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बाइपोलर डिसऑर्डर: लक्षणों से लेकर इलाज तक, जानें इस मानसिक विकार का हर पहलू!

BIPOLAR DISORDER एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है, जिसमें व्यक्ति के मूड, ऊर्जा और गतिविधि स्तर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसे मूड डिसऑर्डर भी कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति मुख्य रूप से दो अवस्थाओं के बीच बदलता रहता है। इनमें से पहली अवस्था को मैनीक एपिसोड में व्यक्ति अत्यधिक खुश, उत्साहित और उत्तेजित महसूस करता है। दूसरी अवस्था डिप्रेसिव एपिसोड कहलाती है, जिसमें व्यक्ति अत्यधिक उदास, हताश और ऊर्जा रहित महसूस करता है।

BIPOLAR DISORDER
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BIPOLAR DISORDER के प्रकार 

बाइपोलर डिसऑर्डर के तीन मुख्य प्रकार होते हैं। बाइपोलर I में व्यक्ति को कम से कम एक बार मैनीक एपिसोड का अनुभव होता है और कुछ मामलों में डिप्रेसिव एपिसोड भी होते हैं। बाइपोलर II में व्यक्ति को हाइपोमेनिया, जो कि मैनिक एपिसोड का एक हल्का रूप होता है, और साथ ही प्रमुख डिप्रेसिव एपिसोड का सामना करना पड़ता है। तीसरे प्रकार को साइक्लोथाइमिक डिसऑर्डर कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति को हल्की मैनिक और हल्की डिप्रेसिव अवस्थाएं होती हैं।

BIPOLAR DISORDER
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BIPOLAR DISORDER के लक्षण 

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण इन दो अवस्थाओं के दौरान अलग-अलग होते हैं।

  • मैनीक एपिसोड में व्यक्ति अत्यधिक ऊर्जा और उत्साह महसूस करता है, जरूरत से ज्यादा बातें करता है, उसे नींद की कमी हो जाती है, और वह जोखिम भरे निर्णय लेने लगता है।
  • साथ ही, इस अवस्था में व्यक्ति का आत्म-विश्वास भी अवास्तविक रूप से बढ़ जाता है।
  • वहीं, डिप्रेसिव एपिसोड में व्यक्ति उदासी और निराशा में घिर जाता है, उसकी ऊर्जा की कमी हो जाती है, वह रोजमर्रा की गतिविधियों में रुचि खो देता है, और कभी-कभी आत्महत्या के विचार भी उसके मन में आ सकते हैं।
BIPOLAR DISORDER
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BIPOLAR DISORDER के कारण 

इस विकार के कारण कई जोखिम कारकों से जुड़े होते हैं।

  • आनुवांशिकता इसके मुख्य कारणों में से एक है; यदि किसी व्यक्ति के परिवार के सदस्यों को यह समस्या है, तो उसके खुद इससे ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • मस्तिष्क में असामान्य रासायनिक असंतुलन भी इसका एक बड़ा कारण हो सकता है।
  • न्यूरोट्रांसमीटर जैसे सेरोटोनिन और डोपामिन के असंतुलन से बाइपोलर डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है।
  • मनोवैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारक जैसे तनाव, आघात या बड़े जीवन परिवर्तनों से भी इस विकार की शुरुआत हो सकती है।
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बाइपोलर डिसऑर्डर का इलाज संभव

बाइपोलर डिसऑर्डर का इलाज संभव है, और इसके प्रबंधन के लिए कई विधियों का सहारा लिया जा सकता है। इस विकार के इलाज में दवाइयों का उपयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मूड स्टेबलाइजर्स, एंटीडिप्रेसेंट्स और एंटीसाइकोटिक दवाइयों का इस्तेमाल लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा, मनोचिकित्सा भी इस विकार के उपचार में सहायक होती है।

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संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT) जैसी साइकोथेरेपी व्यक्ति को उसके विचारों और भावनाओं को समझने और उन्हें संभालने में मदद करती है। जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव लाकर भी इस विकार का प्रबंधन किया जा सकता है, जैसे कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, और पर्याप्त नींद लेना। परिवार और दोस्तों का साथ तथा सपोर्ट ग्रुप्स में शामिल होना व्यक्ति को इस विकार का सामना करने में मददगार साबित हो सकता है।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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