Credit Card Limit Increase यानी क्रेडिट कार्ड की खर्च सीमा बढ़वाना, सही समय पर किया जाए तो आपकी वित्तीय स्थिति और सिबिल स्कोर दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है। लेकिन बिना सोचे समझे बढ़ी हुई लिमिट ज्यादा खर्च और कर्ज का कारण भी बन सकती है।
इसलिए यह जानना जरूरी है कि लिमिट कब बढ़वानी चाहिए, इसका तरीका क्या है और आपके क्रेडिट स्कोर पर इसका असल में क्या असर पड़ता है। इस लेख में यही सब आसान भाषा में समझाया गया है।
Credit Card Limit Increase क्या है?
क्रेडिट लिमिट वह अधिकतम रकम है, जितना आप अपने कार्ड से खर्च कर सकते हैं। बैंक यह सीमा आपकी आय, खर्च करने के तरीके, भुगतान के रिकॉर्ड और सिबिल स्कोर के आधार पर तय करता है।
समय के साथ आपकी आय बढ़ने या कार्ड का अच्छा इस्तेमाल होने पर बैंक इस सीमा को बढ़ा सकता है। यह बढ़ोतरी दो तरीकों से होती है, बैंक की तरफ से ऑफर या आपकी तरफ से अनुरोध।
लिमिट बढ़ने के दो तरीके
बैंक की ओर से प्री अप्रूव्ड ऑफर
अगर आप समय पर बिल भरते हैं और कार्ड का नियमित इस्तेमाल करते हैं, तो बैंक खुद ही बढ़ी हुई लिमिट का ऑफर भेज सकता है। आरबीआई के नियमों के मुताबिक बैंक आपकी साफ सहमति के बिना लिमिट नहीं बढ़ा सकता, इसलिए आपको ऑफर स्वीकार करना होता है।
ग्राहक की ओर से अनुरोध
आप खुद भी बैंक के ऐप, नेट बैंकिंग या कस्टमर केयर से Credit Card Limit Increase का अनुरोध कर सकते हैं। इसमें बैंक आपकी नई सैलरी स्लिप, आयकर रिटर्न या बैंक स्टेटमेंट जैसे आय के कागज मांग सकता है।
लिमिट कब बढ़वाएं?
Credit Card Limit Increase का सबसे अच्छा समय तब है, जब आपकी सैलरी या कमाई बढ़ी हो और आप पिछले 6 से 12 महीनों से हर बिल समय पर चुका रहे हों। अच्छा सिबिल स्कोर होने पर मंजूरी मिलना भी आसान होता है।
अगर आपका खर्च अक्सर लिमिट के बड़े हिस्से तक पहुंच जाता है, जैसे यात्रा, शादी या मेडिकल जरूरत में, तब भी लिमिट बढ़वाना मददगार रहता है। लेकिन हाल ही में कई लोन या कार्ड के लिए आवेदन किया हो, तो कुछ समय रुकना बेहतर है।
सिबिल स्कोर पर क्या असर होता है?
अच्छा असर
सिबिल स्कोर में क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो की बड़ी भूमिका होती है, यानी आप अपनी कुल लिमिट का कितना हिस्सा इस्तेमाल करते हैं। मान लीजिए आपकी लिमिट 1 लाख रुपये है और आप हर महीने 50,000 रुपये खर्च करते हैं, तो यह रेशियो 50 प्रतिशत है।
Credit Card Limit Increase के बाद लिमिट 2 लाख रुपये हो जाए और खर्च 50,000 रुपये ही रहे, तो रेशियो घटकर 25 प्रतिशत रह जाता है। कम रेशियो आपके स्कोर के लिए अच्छा माना जाता है।
कुछ समय का हल्का असर
अगर Credit Card Limit Increase के अनुरोध पर बैंक क्रेडिट ब्यूरो से आपकी रिपोर्ट की हार्ड जांच करता है, तो स्कोर में कुछ समय के लिए मामूली गिरावट आ सकती है। बैंक के प्री अप्रूव्ड ऑफर में आमतौर पर ऐसी जांच नहीं होती।
बढ़ी हुई लिमिट के जोखिम
सबसे बड़ा खतरा ज्यादा खर्च करने का है। ज्यादा लिमिट का मतलब ज्यादा पैसा नहीं, बल्कि ज्यादा उधार लेने की क्षमता है। अगर बढ़ी हुई लिमिट के साथ खर्च भी बढ़ गया और पूरा बिल नहीं भर पाए, तो भारी ब्याज और कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
इसलिए Credit Card Limit Increase के बाद भी अपने बजट के हिसाब से ही खर्च करें और हर महीने पूरा बिल चुकाने की आदत बनाए रखें।
अनुरोध खारिज हो जाए तो क्या करें?
Credit Card Limit Increase का अनुरोध खारिज होने की आम वजहें हैं अनियमित भुगतान, कम सिबिल स्कोर, ज्यादा मौजूदा कर्ज या आय के पर्याप्त प्रमाण की कमी। ऐसे में कुछ महीनों तक समय पर भुगतान करें, लिमिट का कम इस्तेमाल करें और फिर दोबारा आवेदन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या बैंक बिना पूछे लिमिट बढ़ा सकता है?
नहीं, आरबीआई के नियमों के अनुसार Credit Card Limit Increase के लिए कार्डधारक की साफ सहमति जरूरी है। बैंक सिर्फ ऑफर भेज सकता है। - लिमिट बढ़वाने के लिए कितनी बार आवेदन करना चाहिए?
Credit Card Limit Increase के लिए बार बार आवेदन करने से बचें। आमतौर पर 6 महीने या उससे ज्यादा के अंतराल पर ही दोबारा अनुरोध करना बेहतर रहता है। - क्या लिमिट कम भी करवाई जा सकती है?
हां, अगर आप अपने खर्च पर नियंत्रण रखना चाहते हैं, तो बैंक से कहकर कार्ड की लिमिट कम भी करवा सकते हैं। - क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियम कहां पढ़ें?
क्रेडिट कार्ड से जुड़े आधिकारिक दिशानिर्देश भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। अपने कार्ड की सटीक शर्तें बैंक से जरूर जांचें।

