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बंगाल में BJP सरकार: पहले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भगवा पोशाक में ली शपथ, जानें क्या है इसके मायने?

9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हुई। SUVENDU ADHIKARI ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस शपथ ग्रहण के साथ ही पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के एक दशक से अधिक के शासन का अंत हुआ।

भगवा पोशाक में आए SUVENDU ADHIKARI, सोशल मीडिया पर छाई तस्वीरें

SUVENDU ADHIKARI ने शपथ ग्रहण समारोह में साधारण भगवा रंग का कुर्ता पहन रखा था और माथे पर तिलक भी लगाया हुआ था। भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में भगवा रंग को हिंदुत्व, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और पार्टी की वैचारिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है।

भारतीय परंपरा में भी यह रंग त्याग, तपस्या, बलिदान और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों ने SUVENDU ADHIKARI की इस पोशाक को केवल एक सामान्य परिधान नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर के प्रतीक के रूप में देखा। कई लोगों ने इसे “सैफ्रॉन वेव” यानी बंगाल में भाजपा की विचारधारा के मजबूत प्रवेश का दृश्य संकेत बताया।

टक्कर ममता बनर्जी की पारंपरिक सफेद साड़ी से

SUVENDU ADHIKARI की इस पोशाक का ज्यादा चर्चा में आना इसलिए भी है क्योंकि इसकी टक्कर ममता बनर्जी की पारंपरिक सफेद साड़ी से है, जिसे लंबे समय से सादगी और जनसामान्य की राजनीति का प्रतीक के रूप में टीएमसी ने प्रचारित किया है।

SUVENDU ADHIKARI
SUVENDU ADHIKARI

राज्य में चुनावी जीत के बाद कई जगहों पर विधानसभा और सरकारी इमारतों को भगवा रोशनी से सजाए जाने, बाजारों में कमल के आकार वाले संदेश और भगवा रंग के रसगुल्ले बिकने जैसी चीजों को भी राजनीतिक और सांस्कृतिक बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया। यह पूरा माहौल भाजपा की जीत को केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि वैचारिक विस्तार के रूप में प्रस्तुत करता दिखाई दिया।

SUVENDU ADHIKARI की राजनीतिक यात्रा

SUVENDU ADHIKARI की राजनीतिक यात्रा भी इस बदलाव का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। कभी तृणमूल कांग्रेस के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले सुवेंदु अब भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में उनकी भगवा पोशाक को कई लोगों ने उनके राजनीतिक परिवर्तन और बंगाल की बदलती सत्ता की तस्वीर से जोड़कर देखा।

15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर के करकुली में जन्में SUVENDU ADHIKARI एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता सिसिर अधिकारी पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। सुवेंदु ने अपनी राजनीतिक शुरुआत 1995 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की, फिर 1998-2000 के आसपास तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए।

उन्होंने 2006 में कांथी दक्षिण से विधायक बने और नंदीग्राम आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो 2011 में टीएमसी की सत्ता में आने का बड़ा कारण बना। वे टीएमसी में कैबिनेट मंत्री भी रहे, पर 2020 में भाजपा में शामिल हो गए। 2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था। 2026 में उन्होंने भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों से जीत हासिल की।

ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह

यह शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और अन्य नेता मौजूद रहे। राज्यपाल आर.एन. रवि ने SUVENDU ADHIKARI और पांच अन्य विधायकों दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक किर्तनिया, क्षुदिराम टुडू तथा निशीथ प्रामाणिक को शपथ दिलाई।

बंगाल में SUVENDU ADHIKARI की भाजपा की सरकार

बंगाल में भाजपा की सरकार का गठन राजनीतिक तनाव और कई चुनौतियों के बीच हुआ। चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य के कुछ हिस्सों में हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं। वहीं ममता बनर्जी ने शुरुआती दौर में चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए रीगिंग और गड़बड़ी के आरोप लगाए थे।

हालांकि तमाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नई सरकार का गठन हो गया। शपथ लेने के बाद SUVENDU ADHIKARI द्वारा जोरासांको ठाकुरबाड़ी जाकर प्रार्थना करने की बात को भी खास तौर पर देखा गया, क्योंकि यह बंगाल की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।

SUVENDU ADHIKARI
SUVENDU ADHIKARI

आगे की राहें 

SUVENDU ADHIKARI सरकार ने राज्य में विकास, बेहतर कानून-व्यवस्था, रोजगार और प्रशासनिक सुधार को अपनी प्राथमिकता बताया है। भाजपा के घोषणापत्र और पार्टी नेताओं के बयानों में भी लगातार इस बात पर जोर दिया गया कि बंगाल को आर्थिक रूप से मजबूत करने, निवेश बढ़ाने, शिक्षा व्यवस्था सुधारने और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर फोकस किया जाएगा।

पिछले कुछ वर्षों में राज्य में बेरोजगारी, उद्योगों की कमी, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। भाजपा ने इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की। इस पूरी रणनीति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं की सक्रिय भूमिका रही।

पीएम मोदी द्वारा 98 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता माखनलाल सरकार के चरण स्पर्श

शपथ ग्रहण समारोह की कुछ तस्वीरें और दृश्य भी काफी चर्चा में रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 98 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता माखनलाल सरकार के चरण स्पर्श करने की घटना को पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान और संगठनात्मक संस्कृति के प्रतीक के तौर पर देखा गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की छोटी लेकिन प्रतीकात्मक घटनाएं जनता तक बड़ा संदेश पहुंचाने का काम करती हैं।

तृणमूल कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का समय

इस राजनीतिक परिवर्तन का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। बंगाल जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में भाजपा की सरकार बनने से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को नई मजबूती मिलने की चर्चा है।

दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन और नई रणनीति तैयार करने का समय माना जा रहा है। विपक्षी दल भी अब बंगाल की बदली राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तय करेंगे।

-अभिषेक सेमवाल

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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