Credit Card Minimum Due वह सबसे छोटी रकम है, जिसे चुकाकर आप लेट फीस से तो बच जाते हैं, लेकिन बाकी बकाया पर भारी ब्याज लगना शुरू हो जाता है। यह आमतौर पर कुल बकाया का सिर्फ 5 प्रतिशत के आसपास होता है, इसलिए पहली नजर में बहुत राहत देने वाला लगता है।
महीने के आखिर में जब क्रेडिट कार्ड का बिल 50,000 रुपये आता है और विकल्प दिखता है कि सिर्फ 2,500 रुपये भरकर काम चल सकता है, तो ज्यादातर लोग यही चुन लेते हैं।
लेकिन यह राहत असल में कर्ज के एक लंबे जाल की शुरुआत होती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह छोटी रकम आपकी जेब पर कितनी भारी पड़ सकती है।
Credit Card Minimum Due क्या होता है?
हर महीने कार्ड के स्टेटमेंट में दो रकम लिखी होती हैं: कुल बकाया यानी टोटल अमाउंट ड्यू और न्यूनतम बकाया यानी मिनिमम अमाउंट ड्यू।
न्यूनतम बकाया में आमतौर पर कुल रकम का एक छोटा हिस्सा, पिछले महीने का ब्याज, फीस और अगर कोई EMI चल रही हो तो उसकी किस्त शामिल होती है। इसे चुकाने पर बैंक आपको डिफॉल्टर नहीं मानता और लेट फीस नहीं लगती।
यानी Credit Card Minimum Due सिर्फ आपका खाता चालू रखने की न्यूनतम शर्त है, कर्ज चुकाने का तरीका नहीं।
असली खतरा कहां छिपा है?
जैसे ही आप पूरा बिल न भरकर सिर्फ Credit Card Minimum Due चुकाते हैं, आपका ब्याज मुक्त समय खत्म हो जाता है। बचे हुए पूरे बकाया पर खरीदारी की तारीख से ब्याज लगने लगता है।
क्रेडिट कार्ड पर ब्याज आमतौर पर हर महीने करीब 3 से 3.75 प्रतिशत होता है, यानी साल का 36 से 45 प्रतिशत तक। यह पर्सनल लोन से भी काफी महंगा है।
इसके ऊपर ब्याज पर 18 प्रतिशत GST भी लगता है। और जब तक पुराना बकाया पूरा नहीं चुकता, नई खरीदारी पर भी अक्सर पहले दिन से ब्याज लगने लगता है।
ध्यान रहे, ग्राहक जितने लंबे समय तक बकाया रखता है, बैंक की ब्याज से कमाई उतनी ही ज्यादा होती है। इसलिए Credit Card Minimum Due का छोटा विकल्प आपकी सुविधा से ज्यादा कार्ड कंपनी के फायदे का सौदा है।
एक आसान उदाहरण से समझें
मान लीजिए आपके कार्ड पर 50,000 रुपये बकाया है और ब्याज 3.5 प्रतिशत महीना है। एक महीने का ब्याज 1,750 रुपये बनता है, और GST जोड़कर यह करीब 2,065 रुपये हो जाता है।
अब अगर आप हर महीने सिर्फ बकाया का 5 प्रतिशत भरते रहें और कार्ड से कोई नई खरीदारी न करें, तो यह कर्ज खत्म होने में 20 साल से ज्यादा लग सकते हैं।
इस दौरान आप ब्याज और GST के रूप में करीब 1.8 लाख रुपये चुका देंगे, यानी असली कर्ज से तीन गुना से भी ज्यादा। यही Credit Card Minimum Due का छिपा हुआ गणित है।
यह एक अनुमान है, असल रकम बैंक के नियम और ब्याज दर के हिसाब से अलग हो सकती है। लेकिन तस्वीर लगभग ऐसी ही रहती है।
RBI के नियम क्या कहते हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक के क्रेडिट कार्ड नियमों के मुताबिक कार्ड कंपनियों को न्यूनतम रकम इस तरह तय करनी होती है कि उसे भरने के बाद भी बकाया लगातार बढ़ता न जाए। यानी Credit Card Minimum Due में कम से कम उस महीने का ब्याज और फीस जरूर शामिल होनी चाहिए।
कंपनियों को स्टेटमेंट में यह भी साफ बताना होता है कि सिर्फ न्यूनतम रकम भरने पर कितना ब्याज लगेगा और ब्याज मुक्त समय का क्या होगा। इसलिए अपना स्टेटमेंट हर महीने ध्यान से पढ़ें, सिर्फ भुगतान की रकम देखकर आगे न बढ़ें।
अगर आपको लगता है कि बैंक ने गलत चार्ज लगाया है, तो पहले बैंक की शिकायत व्यवस्था में शिकायत करें। तय समय में हल न मिलने पर RBI के लोकपाल पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है। Credit Card Minimum Due से जुड़ी गलतफहमी दूर करने के लिए बैंक के कस्टमर केयर से लिखित जानकारी लेना भी अच्छा तरीका है।
क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है?
सिर्फ Credit Card Minimum Due भरने से आपका भुगतान समय पर माना जाता है, इसलिए सीधा नुकसान नहीं होता। लेकिन बकाया लगातार ऊंचा बना रहता है।
इससे आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो बढ़ जाता है, यानी आप अपनी लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करते दिखते हैं। लंबे समय तक ऐसा रहने पर क्रेडिट स्कोर धीरे धीरे गिर सकता है और आगे लोन लेना महंगा हो सकता है।
किन हालात में यह ठीक है?
अगर किसी महीने अचानक इलाज या नौकरी जाने जैसी मजबूरी आ जाए, तो Credit Card Minimum Due भरकर लेट फीस और डिफॉल्ट से बचना सही कदम है। कुछ न भरने से तो यह कहीं बेहतर है।
लेकिन इसे आदत न बनने दें। अगले एक दो महीनों में पूरा बकाया चुकाने की ठोस योजना बनाएं।
इस जाल से कैसे निकलें?
सबसे पहले कार्ड से नई खरीदारी तुरंत बंद करें, ताकि बकाया और न बढ़े। फिर हर महीने न्यूनतम रकम से जितना ज्यादा हो सके, उतना भुगतान करें।
अगर बकाया बड़ा है, तो बैंक से उसे कम ब्याज वाली EMI में बदलने का विकल्प पूछें। कम ब्याज वाले पर्सनल लोन से कार्ड का बकाया चुकाना भी एक तरीका हो सकता है।
कुछ बैंक दूसरे कार्ड पर बैलेंस ट्रांसफर की सुविधा भी देते हैं, जिसमें कुछ महीनों तक कम ब्याज लगता है। किसी भी विकल्प को चुनने से पहले उसकी प्रोसेसिंग फीस और शर्तें जरूर पढ़ें।
सबसे अच्छी आदत यह है कि हर महीने ऑटो डेबिट से पूरा बिल भरने का निर्देश दें। इससे Credit Card Minimum Due का विकल्प कभी चुनना ही नहीं पड़ेगा।
क्रेडिट कार्ड और कर्ज से जुड़ी और जानकारी
अपनी लिमिट का सही इस्तेमाल समझने के लिए Credit Utilization Ratio कैसे कम करें पढ़ें। सिबिल स्कोर बनने और बिगड़ने की वजहें जानने के लिए सिबिल स्कोर के सभी फैक्टर देखें। आसान किस्तों के पीछे छिपे खर्च समझने के लिए Buy Now Pay Later के छिपे चार्ज भी जरूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या Credit Card Minimum Due भरने से लेट फीस नहीं लगती?
हां, ड्यू डेट तक न्यूनतम रकम भरने पर लेट फीस नहीं लगती। लेकिन बचे हुए बकाया पर ब्याज और उस पर GST जरूर लगता है।
2. अगर न्यूनतम रकम भी न भरूं तो क्या होगा?
तब लेट फीस लगेगी, ब्याज जारी रहेगा और भुगतान में देरी आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज हो जाएगी। इससे क्रेडिट स्कोर को सीधा नुकसान होता है।
3. क्या आधा बिल भरने से ब्याज कम लगता है?
आधा भरने से बचे हुए बकाया पर ब्याज लगेगा, लेकिन ज्यादातर मामलों में ब्याज मुक्त समय फिर भी खत्म हो जाता है। इसलिए पूरा बिल भरना ही सबसे फायदेमंद है।
4. क्रेडिट कार्ड ब्याज के बारे में विस्तार से कहां पढ़ें?
क्रेडिट कार्ड पर ब्याज की गणना और उसके तरीकों की विस्तृत जानकारी यहां पढ़ सकते हैं।
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