KARGIL VIJAY DIWAS 2025: आज भारत पूरे सम्मान और गर्व के साथ 26वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है। 1999 के कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों की स्मृति में देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कारगिल के वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में देशभर में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।

KARGIL VIJAY DIWAS की शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कारगिल विजय दिवस हमें मां भारती के उन वीर सपूतों की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि उनका साहस और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदा प्रेरणा देता रहेगा। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कारगिल युद्ध के शहीदों की वीरता को नमन करते हुए उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की और युवाओं से उनके बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

लद्दाख के द्रास में स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित अनेक सैन्य अधिकारी भाग ले रहे हैं। इस समारोह में पुष्पांजलि, श्रद्धांजलि सभा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली स्थित अमर जवान ज्योति पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। इस कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों, गणमान्य व्यक्तियों और शहीदों के परिजन की उपस्थिति रहेगी।

इस वर्ष पहली बार देश के 150 से अधिक शहरों और कस्बों में स्मृति समारोह, परेड, और जनचर्चाएं आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य देशवासियों, विशेषकर युवाओं को वीर सैनिकों की गाथाओं से जोड़ना और देशभक्ति की भावना को जागृत करना है। जम्मू से कारगिल तक महिला सशक्तिकरण और देश सेवा का संदेश लेकर 26 महिला बाइक राइडर्स की टोली रवाना हुई है, जो रेजांग ला तक यात्रा कर शहीदों को श्रद्धांजलि देगी।

कारगिल युद्ध का भारत के सैन्य इतिहास में विशेष स्थान है। मई से जुलाई 1999 तक चले इस संघर्ष में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत पाकिस्तानी घुसपैठियों को नियंत्रण रेखा से खदेड़ते हुए ऊंची बर्फीली चोटियों पर विजय प्राप्त की। इस युद्ध में 527 भारतीय जवान शहीद हुए और 1,363 घायल हुए। कैप्टन विक्रम बत्रा जैसे साहसी योद्धाओं को उनके अदम्य शौर्य के लिए परमवीर चक्र से नवाजा गया।

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