में कंपनी के सर्वर पर ही सुरक्षित रहता है, जिससे यूजर को अलग से बैकअप की चिंता नहीं करनी पड़ती।
सॉफ्टवेयर में कोई भी अपडेट या नया फीचर आने पर वह अपने आप सभी यूजर तक पहुंच जाता है, बिना किसी को खुद अपडेट डाउनलोड करने की जरूरत के। ज्यादातर सर्विस मासिक या सालाना सब्सक्रिप्शन के आधार पर काम करती हैं, जिससे बिजनेस अपनी जरूरत के हिसाब से प्लान चुन सकते हैं।
यह पारंपरिक सॉफ्टवेयर से कैसे अलग है?
पारंपरिक सॉफ्टवेयर को एक बार खरीदकर कंप्यूटर पर इंस्टॉल करना पड़ता था, और अपडेट के लिए भी बार-बार डाउनलोड करना पड़ता था। इसके उलट, इस मॉडल में सब कुछ ऑनलाइन ही होता है, इसलिए किसी भी डिवाइस से, कहीं से भी उसी अकाउंट से लॉगिन करके काम किया जा सकता है।
इसकी कीमत भी ज्यादातर मामलों में एकमुश्त खर्च की बजाय छोटी मासिक किस्तों में चुकानी पड़ती है, जिससे शुरुआती खर्च कम हो जाता है और बिजनेस को कैश फ्लो मैनेज करने में आसानी होती है। कई कंपनियां तो फ्री ट्रायल भी देती हैं, जिससे कोई भी बिजनेस बिना पैसा खर्च किए यह देख सकता है कि सॉफ्टवेयर उसकी जरूरत के हिसाब से सही है या नहीं, इसके बाद ही आगे सब्सक्रिप्शन लेने का फैसला किया जा सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQ)
- क्या SaaS सिर्फ बड़े बिजनेस के लिए है?
नहीं, छोटे बिजनेस और यहां तक कि फ्रीलांसर भी अपनी जरूरत के हिसाब से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। - क्या इसके लिए हमेशा इंटरनेट चाहिए होता है?
ज्यादातर सर्विस के लिए इंटरनेट कनेक्शन जरूरी होता है, हालांकि कुछ टूल में सीमित ऑफलाइन फीचर भी मिल सकते हैं। - क्या डेटा की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह कंपनी की होती है?
ज्यादातर जिम्मेदारी सर्विस देने वाली कंपनी की होती है, लेकिन यूजर को भी अपने अकाउंट की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। - क्या सब्सक्रिप्शन बंद करने पर डेटा खो जाता है?
यह हर कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करता है, इसलिए सब्सक्रिप्शन शुरू करने से पहले डेटा एक्सपोर्ट और बैकअप से जुड़े नियम जरूर देख लेने चाहिए। - इस मॉडल का सबसे बड़ा और लोकप्रिय उदाहरण कौन सा माना जाता है?
इस मॉडल के सबसे लोकप्रिय उदाहरणों में Salesforce को गिना जाता है, जिसे इस तरह की सर्विस को मुख्यधारा में लाने वाली शुरुआती कंपनियों में से एक माना जाता है।
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