CTC and In-Hand Salary में फर्क इसलिए होता है, क्योंकि CTC यानी कॉस्ट टू कंपनी वह कुल रकम है जो कंपनी आप पर साल भर में खर्च करती है, जबकि इन हैंड सैलरी वह पैसा है जो हर महीने असल में आपके बैंक खाते में आता है। इन दोनों के बीच PF, ग्रेच्युटी, टैक्स और कई दूसरी कटौतियां छिपी होती हैं।
नौकरी का ऑफर लेटर मिलते ही 10 लाख रुपये का पैकेज सुनकर ज्यादातर लोग मान लेते हैं कि हर महीने करीब 83 हजार रुपये मिलेंगे। लेकिन पहली सैलरी आते ही यह खुशी हैरानी में बदल जाती है।
ऐसा क्यों होता है और ऑफर लेटर पढ़ते समय किन बातों पर ध्यान दें? आइए आसान भाषा में CTC and In-Hand Salary का पूरा हिसाब समझते हैं।
CTC में क्या क्या शामिल होता है?
CTC में आपकी बेसिक सैलरी, HRA, स्पेशल अलाउंस और दूसरे भत्ते तो होते ही हैं। इसके अलावा कंपनी आपके PF खाते में जो अपना हिस्सा डालती है, वह भी CTC का हिस्सा होता है।
ग्रेच्युटी के लिए कंपनी हर साल जो रकम अलग रखती है, वह भी इसमें जुड़ी होती है। यह पैसा आपको तभी मिलता है, जब आप किसी कंपनी में तय समय तक काम कर लें।
कई कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम, परफॉर्मेंस बोनस, मील कार्ड और जॉइनिंग बोनस भी CTC में जोड़ देती हैं। इनमें से कई रकम हर महीने हाथ में नहीं आतीं।
ग्रॉस सैलरी क्या होती है?
CTC में से कंपनी का PF योगदान, ग्रेच्युटी और ऐसे दूसरे खर्च घटाने पर ग्रॉस सैलरी बचती है। यह आपकी सैलरी स्लिप में “कमाई” वाले हिस्से का कुल जोड़ होता है।
ग्रॉस सैलरी को आप CTC and In-Hand Salary के बीच का पड़ाव मान सकते हैं। अभी इसमें से कुछ और कटौतियां होनी बाकी हैं।
इन हैंड सैलरी में से क्या कटता है?
सबसे बड़ी कटौती आपके अपने PF योगदान की होती है, जो आमतौर पर बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत होता है। यह पैसा आपका ही है और आपके PF खाते में जमा होता है।
इसके बाद इनकम टैक्स यानी TDS कटता है, जो आपकी कमाई और चुने गए टैक्स सिस्टम पर निर्भर करता है। कुछ राज्यों में प्रोफेशनल टैक्स भी कटता है, जो साल में अधिकतम 2,500 रुपये तक हो सकता है।
कम सैलरी वालों के लिए ESI की छोटी कटौती भी हो सकती है। इन सबके बाद जो बचता है, वही असली CTC and In-Hand Salary का अंतर तय करता है।
नए लेबर कोड से क्या बदला?
नए लेबर कोड लागू होने के बाद नियम है कि बेसिक सैलरी, DA और रिटेनिंग अलाउंस मिलाकर कुल कमाई का कम से कम 50 प्रतिशत होने चाहिए। पहले कई कंपनियां बेसिक को 30 से 40 प्रतिशत तक ही रखती थीं।
बेसिक बढ़ने से PF और ग्रेच्युटी भी बढ़ जाते हैं, क्योंकि ये बेसिक के आधार पर तय होते हैं। इसलिए CTC वही रहने पर भी कई लोगों की इन हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, यानी CTC and In-Hand Salary का अंतर पहले से थोड़ा बढ़ गया है।
अच्छी बात यह है कि बढ़ा हुआ PF आपकी रिटायरमेंट की बचत को मजबूत करता है। यानी हर महीने थोड़ा कम पैसा हाथ में आता है, लेकिन लंबे समय में फायदा होता है।
CTC and In-Hand Salary का उदाहरण
मान लीजिए आपका CTC 10 लाख रुपये सालाना है और बेसिक सैलरी इसका 50 प्रतिशत यानी 5 लाख रुपये है। कंपनी का PF योगदान 12 प्रतिशत के हिसाब से 60,000 रुपये और ग्रेच्युटी करीब 24,050 रुपये होगी।
इन्हें घटाने पर आपकी ग्रॉस सैलरी करीब 9.16 लाख रुपये बचती है। इसमें से आपका अपना PF 60,000 रुपये और प्रोफेशनल टैक्स करीब 2,400 रुपये कटेगा।
नए टैक्स सिस्टम में 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्स वाली कमाई करीब 8.41 लाख रुपये रहती है। 12 लाख रुपये तक की कमाई पर छूट की वजह से इस पर कोई टैक्स नहीं बनता।
इस तरह साल भर में करीब 8.54 लाख रुपये, यानी हर महीने लगभग 71,000 रुपये हाथ में आएंगे। 83 हजार की उम्मीद और 71 हजार की असलियत के बीच का यही फर्क CTC and In-Hand Salary का असली गणित है।
यह एक अनुमान है, असल रकम कंपनी के सैलरी ढांचे, PF के नियम, राज्य और आपके टैक्स विकल्प पर निर्भर करेगी।
टैक्स सिस्टम चुनने का भी पड़ता है असर
1 अप्रैल 2026 से नया टैक्स सिस्टम अपने आप लागू होता है, जब तक आप पुराना सिस्टम न चुनें। नए सिस्टम में टैक्स की दरें कम हैं, लेकिन HRA और 80C जैसी ज्यादातर छूट नहीं मिलतीं।
पुराने सिस्टम में किराया, PF, बीमा और होम लोन जैसी छूट का फायदा लिया जा सकता है। जिनकी छूट ज्यादा हैं, उनके लिए कई बार यही बेहतर रहता है।
साल की शुरुआत में कंपनी को सही टैक्स सिस्टम और निवेश की जानकारी देने से हर महीने का TDS सही कटता है। इससे CTC and In-Hand Salary के फर्क का अंदाजा भी साफ रहता है।
ऑफर लेटर पढ़ते समय ये सवाल जरूर पूछें
सबसे पहले HR से CTC का पूरा ब्रेकअप मांगें और पूछें कि हर महीने अनुमानित इन हैंड सैलरी कितनी होगी। यह भी पूछें कि PF पूरी बेसिक पर कटेगा या किसी तय सीमा तक।
पता करें कि CTC में बोनस या वेरिएबल पे कितना है और वह किस आधार पर मिलेगा। कई बार वेरिएबल पे पूरा नहीं मिलता, इसलिए उसे पक्की कमाई न मानें।
नौकरी बदलते समय दो ऑफर की तुलना हमेशा CTC and In-Hand Salary दोनों के आधार पर करें। कभी कभी कम CTC वाला ऑफर भी हाथ में ज्यादा पैसा देता है।
नौकरी और पैसों से जुड़ी और जानकारी
नई नौकरी में बेहतर पैकेज पाने के लिए सैलरी नेगोशिएशन के आसान तरीके पढ़ें। स्टार्टअप ऑफर में मिलने वाले शेयर समझने के लिए ESOP क्या है देखें। पहली सैलरी से सही प्लानिंग शुरू करने के लिए Financial Planning for Beginners भी जरूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. CTC and In-Hand Salary में आमतौर पर कितना फर्क होता है?
यह कंपनी के सैलरी ढांचे और टैक्स पर निर्भर करता है। ज्यादातर मामलों में इन हैंड सैलरी CTC का करीब 70 से 85 प्रतिशत होती है।
2. क्या PF कटना नुकसान है?
नहीं, PF आपकी अपनी बचत है जिस पर अच्छा ब्याज मिलता है। यह हर महीने हाथ में कम पैसा जरूर लाता है, लेकिन रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनाता है।
3. ग्रेच्युटी कब मिलती है?
आमतौर पर किसी कंपनी में लगातार पांच साल काम पूरा करने पर ग्रेच्युटी मिलती है। नए लेबर कोड में कुछ तय अवधि वाले कर्मचारियों के लिए यह शर्त कम की गई है।
4. नए नियमों का सैलरी पर असर विस्तार से कहां पढ़ें?
नए लेबर कोड और टैक्स नियमों से इन हैंड सैलरी पर पड़ने वाले असर की विस्तृत जानकारी यहां पढ़ सकते हैं।
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