यहां मंदिर की मूर्तियों के क्यों नहीं है हाथ पांव?

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Jagannath Temple: इस मंदिर के ऊपर से क्यों नहीं उड़ता कोई भी पक्षी?

Jagannath Temple: एक ऐसा मंदिर जो रहस्यों से भरा है, इस मंदिर में मौजूद भगवान की मूर्तियों के हाथों और पैरों के पंजे नहीं हैं, वहीं मंदिर (Jagannath Temple) के शिखर पर लगा झंडा भी हवा के विपरीत उड़ता है, न ही इस मंदिर के ऊपर से कोई पंछी उड़ता है और न ही कोई विमान इसके ऊपर से गुजरता है, ऐसे ही कई रहस्यों से भरा है ये मंदिर जिसे जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) के नाम से जाना जाता है।

चार धामों में से एक जगन्नाथ धाम (Jagannath Temple) अपने अंदर कई रहस्य समेटे हुए हैं। ये मंदिर ओडिशा के पूरी में स्थित है जो भगवान विष्णु के श्री कृष्ण अवतार को समर्पित है। यहां भगवान जगन्नाथ (Jagannath Temple) के साथ उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा विराजमान है। इन तीनों की मूर्तियों के ही हाथ और पांव के पंजे नहीं हैं।

पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक भगवान जगन्नाथ (Jagannath Temple) की मूर्ती विश्वकर्मा बना रहे थे और इस कार्य के दौरान उन्होंने एक शर्त रखी थी, उनकी शर्त के मुताबिक अगर उनके काम करने के दौरान कोई बाधा डालेगा तो वह काम बीच में ही रोक देगें।

अब विश्वकर्मा भगवान की मूर्तियां बनाने लगे और इसी दौरान राजा ने मूर्तियों को देखने के लिए दरवाजा खोल दिया जिससे विश्वकर्मा के काम में बाधा उत्पन्न हुई और उन्होंने काम बीच में ही छोड़ दिया। इसी कराण जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) में मौजूद तीनों मूर्तियों के हाथ और पैरों के पंजे नहीं हैं।

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वहीं इस मंदिर (Jagannath Temple) में आपको बड़ी ही विचित्र घटनाएं घटती दिखाई देंगी। इन्हीं में से एक है जगन्नाथ मंदिर के शिखर में मौजूद झंडा। दरअसल ये झंडा इसलिए खास है क्योंकि ये हमेशा हवा के विपरीत उड़ता है। आपने देखा होगा कि दिन के समय में हवा समुद्र से धरती की तरफ चलती है, वहीं शाम को इसके बिलकुल उलट होता है, यानी की शाम को हवा का रुख धरती से समुद्र की तरफ होता है, लेकिन मंदिर (Jagannath Temple) के शिखर में मौजूद झंडा इन हवाओं के बिलकुल विपरीत उड़ता है।

वहीं मंदिर (Jagannath Temple) के शिखर में एक सुदर्शन चक्र भी मौजूद है जिसे किसी भी दिशा से देखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि मानों चक्र का मुंह आपकी तरफ हो। इसके साथ ही मंदिर (Jagannath Temple) के शिखर की छाया कभी जमीन पर नहीं पढ़ती है यानी की ये छाया अदृश्य है और ऐसा क्यों होता है ये भी आजतक रहस्य ही बना हुआ है।

आपको बता दें कि जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) समुद्र के पास में स्थित है लेकिन मंदिर (Jagannath Temple) के अंदर समुद्र की लहरों की आवाज़ नहीं आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई नहीं देती है लेकिन जैसे ही आप मंदिर से बाहर आएंगे आपको समुद्र की लहरों की आवाज़ सुनाई देने लगेगी।

इसके साथ ही इस मंदिर (Jagannath Temple) के ऊपर से कभी कोई विमान नहीं गुजरता है और न ही कोई पक्षी इस मंदिर के ऊपर बैठता है और न ही इसके ऊपर से उड़ता है।

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वहीं मंदिर (Jagannath Temple) की रसोई भी बड़ी ही चमत्कारी है। यहां भक्तों के लिए जब प्रसाद पकाया जाता है तो वो सात बर्तनों में पकाया जाता है और इन बर्तनों को एक के ऊपर एक रखा जाता है। इसमें सबसे हैरान कर देने वाली बात ये है कि इन सातों बर्तनों में से सबसे पहले प्रसाद सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकता है, उसके बाद दूसरे बर्तन का पकता है फिर तीसरे और ऐसा करते करते सातों बर्तनों का प्रसाद पक जाता है।

इस मंदिर (Jagannath Temple) का एक और चमत्कार भी है और वो ये है कि यहां भक्तों के बीच कभी प्रसाद कम नहीं पड़ता है। मंदिर (Jagannath Temple) में कितने भी श्रद्धालू आ जाए लेकिन प्रसाद आजतक कभी कम नहीं पड़ा है लेकिन जैसे ही मंदिर के द्वार बंद हो जाते हैं वैसे ही प्रसाद भी खत्म हो जाता है।

आपको बता दें कि ये रहस्यमयी मंदिर हजारों साल पुराना है जिसे राजा नरेश इंद्रद्युम्न द्वारा बनवाया गया था। पुराणों में इसका जिक्र है कि भगवान श्री कृष्ण, राजा के सपने में आए थे और उन्होंने राजा से कहा कि उनके नदी में समा जाने के बाद उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा ने विलाप करते करते अपने भी प्राण त्याग दिए और उनके शवों की अस्थियां उसी नदी में पड़ी है, जिसके बाद श्री कृष्ण ने राजा को आदेश दिया कि वह नदी से उनकी अस्थियां बंटोरे और उससे उनकी मूर्तियां बनवाए।

श्री कृष्ण के आदेश के बाद राजा ने नदी से बलराम और सुभद्रा की अस्थियां बंटोरी और मूर्तियों के निर्माण में इन अस्थियों को भी शामिल कर दिया। इस प्रकार मंदिर (Jagannath Temple) का निर्माण हुआ, जहां आज लाखों की संख्या में भक्त आते हैं और भगवान का आशिर्वाद पाते हैं।

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