Authenticator App एक ऐसा मोबाइल ऐप है, जो आपके ऑनलाइन अकाउंट के लिए हर 30 सेकंड में एक नया 6 अंकों का कोड बनाता है। पासवर्ड के साथ यह कोड डालने पर ही लॉगिन होता है, जिससे आपका अकाउंट दोहरी सुरक्षा में आ जाता है। आजकल पासवर्ड लीक और फिशिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में सिर्फ पासवर्ड के भरोसे रहना जोखिम भरा है।
टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन क्या है?
टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी दो चरणों वाली पहचान। पहला चरण वह है जो आप जानते हैं, यानी पासवर्ड। दूसरा चरण वह है जो आपके पास है, यानी आपका फोन। अगर किसी हैकर को आपका पासवर्ड मिल भी जाए, तो भी आपके फोन में बने कोड के बिना वह लॉगिन नहीं कर पाएगा। यही दूसरा चरण ऑथेंटिकेटर ऐप संभालता है।
Authenticator App कैसे काम करता है?
जब आप किसी वेबसाइट पर यह सुरक्षा चालू करते हैं, तो वह स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड दिखाती है। इस क्यूआर कोड में एक गुप्त चाबी छिपी होती है, जिसे सीक्रेट की कहा जाता है। ऐप से क्यूआर कोड स्कैन करते ही यह चाबी आपके फोन में सेव हो जाती है। अब वेबसाइट और आपका फोन, दोनों के पास एक ही गुप्त चाबी होती है। इसके बाद ऐप इस चाबी और मौजूदा समय को मिलाकर एक गणितीय फॉर्मूले से कोड बनाता है।
इस तरीके को टीओटीपी यानी टाइम बेस्ड वन टाइम पासवर्ड कहते हैं। वेबसाइट भी उसी समय उसी फॉर्मूले से कोड बनाती है। दोनों कोड मिलते ही आपका लॉगिन पूरा हो जाता है। हर 30 सेकंड बाद पुराना कोड बेकार हो जाता है और नया बन जाता है।
बिना इंटरनेट के भी करता है काम
Authenticator App तकनीक की सबसे खास बात यह है कि कोड बनाने के लिए इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं होती। ऐप सिर्फ फोन की घड़ी और सेव की गई चाबी से कोड तैयार करता है। इसलिए फ्लाइट मोड में या कमजोर नेटवर्क वाली जगह पर भी कोड मिलता रहता है। बस फोन का समय सही होना जरूरी है।
एसएमएस ओटीपी से बेहतर क्यों है?
एसएमएस से आने वाला ओटीपी सिम स्वैप फ्रॉड या मैसेज इंटरसेप्शन के जरिए चोरी हो सकता है। Authenticator App में कोड फोन के अंदर ही बनता है, इसलिए यह खतरा काफी कम हो जाता है। इसके अलावा एसएमएस में देरी या नेटवर्क की दिक्कत भी नहीं होती। यही कारण है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे ज्यादा सुरक्षित विकल्प मानते हैं।
लोकप्रिय Authenticator App और सेटअप का तरीका
गूगल ऑथेंटिकेटर, माइक्रोसॉफ्ट ऑथेंटिकेटर और ऑथी इस श्रेणी के सबसे लोकप्रिय ऐप हैं। गूगल ऑथेंटिकेटर अब कोड को गूगल अकाउंट के जरिए दूसरे डिवाइस पर सिंक करने की सुविधा भी देता है। सेटअप के लिए ऐप डाउनलोड करें, फिर अपने अकाउंट की सिक्योरिटी सेटिंग्स में टू स्टेप वेरिफिकेशन चालू करें। स्क्रीन पर दिखे क्यूआर कोड को स्कैन करें और ऐप में आया कोड डालकर पुष्टि करें।
किन बातों का ध्यान रखें?
सेटअप के समय मिलने वाले बैकअप कोड जरूर संभालकर रखें। फोन खोने या खराब होने पर यही कोड आपको अकाउंट तक वापस पहुंचाते हैं। किसी को भी अपना ऑथेंटिकेटर कोड न बताएं, चाहे वह खुद को बैंक या कंपनी का कर्मचारी क्यों न बताए।

नया फोन लेने से पहले पुराने फोन से कोड ट्रांसफर करना भी न भूलें। निष्कर्ष कुछ मिनट का सेटअप आपके ईमेल, सोशल मीडिया और बैंकिंग अकाउंट को हैकर्स से बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। इसलिए जरूरी अकाउंट पर दो चरणों वाली सुरक्षा आज ही चालू करें।
डिजिटल सुरक्षा पर और जानकारी के लिए ऑनलाइन प्राइवेसी से जुड़े टिप्स पढ़ें। नए खतरों को समझने के लिए जीरो क्लिक अटैक और डीपफेक डिटेक्शन तकनीक वाली हमारी रिपोर्ट भी देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या Authenticator App पूरी तरह मुफ्त है?
हां, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे ज्यादातर लोकप्रिय ऑथेंटिकेटर ऐप मुफ्त में उपलब्ध हैं।
2. फोन खो जाए तो Authenticator App अकाउंट में कैसे लॉगिन करें?
सेटअप के समय सेव किए गए बैकअप कोड से लॉगिन करें। अगर कोड क्लाउड पर सिंक थे, तो नए फोन में उसी अकाउंट से साइन इन करके उन्हें वापस पा सकते हैं।
3. कोड गलत क्यों बताया जा रहा है?
अक्सर ऐसा फोन का समय गलत होने से होता है। फोन की सेटिंग्स में अपने आप समय सेट होने वाला विकल्प चालू करें।
4. क्या एक Authenticator Appमें कई अकाउंट जोड़े जा सकते हैं?
हां, एक ही ऐप में आप ईमेल, सोशल मीडिया और दूसरी सेवाओं के कई अकाउंट जोड़ सकते हैं। हर अकाउंट का कोड अलग दिखता है।
5. गूगल ऑथेंटिकेटर को कैसे सेटअप करें?
ऐप डाउनलोड करके अपने गूगल अकाउंट में टू स्टेप वेरिफिकेशन चालू करें और क्यूआर कोड स्कैन करें। गूगल की आधिकारिक गाइड यहां देखें।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

