अमित शाह करेंगे अमरनाथ यात्रा की तैयारियों को लेकर बैठक, 15 दिन में हटाई जाएगी मार्ग की बर्फ

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AMARNATH YATRA 2023

UTTARAKHAND DEVBHOOMI DESK:कश्मीर में हिन्दू समुदाय के पवित्र स्थल अमरनाथ की पवित्र गुफा मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा(AMARNATH YATRA 2023) 1 जुलाई से शुरू होगी और 31 अगस्त तक चलेगी|  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद जम्मू-कश्मीर में आगामी अमरनाथ यात्रा की तैयारियों और सुरक्षा का स्थिति जानने के लिए शुक्रवार को एक हाई लेवल की बैठक की अध्यक्षता करने जा रहे हैं। गृह मंत्री जम्मू-कश्मीर के शीर्ष अधिकारियों के साथ अमरनाथ यात्रा की तैयारियों को मानिटर करेंगे।

अमित शाह  तीर्थ यात्रा के लिए पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र में चलाई जा रही योजनाओं की स्थिति का भी जायजा लेंगे| माना जा रहा कि इस बैठक में तीर्थयात्रा के सभी हितधारक भाग लेंगे। इसके अलावा बैठक में यात्रा के लिए की जा रही सभी व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

AMARNATH YATRA 2023

AMARNATH YATRA 2023:अमित शाह अमरनाथ यात्रा को मानिटर करेंगे

अमरनाथ यात्रा का ये क्षेत्र मुख्यतः सीमांत क्षेत्रों में एक है इस इलाके में पड़ोसी देश पाकिस्तान की तरफ से आतंकवादी गतिविधियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह  पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के द्वारा तीर्थयात्रा को बाधित नहीं करवाना चाहता हैं| क्षेत्र में मिली खुफिया जानकारी के अनुसार सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने का काम किया जा रहा है। इसके लिए AMARNATH YATRA 2023 के 62 दिनों के दौरान पर्याप्त सुरक्षा बलों की  तैनाती की जाएगी।

5 लाख यात्रियों के आने की उम्मीद

बता दें कि बीते साल करीब 3 लाख 45 हजार यात्रियों ने पवित्र गुफा के दर्शन किए थे और इस साल यह आंकड़ा 5 लाख तक जा सकता है। फिलहाल क्षेत्र में बालताल और पहलगाम दोनों ही मार्गों पर बर्फ पड़ी हुई है सरकार द्वारा सीमा सड़क संगठन को 15 जून तक बर्फ साफ करने का काम दिया गया है। किसी भी संभावित अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा की स्थिति से निपटने के लिए तीर्थयात्री शिविर स्थापित करने के लिए उचित स्थानों की पहचान शुरू कर दी गईं है और जल्द ही उन पर काम भी शुरू कर दिया जाएगा|

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इस साल AMARNATH YATRA 2023 के प्रारंभ होने से पहले प्रशासन द्वारा एक मॉक ड्रिल की जाएगी और दो महीने की यात्रा के दौरान नियमित अंतराल पर इसे दोहराया जाएगा।  इस ड्रिल का सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा की स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पहले ही  रहें और कम से कम समय  में नुकसान की भरपाई की जा सकती।