HomePersonal FinancePEG Ratio क्या है? सिर्फ P/E देखकर शेयर खरीदना क्यों है अधूरा

PEG Ratio क्या है? सिर्फ P/E देखकर शेयर खरीदना क्यों है अधूरा

PEG Ratio यानी प्राइस अर्निंग्स टू ग्रोथ रेशियो, किसी शेयर के P/E रेशियो को कंपनी की कमाई बढ़ने की रफ्तार से जोड़कर देखने का तरीका है। इससे पता चलता है कि कोई शेयर अपनी ग्रोथ के हिसाब से सस्ता है या महंगा।

ज्यादातर नए निवेशक शेयर खरीदते समय सिर्फ P/E देखते हैं और मान लेते हैं कि कम P/E वाला शेयर सस्ता और ज्यादा P/E वाला महंगा है। लेकिन कई बार कम P/E वाला शेयर इसलिए सस्ता होता है, क्योंकि उस कंपनी का भविष्य कमजोर है।

वहीं कुछ तेजी से बढ़ती कंपनियां ऊंचे P/E के बावजूद असल में सस्ती साबित होती हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह कैसे तय करें।

पहले समझें P/E रेशियो की कमी

P/E रेशियो बताता है कि कंपनी के एक रुपये की कमाई के लिए आप कितने रुपये चुका रहे हैं। अगर किसी शेयर की कीमत 400 रुपये है और प्रति शेयर कमाई 20 रुपये, तो उसका P/E 20 होगा।

इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि यह सिर्फ आज की या पिछले साल की कमाई देखता है। कंपनी आगे कितनी तेजी से बढ़ेगी, इसकी कोई जानकारी P/E से नहीं मिलती।

शेयर बाजार में निवेशक असल में भविष्य की कमाई के लिए पैसा लगाते हैं। इसलिए सिर्फ P/E देखकर फैसला लेना अधूरी तस्वीर देखने जैसा है।

PEG Ratio कैसे निकालें?

इसका फॉर्मूला बहुत आसान है: शेयर का P/E रेशियो, कंपनी की प्रति शेयर कमाई यानी EPS की सालाना बढ़त की दर से भाग। बढ़त की दर को प्रतिशत की जगह सीधे संख्या में लिखा जाता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी का P/E 30 है और उसकी कमाई हर साल 20 प्रतिशत बढ़ रही है, तो PEG Ratio होगा 30 भाग 20, यानी 1.5।

ग्रोथ के लिए आप पिछले तीन से पांच साल की औसत बढ़त या आने वाले सालों का अनुमान ले सकते हैं। पिछली बढ़त पर बना आंकड़ा ट्रेलिंग PEG और अनुमान पर बना आंकड़ा फॉरवर्ड PEG कहलाता है।

दो कंपनियों का आसान उदाहरण

मान लीजिए कंपनी A का P/E 40 है, जबकि कंपनी B का P/E सिर्फ 15। पहली नजर में कंपनी B काफी सस्ती लगती है।

अब मान लीजिए कंपनी A की कमाई हर साल 40 प्रतिशत की तेजी से बढ़ रही है, जबकि कंपनी B की कमाई सिर्फ 5 प्रतिशत। तब कंपनी A का PEG Ratio 40 भाग 40, यानी 1 होगा।

वहीं कंपनी B का PEG 15 भाग 5, यानी 3 होगा। इसका मतलब है कि अपनी ग्रोथ के हिसाब से कंपनी B असल में कंपनी A से तीन गुना महंगी है।

यही वजह है कि अनुभवी निवेशक P/E के साथ PEG Ratio भी जरूर देखते हैं, ताकि सस्ते दिखने वाले महंगे शेयर के जाल में न फंसें।

PEG का आंकड़ा क्या बताता है?

आमतौर पर 1 के आसपास का PEG सही कीमत माना जाता है। यानी शेयर की कीमत कंपनी की ग्रोथ के बराबर है।

1 से कम PEG का मतलब हो सकता है कि शेयर अपनी ग्रोथ के मुकाबले सस्ता है और इसमें आगे बढ़त की गुंजाइश है। वहीं 1 से काफी ज्यादा PEG इशारा करता है कि बाजार पहले ही शेयर को उसकी ग्रोथ से ज्यादा कीमत दे चुका है।

ध्यान रहे, ये सिर्फ मोटे संकेत हैं, कोई पक्का नियम नहीं। अलग अलग सेक्टर में PEG का सामान्य स्तर भी अलग हो सकता है। भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार में कई अच्छी कंपनियों का PEG Ratio 1 से थोड़ा ऊपर रहना भी सामान्य है, क्योंकि निवेशक उनकी लंबी ग्रोथ के लिए प्रीमियम देने को तैयार रहते हैं।

किसने लोकप्रिय बनाया यह तरीका?

इस अनुपात को 1960 के दशक के आखिर में अमेरिकी विश्लेषक मारियो फरीना ने पेश किया था। बाद में मशहूर फंड मैनेजर पीटर लिंच ने अपनी किताब में इसका जिक्र करके इसे दुनिया भर के निवेशकों में लोकप्रिय बना दिया।

लिंच का मानना था कि किसी अच्छी कंपनी का P/E लगभग उसकी ग्रोथ के बराबर होना चाहिए। यही सोच आज PEG Ratio की नींव है।

इसकी कमियां भी जानें

PEG पूरी तरह ग्रोथ के अनुमान पर टिका होता है, और अनुमान अक्सर गलत भी निकलते हैं। अगर कमाई उम्मीद से कम बढ़ी, तो आज सस्ता दिखने वाला शेयर कल महंगा साबित हो सकता है।

जिन कंपनियों की कमाई घट रही है या घाटे में है, उनके लिए PEG Ratio का कोई मतलब नहीं बनता। स्टील, सीमेंट या ऑटो जैसी चक्रीय कंपनियों में भी कमाई ऊपर नीचे होने से यह आंकड़ा भ्रम पैदा कर सकता है।

यह अनुपात डिविडेंड, कर्ज और कंपनी के प्रबंधन की गुणवत्ता को भी नहीं देखता। इसलिए इसे दूसरे आंकड़ों के साथ मिलाकर ही इस्तेमाल करें।

निवेश में इसका सही इस्तेमाल कैसे करें?

PEG Ratio का सबसे अच्छा इस्तेमाल एक ही सेक्टर की कंपनियों की तुलना के लिए होता है। जैसे दो IT कंपनियों या दो बैंकों में से कौन अपनी ग्रोथ के हिसाब से बेहतर कीमत पर मिल रही है।

शेयर चुनते समय इसके साथ कंपनी का कर्ज, कैश फ्लो, मुनाफे का मार्जिन और प्रबंधन भी जरूर देखें। कई स्टॉक स्क्रीनर वेबसाइट्स पर यह आंकड़ा पहले से तैयार मिल जाता है। किसी शेयर का PEG Ratio हर तिमाही के नतीजों के बाद बदल सकता है, इसलिए इसे समय समय पर दोबारा जांचते रहें।

नए निवेशक अगर किसी एक शेयर पर बड़ा दांव लगाने से पहले किसी सेबी रजिस्टर्ड सलाहकार की राय ले लें, तो जोखिम काफी कम हो जाता है।

शेयर बाजार और निवेश से जुड़ी और जानकारी

PEG को अच्छी तरह समझने के लिए पहले P/E Ratio की पूरी जानकारी पढ़ें। कंपनी की ऑपरेटिंग कमाई समझने के लिए EBITDA का असली मतलब देखें। किसी कंपनी की पूरी कीमत आंकने के लिए Enterprise Value क्या होता है भी जरूर पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. अच्छा PEG Ratio कितना माना जाता है?

आमतौर पर 1 या उससे कम PEG Ratio को आकर्षक माना जाता है। लेकिन इसे सिर्फ एक संकेत की तरह देखें, अकेले इसके आधार पर शेयर न खरीदें।

2. क्या कम P/E वाला शेयर हमेशा सस्ता होता है?

नहीं, अगर कंपनी की कमाई बहुत धीरे बढ़ रही है या घट रही है, तो कम P/E के बावजूद शेयर महंगा साबित हो सकता है।

3. PEG नेगेटिव क्यों आता है?

जब कंपनी की कमाई घट रही हो या कंपनी घाटे में हो, तब PEG नेगेटिव आता है। ऐसे मामलों में इस आंकड़े से कोई सही निष्कर्ष नहीं निकलता।

4. इस अनुपात के बारे में विस्तार से कहां पढ़ें?

इस अनुपात के इतिहास, फॉर्मूले और सीमाओं की विस्तृत जानकारी यहां पढ़ सकते हैं।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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