Dr. HS Baveja : प्रोफेसर से उद्यान निदेशक बने बावेजा के HP के बाद UK में बड़े ‘खेल’, बचाने में जुटी ‘सरकार’?

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Uttarakhand News- Dehradun Bureau : हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के बाद उत्तराखंड में सांठ-गांठ कर तैनात उद्यान निदेशक डॉ एच एस बवेजा (Dr. HS Baveja) की अब उत्तराखंड में भी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उन पर अपने अभी तक के कार्यकाल में कई आयोजनों में लिमिट से अधिक खर्च करने, अदरक और हल्दी बीज खरीद में खेल करने, तमाम पौधों की खरीद के मामलों के साथ ही उद्यान निदेशालय को देहरादून से ही संचालित करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

आमरण अनशन पर बैठे दीपक ने लगाए कई गंभीर आरोप

Dr. HS Baveja के कारनामों को लेकर रानीखेत निवासी सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता दीपक करगेती देहरादून के गांधी पार्क के बाहर पांच दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका कहना है कि उद्यान निदेशक Dr. HS Baveja के खिलाफ साक्ष्य देने के बाद भी सीएम से लेकर विजिलेंस और कोई भी जिम्मेदार उनकी जांच नहीं कर रहा है। इसके अलावा उन्होंने उद्यान निदेशक Dr. HS Baveja की ओर से उन्हें नशे में होने और पागल करार देने के साथ एक महिला कर्मी की ओर थाने में झूठे केस में भी फंसाया गया है।

उन्होंने बताया कि अगर मैं नशे में था तो उनकी मेडिकल जांच क्यों नहीं की गई। वह थाने में भी गए लेकिन, उन्हें देर शाम तक इंतजार करवाने के बाद कोई जांच करवाए बगैर ही वापस भेज दिया गया। अब वह पांच दिन से गांधी पार्क में आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जांच शुरू न होने तक वह यहीं पर देह त्याग देंगे।

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Dr. HS Baveja

Dr. HS Baveja का विवादों से पुराना नाता!

हिमाचल प्रदेश के बाद कई मामलों में उत्तराखंड में भी विवादों में घिरे रहे डाॅ. एचएस बबेजा (Dr. HS Baveja) के खिलाफ उद्यान मंत्री और प्रदेश सरकार कोई कार्रवाई करने की बजाय मामले को उन पर ही भरोसा जताया रही है। उत्तराखंड में डाॅ. एचएस बवेजा (Dr. HS Baveja) पर कई महोत्सव के आयोजन में लिमिट से अधिक खर्च करने के आरोप भी लगे हैं। इसके अलावा उद्यान निदेशालय रानीखेत में होने के बाद भी देहरादून से ही इसे संचालित करने के भी आरोप लग रहे हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता और अल्मोड़ा से निर्दलीय चुनाव लड़ चुके दीपक करगेती पहले रानीखेत और अब देहरादून के गांधी पार्क में 5 दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं।

Dr. HS Baveja

उनका आरोप है कि उत्तराखंड सीएम के साथ विजिलेंस, उद्यान विभाग मंत्री के साथ ही तमाम जिम्मेदार एजेंसियों को वह निदेशक के खिलाफ पुख्ता सबूत शपथ पत्र के साथ दे चुके हैं। फिर भी कोई कार्रवाई तो दूर जांच की शुरूआत भी नहीं हो रही है। उनके खिलाफ पहले भी कुछ लोगों ने बीज घोटालों के साथ ही 6 अंतरराष्ट्रीय आयोजनों 7.50 लाख की लिमिट के बाद भी 6000000-7000000 से अधिक खर्च करने के आरोप हैं।

हिमाचल प्रदेश के नौणी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर से ऐसे बने निदेशक 

दरअसल, डाॅ. एचएस बवेजा (Dr. HS Baveja)  इससे पहले हिमाचल प्रदेश के नौणी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर तैनात थे। कांग्रेस की सरकार में उन्हें एक के बाद एक प्रमोशन और जिम्मेदारियां देते देते हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग का निदेशक तक बना दिया गया था। भाजपा ने चुनाव से पहले वीरभद्र सरकार के चेहते डॉक्टर एचएस बवेजा का नाम अपनी चार्जशीट में शामिल करने के साथ ही उन पर लगे तमाम भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद डाॅ. एचएस बवेजा ने पड़ोसी राज्य में गुपचुप तरीके से अपनी तैनाती फिर से निदेशक उद्यान के पद करवा ली।

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हिमाचल प्रदेश में नौणी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर तैनात रहे बवेजा (Dr. HS Baveja) पर बागवानी विभाग निदेशक रहते वक्त स्टोर की सब्सिडी जारी करने के मामले में घूस लेने के आरोप लगे थे। बागवानी विभाग के पास शिकायत मिलने के बाद हिमाचल प्रदेश के गृह विभाग ने इस मामले में जांच शुरू तो की थी लेकिन सरकार बनने के बाद फिर से दबा दिया गया। 2013 में कांग्रेस की सरकार में उन्हें डेपुटेशन पर एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड का एमडी बनाया गया था। उसके बाद लगातार प्रमोशन करते करते हिमाचल प्रदेश के बागवानी विभाग का निदेशक भी बना दिया गया था। इस दौरान उन पर तमाम मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।

हिमाचल प्रदेश में खुद को घिरते देख एचएस बवेजा पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में सांठगांठ कर निदेशक के पद पर तैनात हो गए। अब उत्तराखंड में भी उन पर हल्दी बीज घोटाला, अदरक बीज घोटाला, कीवी पौध के साथ ही अन्य पौधों की खरीद-फरोख्त में भी तमाम तरह के गबन और खेल के आरोप लगे।

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वहीं, दूसरी ओर वर्तमान में उत्तराखंड उद्यान विभाग के निदेशक डाॅ. एचएस बवेजा ने कुछ दिन पहले उद्यान मंत्री को लिखित में शपथ पत्र देकर कहा कि उनको बेवजह बदनाम किया जा रहा है। जिस तरह के आरोप लग रहे हैं, वह बिल्कुल बेबुनियाद हैं। अब देखना होगा कि दीपक करगेती की शिकायत की निष्पक्ष जांच करती है या फिर इस आमरण अनशन को भी अनदेखा कर डाॅ. एचएस बवेजा (Dr. HS Baveja) को और खेल करने की खुली छूट फिर से देती है।

बता दें कि उत्तराखंड के उद्यान निदेशक डॉ हरमिंदर सिंह बवेजा (Dr. HS Baveja) ने कुछ दिन पहले विभागीय मंत्री के सामने अपना पक्ष रखा। बवेजा ने कहा कि बीज की खरीद भारत सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक नेशनल सीड कारपोरेशन से की थी। खरीद में कुछ भी गलत नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि बीज की खरीद विभागाध्यक्ष को प्राप्त अधिकारों के अनुसार की गई थी। इसके साथ ही उन्होंने इस प्रकरण के लिए अपर निदेशक को जिम्मेदार बताते हुए उन पर विभाग की छवि खराब करने का आरोप भी लगाया।

जबकि इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता दीपक करगेती ने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक डाॅ. एचएस बवेजा पर देहरादून में प्रेस कांफ्रेंस कर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया था कि उद्यान निदेशक की शिकायत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उद्यान मंत्री, पुलिस अधीक्षक विजिलेंस, मुख्य सचिव और सचिव उद्यान विभाग से की थी। अभी तक कोई कार्रवाई मामले में नहीं हुई है। अब पांच दिन से वह गांधी पार्क के बाहर इस मामले की जांच को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं।

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Dr. HS Baveja ने इन आयोजनों में किया लिमिट से ज्यादा खर्च

  • मुनिकीरेती टिहरी में 16 से 18 नवंबर 2021 तक अंतरराष्ट्रीय मसाला व सब्जी महोत्सव में पीएमकेएसवाई के नाम पर 65 व पीएमएसएमई में 2.50 यानि कुल 67.50 लाख व्यय।
  • हल्द्वानी (नैनीताल) में 18 से 20 दिसंबर 2021 तक चले अंतरराष्ट्रीय मौनपालन महोत्सव में बागवानी मिशन, पीएमकेएसवाइ व पीएमएसएमई पर 50 लाख रुपये खर्च
  • हरिद्वार में 18 से 20 अक्टूबर 2021 तक अंतरराष्ट्रीय मशरूम महोत्सव में बागवानी मिशन में पांच, पीएमकेएसवाई में 50 व पीएमएसएमई में 10.50 समेत कुल 65.50 लाख रुपये का व्यय दिखाया गया है।
  • 24 से 26 सितंबर 2021 तक देहरादून में अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव कराया गया था। इसमें बागवानी मिशन में 60 लाख, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) में 15 व पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएसएमई) में 2.50 समेत कुल 77.50 लाख रुपये खर्च।

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