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चमोली के कोठली गांव की 96 वर्षीया अमृति देवी ने की वृंदावन की यात्रा, पोते ने पूरी की दादी की बरसों पुरानी इच्छा

CHAMOLI NEWS: उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के सुदूरवर्ती ग्राम कोठली में भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के प्रति सेवा भाव का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। यहां की निवासी 96 वर्षीया बुजुर्ग महिला अमृति देवी जी ने हाल ही में वृंदावन धाम की यात्रा संपन्न की है। जीवन के इस पड़ाव पर जब शारीरिक क्षमताएं साथ छोड़ने लगती हैं, तब ईश्वर के दर्शन की अभिलाषा और परिजनों का सहयोग ही संबल बनता है। अमृति देवी की इस इच्छा को पूरा करने का बीड़ा उनके पोते आचार्य जनार्दन प्रसाद सती ने उठाया, जो आज के दौर में नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक प्रसंग बन गया है।

CHAMOLI NEWS: दादी की इच्छा और पोते का संकल्प

कोठली निवासी 96 वर्षीया अमृति देवी के मन में पिछले कई वर्षों से भगवान श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन जाकर दर्शन करने की तीव्र इच्छा थी। वृद्धावस्था के कारण इतनी लंबी यात्रा करना आसान नहीं था, लेकिन उनकी आस्था और संकल्प के आगे उम्र की बाधाएं छोटी पड़ गईं। उनकी इस धार्मिक अभिलाषा को वास्तविकता के धरातल पर उतारने का कार्य उनके पोते आचार्य जनार्दन प्रसाद सती ने किया। उन्होंने अपनी दादी को वृंदावन ले जाने का निर्णय लिया और पूरी यात्रा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई। 

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यात्रा में साथ रहे अनुज और श्रद्धालु

इस पुण्य यात्रा में आचार्य जनार्दन प्रसाद सती अकेले नहीं थे, बल्कि उनके साथ उनके छोटे अनुज अरविंद त्रिपाठी भी सहयोग के लिए तत्पर रहे। इसके अतिरिक्त चार अन्य श्रद्धालु भी इस दल का हिस्सा बने। इन सभी ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि 96 वर्षीया अमृति देवी को यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। सामूहिक रूप से की गई इस यात्रा ने न केवल अमृति देवी की इच्छा पूरी की, बल्कि साथ गए अन्य लोगों को भी सेवा और पुण्य कमाने का अवसर प्रदान किया। (CHAMOLI NEWS)

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क्षेत्र में हर्ष और श्रद्धा का माहौल

अमृति देवी की वृंदावन यात्रा के की सूचना जैसे ही ग्राम कोठली और आसपास के क्षेत्र में पहुंची, वहां हर्ष और श्रद्धा का वातावरण बन गया। ग्रामवासियों ने इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के आधुनिक दौर में, जहां अक्सर बुजुर्गों की अनदेखी की खबरें सुनने को मिलती हैं, वहां कोठली गांव से आया यह समाचार मन को सुकून देने वाला है। यह घटनाक्रम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे भारतीय संस्कारों की जीत के रूप में देख रहे हैं। गांव के लोगों ने इसे नई पीढ़ी द्वारा बुजुर्गों की सेवा और संस्कारों के सम्मान का एक प्रत्यक्ष प्रमाण माना है।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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