HARIDWAR ARDH KUMBH 2027: उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ मेले की तिथियों की घोषणा कर दी गई है। राज्य सरकार और संत समाज के बीच बनी सहमति के बाद यह तय किया गया है कि यह धार्मिक समागम 14 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति के पावन पर्व के साथ विधिवत शुरू होगा। मेले की अवधि के दौरान कुल 10 मुख्य स्नान तिथियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें से 4 तिथियों को ‘शाही स्नान’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया है।

HARIDWAR ARDH KUMBH 2027: 14 जनवरी से शुरू होगा और 20 अप्रैल को खत्म होगा
बैठक में तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार, अर्धकुंभ 2027 का पहला शाही स्नान 14 जनवरी 2027 (मकर संक्रांति) को संपन्न होगा। अखाड़ों की सहमति से निर्धारित अन्य प्रमुख शाही स्नानों में मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और महाशिवरात्रि के पर्व शामिल हैं। वर्ष 2027 के पंचांग और बैठक के निर्णय के अनुसार, दूसरा शाही स्नान मौनी अमावस्या (फरवरी माह में), तीसरा बसंत पंचमी और चौथा महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। इन चार विशेष तिथियों पर विभिन्न अखाड़ों के नागा संन्यासी और साधु-संत अपनी पारंपरिक ‘पेशवाई’ और राजसी ठाठ-बाट के साथ हर की पौड़ी स्थित ब्रह्मकुंड में स्नान करेंगे।

शाही स्नानों के अतिरिक्त, छह अन्य महत्वपूर्ण पर्वों पर भी ‘मुख्य स्नान’ आयोजित होंगे, जिन्हें मिलाकर कुल स्नान तिथियों की संख्या 10 हो जाती है। मेला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, इन अन्य प्रमुख स्नानों में पौष पूर्णिमा, गणेश जयंती (माघ शुक्ल चतुर्थी), माघ पूर्णिमा, जया एकादशी, और फाल्गुन मास की प्रमुख तिथियां शामिल हैं। इन तिथियों पर शाही जुलूस नहीं निकलता, लेकिन देश-विदेश से आने वाले सामान्य श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना रहती है। प्रशासन ने इन सभी 10 दिनों के लिए विशेष यातायात और स्नान व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि अर्धकुंभ मेले के लिए सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं। उन्होंने जोर दिया कि मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल और श्रद्धालुओं के ठहरने के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अखाड़ों के संतों और आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन को अभी से ‘जीरो एरर’ कार्ययोजना बनाकर काम करना होगा। भीड़ प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है।

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