Capital Gains यानी शेयर बेचकर होने वाले मुनाफे पर टैक्स कितना लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने शेयर कितने समय तक रखा और आप किस तरह की ट्रेडिंग करते हैं। बहुत से नए निवेशक मान लेते हैं कि शेयर बाजार की हर कमाई पर एक ही टैक्स लगता है। असल में डिलीवरी, इंट्राडे और F&O, तीनों के नियम बिल्कुल अलग हैं। 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 भी लागू हो चुका है।
डिलीवरी में खरीदे शेयर पर टैक्स के नियम
अगर आपने शेयर खरीदकर 12 महीने के अंदर बेच दिए, तो मुनाफा शॉर्ट टर्म माना जाता है और उस पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है। 12 महीने से ज्यादा रखने पर मुनाफा लॉन्ग टर्म बन जाता है। एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म मुनाफा टैक्स फ्री है और उसके ऊपर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है।
ये दोनों रियायती दरें तभी मिलती हैं जब शेयर की खरीद बिक्री पर STT यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स चुकाया गया हो। मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर होने वाले सौदों में यह अपने आप कट जाता है।
नए कानून में Capital Gains के नियम
नया आयकर अधिनियम 2025 पुराने 1961 वाले कानून की जगह आया है। इसमें धाराओं के नंबर बदले हैं, लेकिन शेयर पर टैक्स की दरें वही हैं। पहले शॉर्ट टर्म मुनाफे पर धारा 111A और लॉन्ग टर्म पर धारा 112A लगती थी।
नए कानून में इनकी जगह धारा 196 और 198 ने ले ली है। 31 जनवरी 2018 से पहले खरीदे गए शेयरों पर पुराना ग्रैंडफादरिंग नियम भी जारी है। इसमें उस दिन के बाजार भाव को खरीद कीमत मानकर Capital Gains की गणना की जा सकती है।
इंट्राडे और F&O की कमाई पर टैक्स
इंट्राडे ट्रेडिंग, जिसमें शेयर उसी दिन खरीदे और बेचे जाते हैं, उसकी कमाई को सट्टा कारोबारी आय माना जाता है। इस पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। फ्यूचर्स और ऑप्शंस की कमाई गैर सट्टा कारोबारी आय मानी जाती है। इस पर भी स्लैब रेट से टैक्स लगता है और ITR-3 फॉर्म भरना होता है।
बजट 2026 के बाद
1 अप्रैल 2026 से फ्यूचर्स पर STT 0.02 से बढ़कर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस प्रीमियम पर 0.1 से बढ़कर 0.15 प्रतिशत हो गया है। डिलीवरी और इंट्राडे सौदों के STT में कोई बदलाव नहीं हुआ। घाटा हो जाए तो उसका क्या करें शॉर्ट टर्म घाटे को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म, दोनों तरह के मुनाफे से घटाया जा सकता है। लेकिन लॉन्ग टर्म घाटा सिर्फ लॉन्ग टर्म मुनाफे से ही घटेगा।
जो घाटा इस साल एडजस्ट न हो पाए, उसे अगले 8 साल तक आगे ले जाया जा सकता है। शर्त यह है कि ITR तय तारीख से पहले भरा गया हो। इंट्राडे का घाटा सिर्फ सट्टा आय से घटता है और 4 साल तक आगे ले जाया जा सकता है। इसलिए Capital Gains और घाटे का पूरा हिसाब हर साल ITR में दिखाना फायदेमंद रहता है।

टैक्स बचाने के कानूनी तरीके
Capital Gains टैक्स घटाने के लिए लंबे समय के निवेश में हर साल 1.25 लाख रुपये की छूट का पूरा इस्तेमाल करें। कुछ शेयर बेचकर दोबारा खरीदने से खरीद कीमत बढ़ जाती है और भविष्य का टैक्स घटता है। घाटे वाले शेयर साल के अंत में बेचकर मुनाफे से एडजस्ट करना भी एक तरीका है। बिना वजह जल्दी बेचने से बचें, क्योंकि 12 महीने पूरे होने पर टैक्स काफी कम हो जाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. शेयर पर Capital Gains टैक्स कब भरना होता है?
मुनाफा जिस वित्त वर्ष में हुआ, उसी साल के ITR में उसे दिखाना होता है। बड़ी रकम होने पर एडवांस टैक्स भी भरना पड़ सकता है।
2. क्या 1.25 लाख रुपये की छूट शॉर्ट टर्म Capital Gains पर भी मिलती है?
नहीं, यह छूट सिर्फ लॉन्ग टर्म मुनाफे पर मिलती है। शॉर्ट टर्म मुनाफे पर पहले रुपये से 20 प्रतिशत टैक्स लगता है।
3. क्या कम आय वालों को भी Capital Gains पर टैक्स देना होगा?
अगर आपकी कुल आय बेसिक छूट सीमा से कम है, तो उस कमी जितना शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म मुनाफा टैक्स से बच सकता है। सही गणना के लिए टैक्स सलाहकार से बात करें।
4. Capital Gains की गणना खुद कैसे करें?
आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर टैक्स कैलकुलेटर और ताजा नियम उपलब्ध हैं। आपका ब्रोकर भी साल के अंत में टैक्स रिपोर्ट देता है।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। यह टैक्स या निवेश सलाह नहीं है।

