/ Mar 20, 2026
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PETROL PRICE HIKE: वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के बीच भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आज एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। 20 मार्च की सुबह से देश भर में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में ₹2.35 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों ने मिलकर आम आदमी की जेब का ख्याल रखते हुए सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों को यथावत रखने का फैसला किया है।
इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) द्वारा जारी नई मूल्य सूची के अनुसार, उच्च ऑक्टेन वाले ईंधन वेरिएंट्स जैसे XP95, स्पीड (Speed), और पावर (Power) की कीमतों में ₹2.09 से ₹2.35 तक का इजाफा हुआ है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली जैसे महानगरों में प्रीमियम पेट्रोल की कीमत ₹101 प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह निर्णय “लक्षित मूल्य संशोधन” (Targeted Price Revision) का हिस्सा है। चूंकि प्रीमियम पेट्रोल की खपत देश की कुल ईंधन खपत का मात्र 2% से 4% है और इसका उपयोग मुख्य रूप से लग्जरी वाहनों में होता है, इसलिए इसका असर आम जनता या आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई पर नहीं पड़ेगा।(PETROL PRICE HIKE)

मध्यम वर्ग और परिवहन क्षेत्र के लिए राहत की खबर यह है कि सामान्य पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नई दिल्ली: सामान्य पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 पर स्थिर है।
मुंबई: यहाँ पेट्रोल ₹103.54 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
बेंगलुरु और हैदराबाद: दक्षिण भारत के इन प्रमुख शहरों में भी कीमतें पिछले स्तर पर ही बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य ईंधन के दाम स्थिर रखकर सरकार ने महंगाई दर (Inflation) को नियंत्रित रखने का प्रयास किया है, क्योंकि डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर रसद (Logistics) और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ता है।
प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में इस अचानक उछाल के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण बेहद गंभीर हैं। फरवरी और मार्च 2026 के दौरान मध्य पूर्व (West Asia) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का अवरोध: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल की आवाजाही बाधित हुई है। ज्ञात हो कि दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से गुजरता है।
ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले: कतर और सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों पर हालिया हमलों की खबरों ने बाजार में डर का माहौल पैदा कर दिया, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें $119 प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक जा पहुँचीं।
रिफाइनिंग लागत: प्रीमियम पेट्रोल (95 ऑक्टेन और उससे अधिक) को रिफाइन करने की प्रक्रिया सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक खर्चीली और जटिल होती है। कच्चे तेल के महंगे होने का सबसे पहला और बड़ा प्रहार इसी श्रेणी पर हुआ है।(PETROL PRICE HIKE)
जहाँ रिटेल ग्राहकों को डीजल पर राहत मिली है, वहीं औद्योगिक क्षेत्र के लिए खबरें अच्छी नहीं हैं। थोक (Bulk) में खरीदे जाने वाले औद्योगिक डीजल की कीमतों में ₹22 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर भारी उद्योगों, बिजली संयंत्रों और निजी रेल ऑपरेटरों पर पड़ने की संभावना है।
दूसरी ओर, इस मूल्य संशोधन का सकारात्मक असर शेयर बाजार पर दिखा। प्रीमियम श्रेणी में मार्जिन सुधरने की उम्मीद में IOCL, BPCL और HPCL के शेयरों में आज 3% से 4% तक की तेजी दर्ज की गई। निवेशकों को भरोसा है कि कंपनियां अपनी लागत का बोझ आंशिक रूप से ग्राहकों पर डालकर घाटे को कम करने में सफल रहेंगी।(PETROL PRICE HIKE)

ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक तनाव अगले दो हफ्तों तक कम नहीं हुआ, तो ओएमसी (OMCs) के लिए सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि, भारत सरकार ने रूस और अन्य गैर-ओपेक देशों से कच्चे तेल के आयात के नए रास्ते खोलकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। वर्तमान में भारत के पास लगभग 70 दिनों का सामरिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) मौजूद है, जो किसी भी अल्पकालिक संकट से निपटने के लिए पर्याप्त है।(PETROL PRICE HIKE)
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