इस मंदिर में विदेशी भक्तों के लिए शुरु की गई पोस्ट ऑफिस की सुविधा

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Raj Rajeshwari Mandir: यहां माता मंदिर में नहीं बल्की भवन में विराजमान हैं

Raj Rajeshwari Mandir: चीड़ और बाज़ के पेड़ों से घिरा वो रहस्यमई मंदिर जहां माता किसी मंदिर में नहीं बल्कि एक घर में विराजमान है। इस मंदिर (Raj Rajeshwari Mandir) की इतनी मान्यता है कि यहां के विदेशी भक्तों के लिए पोस्ट ऑफिस की सुविधा भी शुरू की गई है।

यह मंदिर (Raj Rajeshwari Mandir) श्रीनगर से 18 किलोमीटर की दूरी पर बसे देवलगढ़ गांव में स्थित है जहां राजराजेश्वरी माता गौरा देवी के रूप में विराजमान है। इस मंदिर में जो भी भक्त धन, वैभव और सुख समृद्धि की मनोकामना लेकर आता हैं मां राजराजेश्वरी उनकी मनोकामना जरूर पूरी करती हैं। इस मंदिर (Raj Rajeshwari Mandir) को लेकर ऐसी मान्यता है कि गौरा देवी माता ने लोक कल्याण के लिए यहां पर तप किया था।

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राजराजेश्वरी माता गढ़वाल के राजा की कुलदेवी भी मानी जाती हैं, यह मंदिर पहले चांदपुरगढ़ी में स्थित था।  इसके बाद 1512 में गढ़वाल के राजा अजय पाल द्वारा इस मंदिर (Raj Rajeshwari Mandir) को देवलगढ़ में स्थानांत्रित कर दिया गया। दरअसल पहले गढ़वाल की राजधानी चांदपुरगढ़ी हुआ करती थी लेकिन बाद में राजा द्वारा देवलगढ़ को गढ़वाल की राजधानी बना दिया गया, जिसके बाद राजा ने अपनी कुलदेवी राजराजेश्वर माता को पूरे विधी विधान के साथ देवलगढ़ में स्थापित कर दिया और साथ ही राजा अजयपाल ने यंत्र के साथ साथ महिषमर्दिंनी यंत्र और कामेश्वरी यंत्र को भी यहां स्थापित किया।  

राजराजेश्वरी मंदिर (Raj Rajeshwari Mandir) की एक खासीयत यह है कि यहां माता अपने मंदिर में नहीं रहतीं बल्की एक भवन में रहती हैं, इसी भवन में माता की मूर्ती और यंत्र भी रखे गए हैं। वहीं इस मंदिर की इतनी मान्यता है कि इसके भक्त विदेश में भी हैं।

इन्हीं विदेशी भक्तों की मांग पर मंदिर (Raj Rajeshwari Mandir) से हवन- यज्ञ की भभूत को पोस्ट ऑफिस के जरिए इन भक्तों तक भेजा जाता है। मंदिर (Raj Rajeshwari Mandir) के ये भक्त ज्यादातर ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, लंदन, सऊदी अरब से तालुक रखते हैं और जब भी ये भक्त भारत आते हैं तो ये माता के दर्शन करने मंदिर में ज़रूर आते हैं।

राजराजेश्वरी माता के मंदिर (Raj Rajeshwari Mandir) में हर साल अप्रैल के महीने में मेला लगता है जहां हज़ारों की तादाद में लोग माता के दर्शन करने आते हैं और माता का आशिर्वाद लेते हैं।

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