Cumulative vs Non-Cumulative FD का सवाल तब सामने आता है जब आप बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट खुलवाने बैठते हैं और फॉर्म पर ब्याज भुगतान का विकल्प चुनना होता है। ज्यादातर लोग बिना सोचे कोई भी विकल्प चुन लेते हैं, जबकि इसी एक फैसले से आपकी कुल कमाई और हाथ में आने वाले पैसे का तरीका बदल जाता है।
Cumulative vs Non-Cumulative FD: मूल अंतर क्या है?
क्यूमुलेटिव एफडी में आपको बीच में कोई ब्याज नहीं मिलता। बैंक हर तिमाही ब्याज जोड़ता जाता है और उस ब्याज पर भी अगली बार ब्याज मिलता है, यानी चक्रवृद्धि का फायदा। पूरा पैसा मैच्योरिटी पर एक साथ मिलता है। नॉन-क्यूमुलेटिव एफडी में ब्याज तय अंतराल पर आपके खाते में आता रहता है। आप मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना भुगतान चुन सकते हैं, और मैच्योरिटी पर सिर्फ मूल रकम वापस मिलती है।
उदाहरण से समझें फर्क
मान लीजिए आपने 1 लाख रुपये 5 साल के लिए 7 प्रतिशत सालाना ब्याज पर जमा किए। क्यूमुलेटिव विकल्प में तिमाही चक्रवृद्धि के साथ मैच्योरिटी पर करीब 1,41,478 रुपये मिलेंगे, यानी लगभग 41,478 रुपये का ब्याज। वहीं नॉन-क्यूमुलेटिव विकल्प में तिमाही भुगतान चुनने पर हर तिमाही 1,750 रुपये मिलेंगे।
5 साल में कुल ब्याज 35,000 रुपये होगा। यानी इस उदाहरण में क्यूमुलेटिव विकल्प से करीब 6,478 रुपये ज्यादा बनते हैं। यह फर्क सिर्फ इसलिए है क्योंकि नॉन-क्यूमुलेटिव में ब्याज बाहर निकल जाता है और उस पर आगे ब्याज नहीं मिलता। अवधि जितनी लंबी होगी, यह अंतर उतना बढ़ता जाएगा।
मासिक भुगतान पर थोड़ा कम ब्याज क्यों?
ज्यादातर बैंक मासिक ब्याज भुगतान वाले विकल्प में दर को थोड़ा घटाकर देते हैं, जिसे डिस्काउंटेड रेट कहा जाता है। वजह यह है कि बैंक आपको तिमाही से पहले ही पैसा दे रहा होता है। इसलिए अगर आपको हर महीने पैसे की सख्त जरूरत नहीं है, तो तिमाही भुगतान आमतौर पर थोड़ा बेहतर सौदा रहता है।
Cumulative vs Non-Cumulative FD: टैक्स और टीडीएस के नियम
एक आम भ्रम यह है कि क्यूमुलेटिव एफडी पर टैक्स सिर्फ मैच्योरिटी पर लगता है। असल में दोनों तरह की एफडी में हर साल बनने वाला ब्याज उसी साल की आय मानी जाती है और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। बैंक एक वित्त वर्ष में आम ग्राहकों के लिए 50,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा ब्याज होने पर 10 प्रतिशत टीडीएस काटता है।
पैन नहीं देने पर यह दर 20 प्रतिशत हो जाती है। अगर आपकी कुल आय टैक्स के दायरे से कम है, तो बैंक में तय घोषणा फॉर्म जमा करके टीडीएस कटने से बचा जा सकता है। क्यूमुलेटिव एफडी में ब्याज हाथ में न आने के बावजूद टीडीएस कटता है, इसलिए इसे अपने टैक्स रिटर्न में जरूर दिखाएं।
किसके लिए कौन सा विकल्प सही?
क्यूमुलेटिव एफडी उन लोगों के लिए बेहतर है जिन्हें अभी नियमित आय की जरूरत नहीं है और जो बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर जैसे किसी बड़े लक्ष्य के लिए पैसा बढ़ाना चाहते हैं। नौकरीपेशा युवा और लंबी अवधि के निवेशक इसी को चुनते हैं।

नॉन-क्यूमुलेटिव एफडी रिटायर हो चुके लोगों, वरिष्ठ नागरिकों और उन परिवारों के लिए सही है जिन्हें घर खर्च या किराए के लिए हर महीने या तिमाही तय रकम चाहिए। यह पेंशन जैसा सहारा बन जाती है। आप चाहें तो रकम बांटकर दोनों विकल्प एक साथ भी ले सकते हैं। अंत में Cumulative vs Non-Cumulative FD का सही चुनाव इस बात पर टिका है कि आपको पैसा बढ़ाना है या नियमित आय चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Cumulative vs Non-Cumulative FD में ब्याज दर अलग होती है क्या?
Cumulative vs Non-Cumulative FD में मूल ब्याज दर आमतौर पर एक ही होती है, लेकिन चक्रवृद्धि की वजह से क्यूमुलेटिव में कुल कमाई ज्यादा होती है। मासिक भुगतान वाले विकल्प में दर थोड़ी कम मिल सकती है।
2. क्या एफडी खुलवाने के बाद विकल्प बदला जा सकता है?
आमतौर पर नहीं। विकल्प बदलने के लिए एफडी तोड़कर नई खुलवानी पड़ती है, जिस पर समय से पहले निकासी का जुर्माना लग सकता है।
3. क्या Cumulative vs Non-Cumulative FD तरह की एफडी पर लोन मिलता है?
हां, ज्यादातर बैंक Cumulative vs Non-Cumulative FD पर जमा रकम के एक बड़े हिस्से तक लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा देते हैं।
4. बैंक डूबने पर एफडी का कितना पैसा सुरक्षित रहता है?
हर बैंक में एक जमाकर्ता का मूलधन और ब्याज मिलाकर 5 लाख रुपये तक बीमित रहता है। इसकी पूरी जानकारी डीआईसीजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
5. वरिष्ठ नागरिकों के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है?
अगर पेंशन के अलावा नियमित आय चाहिए तो नॉन-क्यूमुलेटिव, और अगर पैसा आगे के लिए बचाना है तो क्यूमुलेटिव बेहतर है। कई बैंक उन्हें अतिरिक्त ब्याज भी देते हैं।
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हर महीने थोड़ी बचत करने वालों के लिए पोस्ट ऑफिस आरडी और बैंक आरडी की तुलना भी काम आएगी।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। निवेश से पहले अपने बैंक या वित्तीय सलाहकार से पुष्टि जरूर करें।

