Chhath Puja 2022 : जानिए क्यों रखते हैं छठी मैया का व्रत

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Chhath Puja 2022
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दीपावली और भैय्या दूज के समापन के बाद ही चार दिनों तक चलने वाला आस्था का महापर्व छठ पूजा की शुरुआत हो गई है। शुक्रवार से नहाय-खाय के साथ छठ पूजा का पर्व शुरू हो गया है और 31 अक्टूबर को इसका समापन हो रहा है। इस दिन षष्ठी मैया और सूर्यदेव की पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन शिव की भी पूजा की जाती है। छठ पूजा को सबसे ज्यादा बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में धूमधाम से मनाया जाता है। आपको बता दें कि ये पर्व संतान के लिए रखा जाता है और इस दिन 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। तो चलिए आज हम आपको सुनाते हैं छठ पूजा की पौराणिक कथा।

Chhath Puja 2022
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Chhath Puja 2022 : पौराणिक कथा

काफी समय पहले की बात है एक बूढ़ी माता थी, उनका एक बेटा और एक बहु थी, बूढ़ी माता छठी मैय्या की परम भक्त थी और वो हर साल पूरी श्रद्धा के साथ छठी मैया का व्रत करती थी। परंतु उनकी बहु नए विचारों की थी। वो पूजा पाठ में विश्वास नहीं करती थी, एक बार बूढ़ी अम्मा छठ पर्व करने की तैयारी कर रही थी। बूढ़ी अम्मा की बहु उन पर हंसने लगी। और बोली अम्मा दुनियां कहां कहां पहुंच गई लोग आसमान को छूं रहे हैं और आप आज भी इतनी अंधिविश्वासी हो, पढ़ी लिखि बहू का बूढ़ी अम्मा पर कोई असर नहीं हुआ, वो तो बस अपनी तैयारी करने लगी फिर बहू बोली अम्मा तुम तीन दिन तक भूखी रहोगी तो खुद पर ही मुश्किल लाकर खड़ा कर दोगी।वो बोलने लगी न जाने क्यों लोग अपने आप को भूखे प्यासे रखते हैं।

बहू की बात सुनकर बूढ़ी अम्मा मुस्कुराई और बोली शादी के बाद मेरी संतान नहीं हो रही थी तब मैंने इन्हीं छठी मैय्या का व्रत रखा और उन्होंने मेंरी पुकार सुनी और तेरा पति छठी मैया का ही प्रसाद है। तू भी इस वर्ष छठी मैया का व्रत रख छठी मैया तेरी भी पुकार सुन लेंगी, मगर नई सोच वाली बहू किसी का कहा नहीं सुनने वाली थी। वो बोली में पूजा पाठ नहीं करने वाली, सुंदर पति मिला है जीवन में हर खुशी मिली है आलिशान घर मिला है दिन रात एकदम मस्त रहती हूं, पूरे गांव में मुझ जैसा धनवान कोई नहीं है। बहू पर बूढ़ी के समझाने का कोई असर नहीं हुआ। वो नासतिक थी, इतने में उसका पति वहां आया और बोला ठीक है तुम्हें पूजा पाठ नहीं करनी तो मत करो लेकिन मेरी मां से झगड़ो मत और जाकर तैयार हो जाओ छठ माता को घाट पर जाने का समय हो गया है।

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बहु बिना रूचि के उनके साथ घाट पर जाती है लेकिन वहां पूजा करने के बजाय वो मेंला घूमने लगती है। कुछ देर बाद उसका पति उसे वहां ना पाकर ठूंठने लगता है तो वो हलवाई के पास स्वादिष्ठ पकवानों का आंनद लेती हुई नजर आती है। फिर पति उसे कहता है कि तुम यहां तक आई हो कुछ देर मां के साथ बैठो पत्नी गुस्से में बोली नही नहीं में पूजा पाठ में नहीं बैठने वाली, मैं तो मेंला घूमूगी आप ही करो पूजा पाठ,पति वहां से चला जाता है और जैसे ही डूबकी लगाता है डूबकी लगाते ही डूब जाता है और जोर जोर से चिखने लगता है लेकिन किसी को भी उसकी आवाज नहीं आती है, लेकिन जैसे ही बूढी अम्मा को बेटे के डूबने का पता चलता है तो वो जोर जोर से रोने लगती है और छठी मैया से बोलती है मां मुझसे तेरी भक्ति में कौन सी कमी रह गई जो तुमने मेंरी गोद सुनी कर दी बोलो मां हमसे क्या भूल गई हम तो तुम्हारी पूजा करने आए थे, ऐसा कहकर वो जोर जोर से रोने लगी उधर मेले में शोर मचा की घाट में एक व्यक्ति डूब गया है।

सुनकर बहु दौड़ी दौड़ी वहां आती है। और देखती है कि उसकी सास रो रही है और उसका पति डूब गया है और उसे सदमा लगता है वो जोर जोर से चीख चीख के बूढ़ी अम्मा से कहती है कि मैंने पहले ही कहा था अम्मा ये छठ के चक्कर में मत पड़ो सब ढ़ोग है अंधविश्ववास है मैंने पहले ही कहा था कि इसके चक्कर में मत पढ़ो फिर सभी लोग मन में छठी माता को पुकारते हैं कि हे मां इस बुढ़िया की पुकार सुन लो, छठी मैया तो है दी दयालु माता कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करती इधर वियोग में बुढ़ी अम्मा जैसे ही नदी में जान देने लगती हैं तभी नदी में से एक लहर उठती है और उसी लहर में से बुढ़ी अम्मा का बेटा बाहर आ जाता है।

ये देख घाट पर मौजूद सभी लोगों की आंखे खूली की खूली रह जाती हैं बूढ़ी अम्मा खुशी से रोने लगती हैं। बहु भी खुशी के मारे जोर जोर से रोने लगती हैं। इसी में तेज गर्जना के साथ छठी मैया प्रकट होती हैं और बोली में कभी अपने बच्चों का अहित नहीं करती मैंने तुम्हारी आंखों से पर्दा हटाने के लिए तुम्हारे पति को पानी में डुबोया था मैं सदेव अपने भक्तों की रक्षा करती हूं इस कलियुग मे जो भक्त मेंरी पुजा करता है में उसकी मनोकामनां पूर्ण करती हूं ये कहकर छठी मैया अतर्घ्यान हो गई। और घाट में मौजूद सभी लोगों ने छठी मैया के जयकारा लगाना शुरू कर दिया।

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