INDIAN NAVY DSC A20 COMMISSION: भारतीय नौसेना ने स्वदेशी जहाज निर्माण के क्षेत्र में आज एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कोच्चि स्थित नौसेना बेस में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान ‘डीएससी ए20’ (DSC A20) को औपचारिक रूप से कमीशन किया गया। यह पांच डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (डीएससी) की श्रृंखला में पहला जहाज है, जिसे पूरी तरह से भारत में ही बनाया गया है। इस जहाज का निर्माण कोलकाता की कंपनी मेसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम लिमिटेड ने किया है। यह जहाज नौसेना की पानी के भीतर की क्षमताओं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

INDIAN NAVY DSC A20 COMMISSION: समारोह में शीर्ष नौसेना अधिकारी रहे मौजूद
इस कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने की। कार्यक्रम की मेजबानी युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण नियंत्रक वाइस एडमिरल संजय साधु द्वारा की गई। इस अवसर पर भारतीय नौसेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ मेसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम लिमिटेड, कोलकाता के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे। सभी ने इस स्वदेशी प्रयास की सराहना की और इसे नौसेना के लिए एक गर्व का क्षण बताया।

2021 में हुआ था पांच जहाजों का समझौता
रक्षा मंत्रालय और मेसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम लिमिटेड के बीच पांच डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट के निर्माण के लिए अनुबंध 12 फरवरी 2021 को हस्ताक्षर किया गया था। यह जहाज उसी समझौते का पहला परिणाम है। डिजाइन चरण के दौरान जहाज का हाइड्रोडायनामिक विश्लेषण और मॉडल परीक्षण विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (NSTL) में किया गया था, ताकि इसकी गुणवत्ता और क्षमता सुनिश्चित की जा सके।डीएससी ए20 को इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह एक कैटामरन-हल (दो समानांतर हल वाला) जहाज है, जिसका विस्थापन लगभग 390 टन है।

जहाज को अत्याधुनिक डाइविंग उपकरणों से लैस किया गया है। अपनी विशिष्ट बनावट और उपकरणों के कारण यह पोत तटीय जल में पानी के भीतर मरम्मत, निरीक्षण, बंदरगाह निकासी और महत्वपूर्ण डाइविंग मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण का समर्थन करती है। भारतीय नौसेना में इस तरह के विशेष प्लेटफॉर्म का स्वदेशी निर्माण बढ़ती घरेलू क्षमताओं और आत्मनिर्भरता का प्रमाण है। इससे रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम होगी और भारतीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

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