केदारनाथ जाने वाले प्रत्येक घोड़े-खच्चर की काटी जा रही है 40-40 रुपए की अवैध पर्ची

  • सोशल मीडिया पर मामला हो रहा वायरल, जिला पंचायत अध्यक्ष ने बताया बेबुनियाद

रुद्रप्रयाग (नरेश भट्ट): जिला पंचायत नहीं तो कौन कर रहा केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चर संचालकों से अवैध वसूली?  उत्तराखंड  की रुद्रप्रयाग जिला पंचायत पर केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले घोड़े-खच्चर संचालकों से अवैध वसूली के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि घोड़े-खच्चरों की गददी के नाम पर प्रत्येक घोड़े-खच्चर संचालक से 40-40 रूपये की पर्ची काटी जा रही है, जबकि उन्हें गद्दी तक नहीं दी जा रही है। इसके अलावा कई बार तो पशु पालकों से सौ से डेढ़ सौ रूपए तक लिये जा रहे हैं। बाहरी जिलों से आये पशु पालकों से जमकर लूट मचाई जा रही है। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष अमरदेई शाह ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

दरअसल, केदारनाथ आपदा के बाद से केदार यात्रा मार्ग की व्यवस्थाओं को जिला पंचायत से हटाकर प्रशासन को सौंपा गया है। प्रशासन की ओर से सफाई व्यवस्था जहां सुलभ को सौंपी गई है, वहीं घोड़े-खच्चरों का प्रीपेड काउंटर जी-मैक्स कंपनी संभाल रही है। कभी जिला पंचायत के पास केदारनाथ यात्रा की पूरी व्यवस्थाएं हुआ करती थी, मगर आज कुछ भी नहीं है। मात्र सोनप्रयाग और सीतापुर में दो पार्किंग के जरिये जिला पंचायत राजस्व जुटा रहा है। पिछले कुछ समय से जिला पंचायत की ओर से घोड़े-खच्चर संचालकों को गद्दी देकर चालीस रूपए की पर्ची काटी जा रही है। यह गद्दी घोड़े-खच्चरों में लगाई जाती है, जिससे तीर्थयात्री को यात्रा के समय कोई भी समस्या ना हो। यह कार्य जिला पंचायत पिछले कुछ सालों से कर रहा है, जिससे जिला पंचायत को यात्रा से थोड़ा बहुत आय प्राप्त हो जाती है। इस बार जिला पंचायत की ओर से जिस व्यक्ति को यह कार्य सौंपा गया है, उस पर अवैध वसूली का आरोप लग रहे हैं। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर साढ़े आठ हजार घोड़े-खच्चरों का रजिस्ट्रेशन हो रखा है। इन घोड़े-खच्चरों में बैठने वाले किसी भी यात्री को कोई दिक्कत न हो, इसके लिये जिला पंचायत ने गददी लगाने के लिए जिला प्रशासन की अनुमति पर एक व्यक्ति को यह कार्य सौंपा। शर्तो के तहत घोड़े-खच्चर संचालकों को गद्दी देकर चालीस रूपए की पर्ची काटी जानी है, जिसका कार्य जी-मैक्स को करना है। लेकिन शिकायतें यह आ रही है कि जिस व्यक्ति को यह कार्य सौंपा गया है कि उसकी ओर से बिना पर्ची काटे ही घोड़े-खच्चर स्वामियों से पैंसे वसूल लिये हैं। जबकि हजारों संचालकों को गद्दी भी नहीं दी गई है। बाहरी जिलों से घोड़े-खच्चरों का संचालन करने आ रहे लोगों से सौ से डेढ़ सौ रूपए वसूले जा रहे हैं।

शिकायत मिलने के बाद जिला पंचायत और प्रशासन ने इस प्रक्रिया को समाप्त कर दिया है। जिला पंचायत अध्यक्ष अमरदेई शाह ने कहा कि सोशल मीडिया में यह मामला प्रचारित हो रहा है और जिला पंचायत पर अवैध वसूली के आरोप लगाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत किसी घोड़े-खच्चर स्वामी से अवैध वसूली नहीं कर रही है। जिला पंचायत की ओर से चालीस रूपये की पर्ची काटी जा रही थी और उस चालीस रूपये की पशुपालक को गद्दी दी जा रही थी, जिससे तीर्थयात्रियों को यात्रा के समय किसी परेशानी से ना जूझना पड़े। बिना जांच किये ही कुछ लोग बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों में कोई सत्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत और जिला प्रशासन ने मिलकर यह कार्यवाही की थी। कुछ लोग जिला पंचायत को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन और जिला पंचायत ने इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया है।