/ Mar 03, 2026
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ANIL AGARWAL: वेदांता समूह के चेयरमैन और प्रसिद्ध उद्योगपति अनिल अग्रवाल के इकलौते बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में निधन हो गया है। 49 वर्षीय अग्निवेश पिछले दिनों अमेरिका में स्कीइंग के दौरान एक हादसे का शिकार हो गए थे, जिसके बाद उनका न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में इलाज चल रहा था। बुधवार को अचानक उन्हें कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) आया, जिससे उनकी जान चली गई। अनिल अग्रवाल ने बुधवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद भावुक पोस्ट के जरिए दुनिया को अपने जीवन के ‘सबसे अंधकारमय दिन’ की जानकारी दी।

अनिल अग्रवाल ने अपने पोस्ट में एक पिता की बेबसी और गहरे दुख को बयां किया। उन्होंने लिखा कि एक पिता के लिए इससे बड़ा दुख कोई नहीं हो सकता कि उसे अपने बच्चे को अंतिम विदाई देनी पड़े। उन्होंने कहा कि कोई भी बेटा अपने पिता से पहले दुनिया से नहीं जाना चाहिए। अग्निवेश के बारे में बताते हुए उन्होंने लिखा कि वे रिकवर हो रहे थे और हमें लगा कि बुरा वक्त बीत चुका है, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे को अपना दोस्त, अपना गर्व और अपनी दुनिया बताया।

इस असीम दुख की घड़ी में भी अनिल अग्रवाल ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को याद रखा। उन्होंने अपने पोस्ट में उस वादे को दोहराया जो उन्होंने अपने बेटे ‘अग्नि’ से किया था। उन्होंने लिखा कि उनका और अग्निवेश का सपना था कि कोई बच्चा भूखा न सोए और हर महिला आत्मनिर्भर बने। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपनी कमाई का 75 प्रतिशत हिस्सा समाज को वापस लौटाएंगे। उन्होंने कहा कि वे अब और भी सादा जीवन जिएंगे और बेटे की विरासत को उन लोगों के जरिए जिंदा रखेंगे जिनके जीवन को अग्निवेश ने कभी न कभी और किसी न किसी रूप में प्रभावित किया था।

अग्निवेश अग्रवाल के आकस्मिक निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अनिल अग्रवाल के पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा कि अग्निवेश का असामयिक निधन अत्यंत चौंकाने वाला और दुखदायी है। पीएम मोदी ने कहा कि अनिल अग्रवाल की श्रद्धांजलि में उनके गहरे शोक की झलक साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने प्रार्थना की कि ईश्वर इस कठिन समय में अग्रवाल परिवार को शक्ति और साहस प्रदान करे।

अग्निवेश अग्रवाल का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था और उन्होंने अजमेर के प्रतिष्ठित मेयो कॉलेज से पढ़ाई की थी। वे वेदांता समूह की कई प्रमुख कंपनियों में अहम पदों पर रहे। अग्निवेश 2019 तक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के चेयरमैन रहे और उन्होंने भारत में माइनिंग (खनन) क्षेत्र को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी देखरेख में कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क स्थापित किए। इसके अलावा, उन्होंने फुजैराह गोल्ड की स्थापना की और वे इसके प्रेसिडेंट व मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे। वे तलवंडी साबो पावर लिमिटेड और मद्रास एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड के बोर्ड में भी शामिल थे।

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन ANIL AGARWAL आज भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली उद्योगपतियों में गिने जाते हैं। जुलाई 2025 की फोर्ब्स सूची के अनुसार लगभग 35,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ वे बिहार के सबसे अमीर व्यक्ति हैं और हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में 16वें स्थान पर हैं। 1954 में पटना के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे अनिल अग्रवाल ने 19 साल की उम्र में एक टिफिन और बिस्तर लेकर मुंबई का रुख किया। शुरुआती दौर में उन्होंने कई बिजनेस किए, लेकिन लगातार असफलताओं और आर्थिक तंगी के बावजूद हार नहीं मानी।

स्क्रैप कारोबार से शुरुआत कर 1976 में उन्होंने शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी खरीदी और यहीं से वेदांता की नींव पड़ी। 2001–02 में सरकार की विनिवेश नीति के तहत BALCO और हिंदुस्तान जिंक के अधिग्रहण ने उनके करियर को नई दिशा दी और वे ‘मेटल किंग’ के रूप में स्थापित हुए। 2003 में वेदांता को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कराकर उन्होंने वैश्विक पहचान बनाई। आज वेदांता दुनिया की प्रमुख मेटल कंपनियों में शामिल है और पिछले वर्षों में सरकार को भारी कर योगदान दे चुकी है। अनिल अग्रवाल अपनी सफलता का श्रेय पत्नी किरण अग्रवाल को देते हैं।

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