Loan Against Securities एक ऐसा लोन है, जिसमें आप अपने शेयर, म्यूचुअल फंड या बॉन्ड बेचे बिना उन्हें गिरवी रखकर बैंक या NBFC से पैसा उधार ले सकते हैं। मान लीजिए अचानक पैसों की जरूरत आ गई और आपका पोर्टफोलियो अभी नुकसान में है। ऐसे में निवेश बेचना घाटे का सौदा लगता है। यहीं यह लोन काम आता है। लेकिन इसमें कुछ ऐसे जोखिम भी छिपे हैं, जिन्हें समझे बिना लोन लेना भारी पड़ सकता है।
Loan Against Securities क्या है और कैसे काम करता है?
इसमें आपके निवेश डीमैट खाते में ही रहते हैं, बस उन पर लेंडर के नाम से प्लेज यानी गिरवी दर्ज हो जाता है। शेयरों का मालिकाना हक आपके पास ही रहता है। इसलिए डिविडेंड, बोनस और कीमत बढ़ने का फायदा भी आपको ही मिलता रहता है। ज्यादातर लेंडर यह रकम ओवरड्राफ्ट लिमिट के रूप में देते हैं। यानी आप जितनी रकम निकालते हैं और जितने दिन इस्तेमाल करते हैं, ब्याज सिर्फ उसी पर लगता है।
किन सिक्योरिटीज पर मिलता है लोन?
लिस्टेड शेयर, इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड, सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, बीमा पॉलिसी और REIT या InvIT की यूनिट्स पर यह सुविधा मिलती है। हर लेंडर की अपनी अप्रूव्ड लिस्ट होती है। छोटे और ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले शेयर अक्सर इस लिस्ट में शामिल नहीं होते।
कितना लोन मिलता है?
और RBI के नए नियम लोन की रकम लोन टू वैल्यू यानी LTV रेशियो से तय होती है। शेयरों पर आमतौर पर बाजार कीमत का 50 से 60% तक लोन मिलता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड पर यह सीमा करीब 75% और डेट फंड या बॉन्ड पर 80 से 85% तक जा सकती है। असली सीमा हर लेंडर अपनी पॉलिसी से तय करता है।
RBI ने अक्टूबर 2025 में शेयरों के बदले लोन की सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये प्रति व्यक्ति कर दी थी। IPO में निवेश के लिए मिलने वाले लोन की सीमा भी 10 लाख से बढ़कर 25 लाख रुपये हो गई। लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज पर लगी नियामकीय सीमा हटा दी गई।
Loan Against Securities के फायदे
पर्सनल लोन के मुकाबले इसकी ब्याज दर आमतौर पर कम होती है, क्योंकि लोन पूरी तरह सिक्योर्ड है। निवेश बेचना नहीं पड़ता, इसलिए कैपिटल गेन टैक्स भी नहीं लगता और लंबे समय की कंपाउंडिंग बनी रहती है। प्रोसेस ज्यादातर ऑनलाइन है और पैसा कुछ घंटों या एक दो दिन में मिल जाता है। कई लेंडर प्रीपेमेंट पर कोई चार्ज भी नहीं लेते।
इसमें क्या जोखिम हैं?
सबसे बड़ा खतरा मार्जिन कॉल का है। अगर बाजार गिरता है और गिरवी रखे शेयरों की कीमत घटती है, तो लेंडर आपसे अतिरिक्त सिक्योरिटी या नकद जमा करने को कहेगा। तय समय में मार्जिन पूरा नहीं हुआ तो लेंडर आपके शेयर बाजार में बेच सकता है। यह बिक्री अक्सर गिरते बाजार में होती है, जिससे नुकसान पक्का हो जाता है। दूसरा जोखिम उधार के पैसों से शेयर खरीदने का है।

अगर आप Loan Against Securities से दोबारा बाजार में पैसा लगाते हैं, तो गिरावट में नुकसान दोगुना हो सकता है। तीसरा, ब्याज और EMI समय पर न चुकाने पर भी लेंडर सिक्योरिटीज बेच सकता है। इसका असर आपके क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ता है। प्रोसेसिंग फीस, प्लेज चार्ज और डीमैट से जुड़े छोटे शुल्क भी कुल लागत बढ़ा देते हैं। लोन लेने से पहले इनका पूरा हिसाब जरूर देख लें।
लोन लेने से पहले ध्यान रखें ये बातें
लेंडर जितना LTV दे रहा है, उससे कम रकम निकालें। इससे बाजार गिरने पर भी मार्जिन कॉल का खतरा कम रहता है। मार्जिन कॉल संभालने के लिए कुछ नकद या अतिरिक्त फंड अलग रखें। इस लोन का इस्तेमाल छोटी अवधि की जरूरतों के लिए करें, सट्टेबाजी के लिए नहीं। सही प्लानिंग के साथ लिया गया Loan Against Securities बिना निवेश तोड़े पैसों की जरूरत पूरी करने का अच्छा जरिया बन सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Loan Against Securities किसे मिल सकता है?
जिसके पास डीमैट खाते में लेंडर की अप्रूव्ड लिस्ट वाले शेयर, म्यूचुअल फंड या बॉन्ड हों, वह यह लोन ले सकता है।
2. Loan Against Securities में क्या गिरवी रखे शेयरों पर डिविडेंड मिलता रहता है?
हां, मालिकाना हक आपके पास रहता है, इसलिए डिविडेंड और बोनस का फायदा आपको ही मिलता है।
3. Loan Against Securities में मार्जिन कॉल पूरी न करने पर क्या होता है?
लेंडर बकाया रकम वसूलने के लिए आपके गिरवी रखे शेयर या फंड यूनिट्स बेच सकता है।
4. Loan Against Securities में शेयरों के बदले अधिकतम कितना लोन मिल सकता है?
RBI के नए नियमों के तहत एक व्यक्ति शेयरों के बदले अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक लोन ले सकता है।
5. Loan Against Securities से जुड़े आधिकारिक नियम कहां देखें?
बैंक और NBFC के लिए तय सभी नियम और सर्कुलर आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। लोन लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर बात करें।

