MRP Overcharging Complaint आज हर उस ग्राहक के लिए जरूरी जानकारी है, जिससे किसी दुकान, सिनेमा हॉल, ढाबे या रेलवे स्टेशन पर पैक्ड सामान के लिए छपी कीमत से ज्यादा पैसे लिए गए हों। पानी की बोतल पर कूलिंग चार्ज या चिप्स पर GST अलग से मांगना अब आम हो गया है। ज्यादातर लोग 5 या 10 रुपये के लिए बहस नहीं करते। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मामले में कानून पूरी तरह आपके साथ है?
MRP क्या है और इससे ज्यादा कीमत लेना गैरकानूनी क्यों है?
MRP यानी अधिकतम खुदरा मूल्य वह सबसे ऊंची कीमत है, जिस पर कोई पैक्ड सामान बेचा जा सकता है। इसमें GST समेत सभी टैक्स पहले से शामिल होते हैं। लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम 2011 के नियम 18(2) के अनुसार कोई भी दुकानदार, थोक विक्रेता या निर्माता पैक्ड सामान को छपी कीमत से ज्यादा पर नहीं बेच सकता।
इसके अलावा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 में दिखाई गई या तय कीमत से ज्यादा वसूलने को अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया है। यानी ऐसे दुकानदार पर दो अलग कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
दुकानदार अक्सर कौन से बहाने बनाते हैं?
सबसे आम बहाना ठंडा करने का चार्ज होता है। फ्रिज में रखी कोल्ड ड्रिंक या पानी की बोतल पर भी वही MRP लागू होती है जो उस पर छपी है। दूसरा बहाना यह होता है कि टैक्स ऊपर से लगेगा। चूंकि MRP में टैक्स पहले से जुड़ा होता है, इसलिए अलग से टैक्स जोड़ना नियम के खिलाफ है। सिनेमा हॉल, एयरपोर्ट और हाईवे ढाबों पर बिकने वाले सील्ड पैक्ड सामान पर भी यही नियम लागू होता है।
MRP Overcharging Complaint कैसे दर्ज करें?
MRP Overcharging Complaint के लिए सबसे पहले सबूत इकट्ठा करें। पक्का बिल या UPI पेमेंट का स्क्रीनशॉट, सामान का पैकेट और MRP वाले लेबल की साफ फोटो संभालकर रखें। इसके बाद नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1915 पर कॉल करें। यहां हिंदी समेत 17 भाषाओं में शिकायत दर्ज की जाती है।
आप नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की वेबसाइट या NCH ऐप से ऑनलाइन शिकायत भी कर सकते हैं। मिलने वाला शिकायत नंबर जरूर नोट करें, ताकि आगे स्टेटस चेक कर सकें। तीसरा रास्ता आपके राज्य का लीगल मेट्रोलॉजी विभाग है। जिले के इंस्पेक्टर या कंट्रोलर को लिखित शिकायत दें, जिसमें दुकान का नाम, पता, तारीख, सामान, छपी कीमत और वसूली गई रकम साफ लिखी हो।
दुकानदार पर कितना जुर्माना लग सकता है?
लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 की धारा 36(1) के तहत पहली बार पकड़े जाने पर 25,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। दूसरी बार यह जुर्माना 50,000 रुपये तक पहुंच सकता है। बार बार नियम तोड़ने पर 1 लाख रुपये तक जुर्माना, एक साल तक की जेल या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
ज्यादा लिया गया पैसा और मुआवजा कैसे मिलेगा जुर्माना सरकार के खाते में जाता है, इसलिए अपनी अतिरिक्त रकम वापस पाने के लिए जिला उपभोक्ता आयोग जाना होगा। अगर MRP Overcharging Complaint हेल्पलाइन पर दर्ज करने के बाद भी हल न निकले, तो ई-जागृति पोर्टल पर घर बैठे केस फाइल किया जा सकता है।
5 लाख रुपये तक के दावे पर कोई फीस नहीं लगती और वकील रखना भी जरूरी नहीं है। आयोग ज्यादा ली गई रकम लौटाने के साथ मानसिक परेशानी और केस खर्च का मुआवजा भी दिला सकता है। ध्यान रहे, शिकायत घटना के दो साल के भीतर करनी होती है।

खरीदारी के समय इन बातों का रखें ध्यान
हर पैक्ड सामान खरीदने से पहले उस पर छपी MRP जरूर पढ़ें। कई बार पुराने स्टिकर के ऊपर नया स्टिकर चिपका होता है, इसे भी ध्यान से जांचें। याद रखिए, MRP Overcharging Complaint करने में ज्यादा समय नहीं लगता। आपकी एक शिकायत से दुकानदार बाकी ग्राहकों से भी ज्यादा पैसे लेना बंद कर सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या MRP से सिर्फ 1 रुपया ज्यादा लेने पर भी MRP Overcharging Complaint हो सकती है?
हां, MRP से एक रुपया भी ज्यादा लेना नियम का उल्लंघन है। रकम छोटी होने से कानून नहीं बदलता।
2. MRP Overcharging Complaint कहां करें?
आप नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1915 पर कॉल कर सकते हैं या सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
3. क्या ठंडी कोल्ड ड्रिंक पर कूलिंग चार्ज लेना सही है?
नहीं, ठंडी बोतल पर भी वही कीमत लागू होती है जो पैकेट पर छपी है।
4. क्या दुकानदार MRP के ऊपर GST जोड़ सकता है?
नहीं, MRP में सभी टैक्स पहले से शामिल होते हैं, इसलिए ऊपर से GST मांगना गलत है।
5. MRP Overcharging Complaint के लिए कौन से सबूत जरूरी हैं?
बिल या पेमेंट का सबूत, सामान का पैकेट और MRP लेबल की साफ फोटो सबसे जरूरी सबूत हैं।
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