/ Mar 19, 2026
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CHAITRA NAVRATRI 2026: आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ ही वासंतिक नवरात्र और हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का उल्लासपूर्ण शुभारंभ हो गया है। देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में आज सुबह से ही भक्ति की बयार बह रही है। प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों से लेकर मोहल्लों के छोटे मंदिरों तक, हर जगह ‘जय माता दी’ के जयकारों की गूँज सुनाई दे रही है। मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप ‘मां शैलपुत्री’ की उपासना के साथ नौ दिनों तक चलने वाले इस महा-अनुष्ठान की विधिवत शुरुआत हो गई है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी पर हुआ है, जिसे शास्त्रानुसार सुख, शांति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। आज सुबह 06:51 बजे प्रतिपदा तिथि शुरू होते ही घरों और मंदिरों में मंगल कलश की स्थापना की गई। सुबह 06:52 से 07:53 बजे तक कलश स्थापना का विशेष मुहूर्त रहा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने अपने घरों में अखंड ज्योति प्रज्वलित की। पंडितों का मानना है कि कलश स्थापना से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी 33 करोड़ देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
राजधानी देहरादून के डाट काली मंदिर और नैनीताल के प्रसिद्ध मां नयना देवी मंदिर में सुबह 4 बजे से ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। अल्मोड़ा के नंदा देवी और कसार देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर नए वर्ष में उन्नति की प्रार्थना की। धर्मनगरी हरिद्वार में नवरात्र के पहले दिन का नजारा अद्भुत रहा। अधिष्ठात्री देवी मां माया देवी, सिद्धपीठ मनसा देवी और चंडी देवी मंदिर में दर्शन के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शिवालिक की पहाड़ियों पर स्थित इन मंदिरों तक पहुँचने के लिए भक्तों ने पैदल और रोपवे के जरिए यात्रा की।

गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और नव संवत्सर का स्वागत किया। वहीं, कुमाऊं के बागेश्वर में पवित्र सरयू और गोमती के संगम पर भक्तों ने स्नान कर बागनाथ मंदिर में माथा टेका। जिले के प्रसिद्ध कोट भ्रामरी और कंडा कालिका मंदिर में विशेष हवन और दुर्गा सप्तशती के पाठ का आयोजन किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने CHAITRA NAVRATRI 2026 की भीड़ को देखते हुए मंदिरों में विशेष बैरिकेडिंग और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की है।
CHAITRA NAVRATRI 2026 के दौरान अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। यह समय आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इस बार नवरात्र की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं:
19 मार्च: मां शैलपुत्री पूजा (कलश स्थापना)
20 मार्च: मां ब्रह्मचारिणी
21 मार्च: मां चंद्रघंटा
22 मार्च: मां कूष्माण्डा
23 मार्च: मां स्कंदमाता
24 मार्च: मां कात्यायनी
25 मार्च: मां कालरात्रि
26 मार्च: मां महागौरी (अष्टमी पूजन)
27 मार्च: मां सिद्धिदात्री और रामनवमी
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र नवरात्र का संबंध महिषासुर नामक राक्षस के अंत से जुड़ा है। जब महिषासुर के आतंक से स्वर्ग और पृथ्वी त्राहि-त्राहि कर रहे थे, तब सभी देवताओं की शक्ति के अंश से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ। देवी ने नौ दिनों तक युद्ध कर महिषासुर का वध किया, इसीलिए इन नौ दिनों को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।
एक अन्य महत्वपूर्ण मान्यता के अनुसार, चैत्र नवरात्र के नौवें दिन ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि प्रभु राम ने रावण के साथ युद्ध करने से पूर्व मां दुर्गा की नौ दिनों तक कठिन उपासना की थी, जिसके बाद उन्हें विजय का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। यही कारण है कि चैत्र नवरात्र को कई क्षेत्रों में ‘राम नवरात्र’ के नाम से भी जाना जाता है।

देवभूमि में नवरात्र के दौरान कन्या पूजन (कंजंक) का भी विशेष महत्व है। लोग छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। फिलहाल, पूरे उत्तराखंड में भक्ति, साधना और उल्लास का वातावरण बना हुआ है।(CHAITRA NAVRATRI 2026)
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