Cookies and Cache दोनों ही ब्राउजर में सेव होने वाला डेटा हैं, लेकिन इनका काम, साइज और असर एक दूसरे से बिल्कुल अलग है। जब भी फोन या लैपटॉप का ब्राउजर धीमा होता है, तो सलाह मिलती है कि डेटा क्लियर कर दो। पर स्क्रीन पर दोनों विकल्प दिखते ही ज्यादातर लोग उलझ जाते हैं कि किसे हटाएं और किसे रहने दें।
Cookies क्या होती हैं?
कुकीज छोटी टेक्स्ट फाइलें होती हैं, जिन्हें कोई वेबसाइट आपके ब्राउजर में सेव कर देती है। इनमें आपकी लॉगिन जानकारी, भाषा की पसंद, शॉपिंग कार्ट और साइट पर किए गए काम जैसी बातें दर्ज रहती हैं। यही वजह है कि किसी वेबसाइट को दोबारा खोलने पर आपको फिर से लॉगिन नहीं करना पड़ता।
एक कुकी आमतौर पर 4 KB तक की ही होती है और हर बार वेबसाइट खोलने पर यह जानकारी सर्वर तक भेजी जाती है। कुछ कुकीज उसी वेबसाइट की होती हैं, जिसे आप देख रहे हैं, जिन्हें फर्स्ट पार्टी कुकीज कहते हैं। वहीं विज्ञापन कंपनियों की थर्ड पार्टी कुकीज अलग अलग साइट्स पर आपकी गतिविधि ट्रैक करती हैं।
Cache क्या होता है?
कैश वेबसाइट की तस्वीरों, लोगो, फॉन्ट, स्टाइल और स्क्रिप्ट फाइलों की एक लोकल कॉपी होती है। इसका मकसद सिर्फ एक है: अगली बार वही पेज खोलने पर उसे तेजी से लोड करना। जब आप कोई साइट दोबारा खोलते हैं, तो ब्राउजर ये फाइलें इंटरनेट से दोबारा डाउनलोड करने की बजाय अपने स्टोरेज से उठा लेता है।
इससे समय और मोबाइल डेटा दोनों की बचत होती है। कैश में आपकी निजी पहचान या पसंद जैसी जानकारी नहीं होती। हालांकि समय के साथ इसका साइज कई सौ MB तक बढ़ सकता है।
Cookies and Cache में मुख्य अंतर
सबसे बड़ा अंतर मकसद का है। कुकीज आपको याद रखने के लिए होती हैं, जबकि कैश वेबसाइट को तेज बनाने के लिए होता है। साइज में भी बड़ा फर्क है। कुकीज कुछ KB की होती हैं, जबकि कैश बड़ी मीडिया फाइलों की वजह से काफी जगह घेर लेता है। कुकीज की जानकारी हर अनुरोध के साथ सर्वर तक जाती है, लेकिन कैश सिर्फ आपके डिवाइस में ही रहता है।
प्राइवेसी के लिहाज से कुकीज ज्यादा संवेदनशील मानी जाती हैं, क्योंकि इनसे ट्रैकिंग होती है। एक और फर्क उनकी उम्र का है। कई कुकीज ब्राउजर बंद होते ही खत्म हो जाती हैं, जबकि कुछ की एक्सपायरी तारीख महीनों बाद की होती है। कैश तब तक रहता है, जब तक वेबसाइट उसे बदल न दे या आप उसे साफ न कर दें।
किसे कब साफ करना चाहिए?
अगर कोई वेबसाइट पुराना डिजाइन दिखा रही है, तस्वीरें टूटी हुई आ रही हैं या फोन में स्टोरेज कम है, तो कैश साफ करना काफी है। इससे आपका लॉगिन नहीं हटता। अगर लॉगिन में दिक्कत आ रही है, किसी साइट पर बार बार एरर दिख रहा है या आप किसी दूसरे के कंप्यूटर पर काम कर चुके हैं, तो कुकीज हटाना सही रहेगा।
ध्यान रखें, इसके बाद ज्यादातर साइट्स पर दोबारा लॉगिन करना पड़ेगा। Chrome में Ctrl, Shift और Delete एक साथ दबाकर Delete browsing data का विकल्प सीधे खुल जाता है। यहां आप Cookies and Cache दोनों को अलग अलग चुन सकते हैं और समय सीमा भी तय कर सकते हैं।

प्राइवेसी के लिए क्या बदल रहा है?
Safari और Firefox जैसे ब्राउजर अब डिफॉल्ट रूप से कई थर्ड पार्टी कुकीज को रोकते हैं। इससे विज्ञापन कंपनियों के लिए आपको एक साइट से दूसरी साइट तक ट्रैक करना मुश्किल हुआ है। फिर भी पूरी सुरक्षा के लिए ब्राउजर सेटिंग्स में थर्ड पार्टी कुकीज को ब्लॉक करना और समय समय पर डेटा साफ करना अच्छी आदत है।
ब्राउजर से जुड़ी ये जानकारियां भी आपके काम आएंगी: Browser Cookies क्या हैं और कैसे काम करती हैं, Chrome Browser की Useful Hidden Settings और WebRTC Leak क्या है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या Cookies and Cache साफ करने से कोई नुकसान होता है?
कोई बड़ा नुकसान नहीं होता। कुकीज हटाने पर दोबारा लॉगिन करना पड़ता है और कैश हटाने पर पहली बार वेबसाइट थोड़ी धीमी खुल सकती है।
2. कैश कितने दिनों में साफ करना चाहिए?
इसका कोई तय नियम नहीं है। आमतौर पर महीने में एक बार या किसी साइट में दिक्कत आने पर साफ करना काफी होता है।
3. क्या कुकीज से वायरस आ सकता है?
कुकीज सिर्फ टेक्स्ट फाइलें हैं, इसलिए ये खुद वायरस नहीं होतीं। लेकिन असुरक्षित साइट्स पर इनके चोरी होने से अकाउंट का खतरा हो सकता है।
4. कुकीज की तकनीकी जानकारी कहां से पढ़ें?
इसकी विस्तृत जानकारी Mozilla के आधिकारिक डॉक्यूमेंटेशन में मिलती है।
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उपरोक्त Cookies and Cache से जुड़ी जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

