Tax On Investment Income को लेकर ज्यादातर निवेशकों के मन में उलझन रहती है, क्योंकि शेयर, म्यूचुअल फंड और FD, तीनों पर टैक्स का तरीका अलग है। कई लोग सिर्फ रिटर्न देखकर निवेश करते हैं और टैक्स कटने के बाद असली कमाई देखकर चौंक जाते हैं। अच्छी बात यह है कि बजट 2026 में शेयर और इक्विटी फंड की टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। यानी नियम वही हैं, बस उन्हें सही से समझना जरूरी है।
शेयर बेचने पर कितना टैक्स लगता है?
शेयर पर टैक्स इस बात से तय होता है कि आपने उसे कितने समय तक रखा। 12 महीने के भीतर बेचने पर मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाता है, जिस पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है। 12 महीने से ज्यादा रखने पर यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) बन जाता है।
इस पर एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का मुनाफा टैक्स फ्री है, उसके ऊपर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है। उदाहरण के लिए, अगर एक साल में आपका लॉन्ग टर्म मुनाफा 2 लाख रुपये है, तो टैक्स सिर्फ 75,000 रुपये पर लगेगा।
Tax On Investment Income: म्यूचुअल फंड पर टैक्स के नियम
इक्विटी म्यूचुअल फंड, यानी जिनमें 65 प्रतिशत से ज्यादा पैसा शेयरों में लगा हो, उन पर शेयर वाले नियम ही लागू होते हैं। 12 महीने से पहले बेचने पर 20 प्रतिशत और बाद में 1.25 लाख रुपये से ऊपर के मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत टैक्स। डेट फंड का मामला अलग है।
1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए डेट फंड के मुनाफे पर कोई लॉन्ग टर्म फायदा नहीं मिलता, यह आपकी आय में जुड़कर स्लैब रेट से टैक्स होता है। SIP में हर किस्त को अलग निवेश माना जाता है। इसलिए हर किस्त की 12 महीने की अवधि अलग से गिनी जाती है।
FD के ब्याज पर टैक्स कैसे लगता है?
FD से मिलने वाला ब्याज आपकी कुल आय में जुड़ता है और उस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। यानी 30 प्रतिशत स्लैब वाले व्यक्ति को ब्याज पर भी उतना ही टैक्स देना होगा। बैंक एक वित्त वर्ष में 50,000 रुपये से ज्यादा ब्याज होने पर TDS काटता है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये है। PAN न देने पर TDS ज्यादा दर से कटता है। ध्यान रखें, TDS न कटने का मतलब टैक्स फ्री होना नहीं है। ITR भरते समय पूरे ब्याज को आय में दिखाना जरूरी है।
Tax On Investment Income: डिविडेंड और बायबैक पर क्या नियम हैं?
शेयर या म्यूचुअल फंड से मिलने वाला डिविडेंड आपकी आय में जुड़कर स्लैब रेट से टैक्स होता है। बजट 2026 के बाद 1 अप्रैल 2026 से शेयर बायबैक की रकम को डिविडेंड नहीं, बल्कि कैपिटल गेन माना जाता है और सिर्फ मुनाफे पर टैक्स लगता है। (Tax On Investment Income)

Tax On Investment Income कम करने के आसान तरीके
शेयर और इक्विटी फंड को कम से कम 12 महीने रखें, ताकि कम दर और 1.25 लाख रुपये की छूट का फायदा मिले। हर साल इस छूट का इस्तेमाल करने के लिए टैक्स हार्वेस्टिंग भी काम आती है। घाटे वाले निवेश को बेचकर उस नुकसान को मुनाफे से सेट ऑफ किया जा सकता है।
ऊंचे स्लैब वाले लोग FD की जगह दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। कुल मिलाकर, Tax On Investment Income को समझकर ही असली रिटर्न का सही अंदाजा लगता है। बड़े फैसले से पहले टैक्स सलाहकार की राय लेना समझदारी है।
Tax On Investment Income: निवेश और टैक्स से जुड़ी और जानकारी
कैपिटल गेन टैक्स कानूनी तरीके से बचाने के लिए Tax Harvesting क्या है पढ़ें। फंड चुनते समय Growth और IDCW ऑप्शन का अंतर समझें और Inflation Adjusted Return का गणित भी जानें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Tax On Investment Income में शेयर पर LTCG की छूट कितनी है?
एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म मुनाफा टैक्स फ्री है, उसके ऊपर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है।
2. क्या FD का ब्याज टैक्स फ्री है?
नहीं, FD का पूरा ब्याज आपकी आय में जुड़ता है और स्लैब रेट से टैक्स लगता है।
3. डेट म्यूचुअल फंड पर कितना टैक्स लगता है?
1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए डेट फंड के मुनाफे पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है, चाहे आपने उसे कितने भी समय तक रखा हो।
4. टैक्स से जुड़ी आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?
ताजा नियम और टैक्स कैलकुलेटर आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
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उपरोक्त Tax On Investment Income की जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। यह टैक्स या निवेश सलाह नहीं है, फैसले से पहले किसी टैक्स विशेषज्ञ से राय लें।

