HomeTech & Gadgetsफोन में Malware होने के संकेत क्या हैं? इन लक्षणों को नजरअंदाज...

फोन में Malware होने के संकेत क्या हैं? इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

कंप्यूटर या फोन अचानक धीमा होना, बार-बार अजीब पॉप-अप आना या अनजान ऐप्स खुद-ब-खुद इंस्टॉल हो जाना, ये सब अक्सर एक ही चीज की तरफ इशारा करते हैं। इसे Malware कहा जाता है, जो डिवाइस को नुकसान पहुंचाने या डेटा चुराने के मकसद से बनाया गया सॉफ्टवेयर होता है। इस पोस्ट में आसान भाषा में समझेंगे कि Malware क्या है, यह कैसे फैलता है और इससे बचने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

Malware क्या है?

Malware यानी मैलिशियस सॉफ्टवेयर, वह प्रोग्राम है, जिसे किसी डिवाइस या सिस्टम को नुकसान पहुंचाने, डेटा चुराने या उस पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने के मकसद से बनाया जाता है। यह वायरस, ट्रोजन, स्पाइवेयर और रैनसमवेयर जैसे कई अलग-अलग रूपों में आ सकता है। इसका मकसद अलग-अलग हो सकता है, जैसे पासवर्ड चुराना, फाइल को लॉक करके पैसे मांगना या डिवाइस को बिना यूजर की जानकारी के किसी और के कंट्रोल में देना।

Malware कैसे फैलता है?

सबसे आम तरीका है फर्जी या अनजान लिंक पर क्लिक करना, जो अक्सर ईमेल, मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए भेजे जाते हैं। इसके अलावा अनवेरिफाइड वेबसाइट से ऐप या फाइल डाउनलोड करने से भी यह डिवाइस में आसानी से घुस सकता है। कुछ मामलों में यह किसी दूसरे इंफेक्टेड डिवाइस या USB ड्राइव के जरिए भी फैल सकता है।

एक बार डिवाइस में घुसने के बाद यह बैकग्राउंड में चुपचाप काम करना शुरू कर देता है, जिससे यूजर को इसका पता तुरंत नहीं चल पाता। कुछ एडवांस तरीके भी इस्तेमाल होते हैं, जैसे असली दिखने वाले सॉफ्टवेयर अपडेट या भरोसेमंद ऐप जैसा दिखने वाला फर्जी ऐप, जिससे यूजर आसानी से धोखा खा जाता है।

इसके नुकसान

सबसे बड़ा नुकसान यह है कि निजी जानकारी, जैसे पासवर्ड, बैंकिंग डिटेल या फोटो, चोरी हो सकती है, जिसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ मामलों में डिवाइस पूरी तरह हैंग हो जाता है या फाइलें लॉक होकर बेकार हो जाती हैं। बिजनेस के लिए भी यह बड़ा खतरा बन सकता है क्योंकि अगर कंपनी के सिस्टम में यह घुस जाए, तो ग्राहकों का डेटा और जरूरी फाइलें दोनों खतरे में आ सकती हैं, जिससे भरोसे और पैसे, दोनों का नुकसान हो सकता है।

इससे कैसे बचें?

सबसे जरूरी है कि किसी भी अनजान लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच ली जाए। ऐप और सॉफ्टवेयर हमेशा आधिकारिक स्टोर या भरोसेमंद वेबसाइट से ही डाउनलोड करने चाहिए। डिवाइस का सॉफ्टवेयर और एंटीवायरस समय-समय पर अपडेट रखना भी जरूरी है, क्योंकि इससे नए खतरों से बचाव में मदद मिलती है। अकाउंट पर मजबूत पासवर्ड और एक्स्ट्रा वेरिफिकेशन जैसी सुविधा इस्तेमाल करने से भी सुरक्षा काफी बढ़ जाती है।

लैपटॉप Malware सिक्योरिटी स्कैन सिमेट्रिक व्यू

Frequently Asked Questions (FAQ)

  • क्या Malware सिर्फ कंप्यूटर को ही प्रभावित करता है?
    नहीं, यह स्मार्टफोन, टैबलेट और यहां तक कि स्मार्ट होम डिवाइस को भी प्रभावित कर सकता है।
  • क्या फ्री एंटीवायरस काफी होता है?
    बेसिक सुरक्षा के लिए फ्री एंटीवायरस मदद कर सकता है, लेकिन ज्यादा सुरक्षा के लिए पेड और भरोसेमंद सिक्योरिटी टूल बेहतर माने जाते हैं।
  • क्या Malware खुद-ब-खुद डिलीट हो सकता है?
    कुछ मामलों में हल्के इंफेक्शन खुद ठीक हो सकते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में सही सिक्योरिटी टूल से स्कैन और रिमूव करना जरूरी होता है।
  • क्या सिर्फ पायरेटेड सॉफ्टवेयर से ही खतरा होता है?
    नहीं, फर्जी लिंक, ईमेल अटैचमेंट और असुरक्षित वेबसाइट से भी यह डिवाइस में आ सकता है, सिर्फ पायरेटेड सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है।
  • इस तरह के खतरों पर नजर रखने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था कौन सी मानी जाती है?
    इस तरह के साइबर खतरों पर नजर रखने और जानकारी शेयर करने में CISA जैसी संस्था की भूमिका काफी अहम मानी जाती है।

आगे और समाचार पढ़ें:

Malware से जुड़ी जानकारी के अलावा, साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें: Multi Factor Authentication, जिसमें बताया गया है कि अकाउंट को एक्स्ट्रा सुरक्षा कैसे दी जाती है; End to End Encryption, जिसमें बताया गया है कि मैसेजिंग ऐप्स में डेटा कैसे सुरक्षित रहता है; और Advanced Encryption Standard, जिसमें बताया गया है कि डेटा एन्क्रिप्शन कैसे काम करता है।

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

WhatsApp Group
Join Now
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular