HARIDWAR KUMBH 2027: उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार आस्था, परंपरा और सनातन संस्कृति के विराट संगम की तैयारी में रंगी नजर आ रही है। पूरे क्षेत्र में अगले साल आयोजित होने वाले अर्ध कुंभ मेले को लेकर उत्साह का माहौल बना हुआ है। इसी कड़ी में मेला प्रशासन ने स्नान तिथियों की आधिकारिक घोषणा कर दी है, जिसके बाद से श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई है।
HARIDWAR KUMBH 2027 है चार महीने तक चलने वाला महापर्व
हरिद्वार अर्ध कुंभ मेला 2027 का शुभारंभ 14 जनवरी को मकर संक्रांति के पावन दिन से होगा, जबकि इसका समापन 20 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर किया जाएगा। लगभग चार महीने तक चलने वाले इस भव्य आयोजन के लिए उत्तराखंड सरकार और मेला प्रशासन ने कुल 10 प्रमुख स्नान पर्व निर्धारित किए हैं, जिनमें चार विशेष अमृत स्नान यानी शाही स्नान भी शामिल रहेंगे। इन पवित्र तिथियों पर देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाने और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने पहुंचेंगे।
HARIDWAR KUMBH 2027 स्नान पर्वों की पूरी लिस्ट
- 14 जनवरी 2027 : मकर संक्रांति
- 06 फरवरी 2027 : मौनी अमावस्या
- 11 फरवरी 2027 : बसंत पंचमी
- 20 फरवरी 2027 : माघ पूर्णिमा
- 06 मार्च 2027 : महाशिवरात्रि (अमृत स्नान)
- 08 मार्च 2027 : फाल्गुन अमावस्या(अमृत स्नान)
- 07 अप्रैल 2027 : नव संवत्सर (नव वर्ष)
- 14 अप्रैल 2027 : मेष संक्रांति (प्रमुख अमृत स्नान)
- 15 अप्रैल 2027 : श्रीराम नवमी
- 20 अप्रैल 2027: चैत्र पूर्णिमा

कुंभ मेले का महत्व क्यों है?
कुंभ मेला हिंदू धर्म का सबसे विशाल और पवित्र धार्मिक आयोजन माना जाता है। इसकी उत्पत्ति पौराणिक कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है, जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत कलश को लेकर संघर्ष हुआ था। मान्यता के अनुसार, इस संघर्ष के दौरान अमृत की बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक पर गिरी थीं। इन्हीं पवित्र स्थलों पर समय-समय पर कुंभ और अर्धकुंभ मेलों का आयोजन परंपरा के अनुसार होता रहा है।
HARIDWAR KUMBH 2027: पहली बार अर्ध कुंभ में अमृत स्नान
इस बार का अर्ध कुंभ कई मायनों में विशेष है। पहली बार सरकार अर्ध कुंभ में अमृत स्नान कराने जा रही है, जो अब तक केवल पूर्ण कुंभ में ही होता था। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के कारण कुंभ का आयोजन बेहद सीमित अवधि में करना पड़ा था, इसलिए इस बार के अर्ध कुंभ को अत्यंत भव्य और दिव्य स्वरूप देने की योजना बनाई जा रही है। हरिद्वार और ऋषिकेश में अवस्थापना संबंधी कार्य तेजी से गतिमान हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतरीन सुविधाएं मिल सकें।
संत समाज में असमंजस, दो दिन में दो अमृत स्नान
हालांकि HARIDWAR KUMBH 2027 की तिथि संरचना को लेकर संत समाज में थोड़ी उलझन भी है। महाशिवरात्रि यानी 6 मार्च 2027 को प्रथम अमृत स्नान होना है और उसके ठीक दो दिन बाद 8 मार्च को सोमवती अमावस्या पर द्वितीय अमृत स्नान निर्धारित है। परंपरा के अनुसार अर्ध कुंभ और कुंभ का आरंभ महाशिवरात्रि से माना जाता है, जिसमें सभी अखाड़ों के साधु-संत भव्य पेशवाई के साथ गंगा स्नान करते हैं।

इस पेशवाई की तैयारी के लिए पर्याप्त समय अपेक्षित होता है, लेकिन अगले ही दिन दूसरा अमृत स्नान निर्धारित होने से अखाड़ों को पुनः वैसी ही तैयारी के लिए समय नहीं मिल पाएगा। संत समाज इस मुद्दे पर मंथन कर रहा है और माना जा रहा है कि अखाड़ा परिषद और मेला प्रशासन के बीच आगामी समन्वय बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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HARIDWAR KUMBH 2027 के लिए बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर
HARIDWAR KUMBH 2027 के लिए सरकार द्वारा शिलान्यास की गई परियोजनाओं में सबसे बड़ा हिस्सा सड़क और परिवहन अवसंरचना का है। कुल 34 कार्यों को चार प्रमुख सेक्टरों में बांटा गया है:
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सड़क एवं परिवहन: 127.23 करोड़ की लागत से 12 कार्य किए जाएंगे, ताकि भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन सुचारू रहे।
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घाट निर्माण एवं सिंचाई: 70.54 करोड़ रुपये से 7 घाटों और सिंचाई अवसंरचनाओं का सुदृढ़ीकरण होगा।
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श्रद्धालु सुविधाएं: 18.67 करोड़ की लागत से 6 परियोजनाओं के जरिए यात्रियों के लिए सहायक अवसंरचनाएं तैयार होंगी।
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पेयजल आपूर्ति: 18.11 करोड़ रुपये से 9 योजनाओं के तहत जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
‘अक्टूबर तक पूरे हों सभी कार्य’: मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि कुंभ से जुड़े सभी प्रमुख स्थायी कार्यों को आगामी अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाए। कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ की व्यवस्था भी की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं स्वयं इन कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहा हूँ। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें ताकि देवभूमि आने वाले श्रद्धालु माँ गंगा का दिव्य अनुभव लेकर जाएं।”
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