/ Feb 01, 2026

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भारत की रामसर साइट्स की सूची में 2 नए वेटलैंड्स शामिल, जानिए ये क्या हैं और पर्यावरण संरक्षण में क्यों हैं जरूरी?

INDIA RAMSAR SITES 2026: विश्व आर्द्रभूमि दिवस (वर्ल्ड वेटलैंड्स डे) 2026 से ठीक पहले भारत ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने देश के रामसर नेटवर्क में दो नए आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) को शामिल करने की घोषणा की है। इस नई सूची में उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ जिले में स्थित छारी-धंड को अंतरराष्ट्रीय महत्व की साइट्स के रूप में मान्यता दी गई है। इस समावेश के साथ ही भारत में रामसर साइट्स की कुल संख्या अब बढ़कर 98 हो गई है।

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INDIA RAMSAR SITES में 276 प्रतिशत की वृद्धि

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले एक दशक में पर्यावरण और जल निकायों के संरक्षण में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने आंकड़ों के हवाले से बताया कि साल 2014 में भारत में केवल 26 रामसर साइट्स थीं, जिनमें अब 276 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली मान्यता इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी प्राकृतिक संपदा और आर्द्रभूमियों के वैज्ञानिक प्रबंधन और सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठा रहा है।

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पक्षियों और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास

घोषित किए गए दोनों नए वेटलैंड्स पारिस्थितिक रूप से अत्यंत समृद्ध हैं। उत्तर प्रदेश का पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात का छारी-धंड क्षेत्र सैकड़ों प्रवासी और निवासी पक्षी प्रजातियों का बसेरा है। इन क्षेत्रों में न केवल दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं, बल्कि ये चिंकारा, भेड़िए, काराकल (सियाहगोश), डेजर्ट कैट और डेजर्ट फॉक्स जैसे वन्यजीवों के लिए भी महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, इन आर्द्रभूमियों में कई लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं, जिनका संरक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जाना आवश्यक है।

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रामसर कन्वेंशन और भारत की ऐतिहासिक भागीदारी

भारत 1971 में ईरान के रामसर में हस्ताक्षरित ‘कन्वेंशन ऑन वेटलैंड्स’ का एक प्रमुख अनुबंधित पक्ष है, जिसे रामसर कन्वेंशन के नाम से जाना जाता है। भारत ने आधिकारिक तौर पर 1 फरवरी 1982 को इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस कन्वेंशन का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में आर्द्रभूमियों का संरक्षण करना और उनके संसाधनों के बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है। विशेष संरक्षण मूल्य रखने वाले वेटलैंड्स को ही ‘अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि’ के रूप में नामित किया जाता है।

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रामसर साइट्स किसे कहते हैं?

जल में रहने वाले पशु-पक्षियों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता किया गया है, जिसे रामसर कन्वेंशन कहा जाता है। यह एक ऐसी संधि है, जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों का संरक्षण करना और उनका सही व संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना है। मई 2018 तक अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची में 2,331 रामसर स्थल शामिल किए गए थे। ये सभी स्थल मिलकर लगभग 2.1 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं। सबसे अधिक रामसर स्थल यूनाइटेड किंगडम में हैं, जबकि मेक्सिको दूसरे स्थान पर है। क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा रामसर क्षेत्र बोलीविया में है।

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आर्द्रभूमि क्या होती है

जिस भूमि में लंबे समय तक पानी भरा रहता है, उसे आर्द्रभूमि कहा जाता है। रामसर अभिसमय के अनुसार, वह क्षेत्र जहाँ साल में कम से कम आठ महीने पानी रहता है, आर्द्रभूमि माना जाता है। दुनिया भर में वर्तमान में 1929 से अधिक आर्द्रभूमियाँ दर्ज हैं। अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में स्थित एवरग्लैड्स दुनिया की सबसे बड़ी आर्द्रभूमि मानी जाती है। हर साल 2 फरवरी को पूरी दुनिया में विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि आर्द्रभूमियाँ पर्यावरण के लिए कितनी जरूरी हैं।

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