Super El Niño Explained: प्रशांत महासागर में बढ़ते तापमान ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। इस बार बेहद शक्तिशाली El Niño की आशंका जताई जा रही है। एक नए आकलन में गर्मी से होने वाली सैकड़ों हजार अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है।
दुनिया इस समय एक बेहद शक्तिशाली El Niño की ओर बढ़ रही है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा है और यह El Niño आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है। WMO का अनुमान है कि इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना करीब 100 फीसदी है। वहीं अमेरिकी NOAA के सितंबर 2026 के आकलन में 2026-27 की सर्दियों में बहुत मजबूत El Niño की संभावना 90 फीसदी से ज्यादा बताई गई है।
सबसे पहले समझिए क्या है El Niño
El Niño एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है। इससे हवा के दबाव, समुद्री धाराओं और वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव आता है।
इसका असर केवल प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, सूखा, तापमान, तूफान और जंगलों में आग जैसी स्थितियों की संभावना बदल सकती है। हालांकि हर El Niño का असर हर देश में एक जैसा नहीं होता।
तो फिर Super El Niño क्या है?
“Super El Niño” कोई आधिकारिक वैज्ञानिक श्रेणी नहीं है। WMO खुद इस शब्द का इस्तेमाल अपने परिचालन वर्गीकरण में नहीं करता। आमतौर पर जब El Niño असाधारण रूप से मजबूत हो और समुद्र का तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो मीडिया और कुछ शोधकर्ता उसे “Super El Niño” कहते हैं।
इस बार चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि NOAA के मुताबिक Niño-3.4 क्षेत्र में तापमान असामान्यता अगस्त 2026 में करीब +1.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गई थी। पूर्वी प्रशांत के कुछ हिस्सों में असामान्यता इससे भी अधिक दर्ज की गई। NOAA ने अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान ऐतिहासिक रूप से मजबूत घटना की संभावना भी जताई है।
क्या 2027 तक लाखों लोगों की मौत होगी?
यहां आंकड़े को सही संदर्भ में समझना जरूरी है। University of Chicago से जुड़े Climate Impact Lab के एक नए आकलन में जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच सामान्य परिस्थितियों की तुलना में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतों का अनुमान लगाया गया है। यह दर्ज मौतों की संख्या नहीं, बल्कि मॉडल आधारित पूर्वानुमान है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के छह महीनों में ही लगभग 2.39 लाख अतिरिक्त heat-related deaths का अनुमान है। शोधकर्ताओं का कहना है कि El Niño का प्रभाव 2027 के मध्य तक बना रहा तो यह संख्या और बढ़ सकती है।
भारत के लिए भी बड़ा खतरा
Climate Impact Lab के अनुमान के अनुसार सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में करीब 15,800 अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतें हो सकती हैं, जिसमें लगभग 1,600 का अनिश्चितता दायरा है। दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान ही करीब 7,400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है।
हालांकि विशेषज्ञों ने इन आंकड़ों की व्याख्या में सावधानी बरतने को कहा है। भारत में गर्मी से होने वाली मौतों का बड़ा जोखिम आमतौर पर गर्मियों में होता है और El Niño के प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकते हैं। इसलिए यह आंकड़ा निश्चित मृत्यु संख्या के बजाय जोखिम का मॉडल आधारित अनुमान है।
गर्मी के अलावा और क्या असर होगा?
Super El Niño जैसी बेहद मजबूत घटना का असर केवल तापमान तक सीमित नहीं रह सकता। सूखा, भारी बारिश, बाढ़, जंगलों में आग और कृषि उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। WMO ने भी बहुत मजबूत El Niño के साथ दुनिया के कई हिस्सों में वर्षा और तापमान के पैटर्न में बड़े बदलाव की संभावना जताई है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, El Niño के कारण 2027 के अंत तक 27.4 करोड़ लोग 45 देशों में acute food insecurity का सामना कर सकते हैं, जो मौजूदा अनुमान से करीब 4.9 करोड़ अधिक है।
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क्या हर जगह तबाही तय है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा। WMO स्पष्ट करता है कि El Niño की ताकत और किसी खास क्षेत्र में उसके प्रभाव की तीव्रता के बीच सीधा संबंध नहीं होता। दूसरे समुद्री और वायुमंडलीय कारक भी मौसम को प्रभावित करते हैं। इसलिए पूर्वानुमान को संभावित जोखिम के तौर पर देखना चाहिए, निश्चित परिणाम के तौर पर नहीं।
फिलहाल वैज्ञानिकों का जोर तैयारी पर है—हीट अलर्ट, अस्पतालों की तैयारी, कूलिंग सेंटर, पर्याप्त पानी, खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और कमजोर आबादी तक समय पर मदद पहुंचाना। Climate Impact Lab का कहना है कि समय रहते ऐसे कदम उठाकर संभावित मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

