कथा के अनुसार, कात्यायनी का जन्म महर्षि कात्यायन के घर हुआ था। महर्षि कात्यायन, जो कि एक महान ऋषि थे, ने देवी दुर्गा की आराधना की थी ताकि उन्हें एक पुत्री की प्राप्ति हो। माँ कात्यायनी ने राक्षस महिषासुर के नाश के लिए अवतार लिया। महिषासुर एक शक्तिशाली राक्षस था, जिसने देवताओं को परेशान किया और स्वर्ग को अपने अधीन कर लिया। उसकी शक्ति से देवता भयभीत थे और उन्होंने माँ दुर्गा की शरण ली।

जब माँ कात्यायनी ने अवतार लिया, तो उन्होंने महिषासुर से युद्ध करने का निर्णय लिया। देवी ने विभिन्न देवताओं से शक्तियाँ प्राप्त कीं और एक सुंदर रूप धारण किया। उन्होंने महिषासुर से युद्ध किया, जो कई रूपों में परिवर्तन करके उन्हें पराजित करने का प्रयास कर रहा था। लेकिन माँ कात्यायनी ने अपनी शक्ति और साहस के माध्यम से महिषासुर को पराजित किया और अंततः उसका वध किया। इस प्रकार, माँ कात्यायनी ने देवी दुर्गा के रूप में बुराई का नाश किया और मानवता को सुरक्षित किया।

माँ कात्यायनी की ऐसे करें पूजा और ये है मुहूर्त
मां कात्यायनी की उपासना करने से भक्तों को शांति, शक्ति, और भक्ति का अनुभव होता है। इस दिन विशेष रूप से भक्त उनकी कृपा पाने के लिए उनकी विधिवत पूजा करते हैं। पूजा का शुभ मुहूर्त नवरात्रि के दौरान बहुत महत्वपूर्ण होता है, और भक्त इसे ध्यान में रखते हुए अपने अनुष्ठान करते हैं।
- पूजन विधि में सबसे पहले भक्त को स्नान करके साफ वस्त्र पहनने चाहिए।
- फिर एक पवित्र स्थान पर मां कात्यायनी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- इसके बाद दीपक जलाएं और मां को सफेद फूल, फल, और मिठाई अर्पित करें।
- भक्तों को इस दिन उपवासी रहकर मां की आराधना करनी चाहिए।
- पूजा के दौरान देवी के मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है।

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नवरात्रि के छठे दिन पूजा का शुभ मुहूर्त विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस वर्ष, नवरात्रि के छठे दिन पूजा का शुभ समय सुबह 10:58 बजे से शुरू होगा और इसका समापन 11 अक्टूबर को सुबह 09:08 बजे होगा। पूजा का समय, जो दोपहर 01:17 से 03:35 बजे के बीच है, को बेहद शुभ माना जाता है। इस समय में मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

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