रघुवंश के वो राजा जिन्होंने अपनी कोख से दिया अपने पुत्र को जन्म

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Ramayana Facts: क्यों एक राजा को अपनी ही कोख से देना पड़ा अपने बच्चे को जन्म?

Ramayana Facts: आज की आधूनिक दुनिया में आपने कई बार सुना होगा कि एक पुरुष अपने बच्चे को जन्म दे रहा है लेकिन क्या आपको मालूम है कि रघुवंश के समय में भी एक राजा ने अपने बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन ऐसा क्या हुआ था कि राजा को अपनी संतान को खुद ही जन्म देना पड़ा।

रामायण (Ramayana Facts) के बालकांड में इस बात का वर्णन किया गया है कि गुरु वशिष्ठ द्वारा राम जी के कुल को रघुवंश नाम दिया गया था। इस कुल की उत्तपति ब्रह्माजी के पुत्र मरिचि से हुई जिसके बाद कुल बढ़ता चला गया। इस कुल के एक राजा थे राजा इक्ष्वांकु जिन्होंने अयोध्या (Ramayana Facts) को अपनी राजधानी बनाया। इन्हीं राजा द्वारा इक्ष्वांकु राज वंश की स्थापना की गई। इन राजा के बेटे हुए राजा युवनाश्व जिनका कोई पुत्र नहीं था।

अब अपने वंश (Ramayana Facts) की इच्छा को पूरा करने के लिए राजा युवनाश्व ने अपना सारा राज- पाठ त्याग दिया और वन में जाकर तपस्या करने लगे। वन में रहते हुए राजा युवनाश्व की मुलाकात महर्षि भृगु के वंशज च्यवन ऋषि से हुई जहां ऋषि ने उनके लिए इष्टि यज्ञ करना शुरु किया। इस यज्ञ से राजा को पुत्र की प्राप्ति हो सकती थी, जिसके बाद यज्ञ पूरा होने के बाद ऋषि च्यवन ने एक मटके में जल भरकर उसे अभिमंत्रित किया और राजा की पत्नी से कहा कि इस अभिमंत्रित जल को ग्रहण करले ताकि वो गर्भधारण कर सके।

अब जब ये यज्ञ पूरा हो गया तो इस यज्ञ में शामिल हुए सभी ऋषि मुनि थक गए और साथ ही राजा भी जिसके बाद यह सभी गहरी नींद में सो गए। अब आधी रात में राजा युवनाश्व को बहुत तेज प्यास लगी। जिसके बाद राजा युवनाश्व ने पानी के लिए काफी आवाज लगाई लेकिन वहां मौजूद सभी लोग काफी गहरी नींद में थे जिसके कारण किसी ने भी राजा की आवाज नहीं सुनी और ऐसे में राजा खुद ही पानी पीने के लिए खड़े हो गए।

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अब जब राजा (Ramayana Facts) पीने का पानी ढ़ूढ ही रहे थे कि तभी राजा के हाथ एक कलश लगा जिसमें पानी भरा हुआ था। अब राजा काफी प्यासे थे जिसके बाद उन्होंने तुरंत इस कलश में भरे जल को पी लिया। आपको बता दें कि ये वही कलश था जिस पर ऋषि च्यवन ने अभीमंत्रित जल रखा था जिसे राजा की पत्नी को ग्रहण करना था लेकिन रानी की जगह इस अभीमंत्रित जल को राजा ने ग्रहण कर लिया।

इस जल को ग्रहण करने के बाद राजा ने गर्भधारण (Ramayana Facts) कर लिया और जब संतान के जन्म का वक्त आया तो दैवीय चिकित्सकों और अश्विन कुमारों द्वारा राजा की कोख को चीरा गया और उनकी कोख से बच्चे को बाहर निकाला गया।

रघुवंश के वो राजा जिन्होंने अपनी कोख से दिया अपने पुत्र को जन्म

लेकिन अभी भी एक चिंता का विषय था और वो ये था कि बच्चे की भीख को कैसे मिटाया जाया। क्योंकि राजा (Ramayana Facts) एक पुरुष थे तो इस कारण वो बच्चे को दूध नहीं पिला सकते थे। ऐसे में देवताओं के राजा इंद्रदेव ने बच्चे की मां की कमी को पूरा करते हुए बच्चे के मुंह में अपनी उंगली डाली जिससे दूध निकलने लगा और ऐसे में बच्चे की भूख मिट गई। जब इंद्र देव अपनी उंगली से बच्चे को दूध पिलाने लगे तो उन्होंने उस वक्त कहा “मम धाता” जिसका मतलब है “मैं इसकी मां हूं”। इंद्र देव के ऐसे कहने के बाद इस बच्चे का नाम पड़ा, “ममधाता” या “मांधाता”

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