Adani Group से जुड़े लंबे समय से चल रहे मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग यानी MPS मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के ताजा आदेश से समूह को बड़ी राहत मिली है। बाजार नियामक ने गौतम अडानी, चार अडानी समूह की कंपनियों और उनसे जुड़े कई अधिकारियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही को निपटा दिया है। इस मामले में कुल 1.48 करोड़ रुपये की सेटलमेंट राशि का भुगतान किया गया है। हालांकि, यह निपटारा आरोपों को स्वीकार या खारिज किए बिना किया गया है।
Adani की किन कंपनियों से जुड़ा था मामला?
SEBI की कार्रवाई Adani Enterprises, Adani Power, Adani Ports and Special Economic Zone (APSEZ) और तत्कालीन Adani Transmission, जिसे अब Adani Energy Solutions के नाम से जाना जाता है, से जुड़ी थी।
नियामक के मुताबिक इन कंपनियों के शेयरहोल्डिंग पैटर्न और न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी से जुड़े नियमों के कथित अनुपालन को लेकर जांच शुरू की गई थी। मामले में गौतम अडानी समेत संबंधित कंपनियों के निदेशक और कुछ अन्य अधिकारी भी कार्यवाही के दायरे में थे।
क्या है Minimum Public Shareholding नियम?
Minimum Public Shareholding यानी MPS नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी सूचीबद्ध कंपनी के शेयरों का एक न्यूनतम हिस्सा सार्वजनिक निवेशकों के पास रहे। भारत में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए सामान्य तौर पर कम से कम 25 फीसदी सार्वजनिक हिस्सेदारी रखने की आवश्यकता होती है।
इस व्यवस्था का मकसद शेयर बाजार में पर्याप्त सार्वजनिक फ्लोट बनाए रखना और निवेशकों के लिए शेयरों की खरीद-बिक्री में बेहतर तरलता सुनिश्चित करना है। प्रमोटर समूह के पास अत्यधिक हिस्सेदारी होने की स्थिति में सार्वजनिक निवेशकों के लिए उपलब्ध शेयरों की संख्या कम हो सकती है।
2020 में शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच
SEBI को अडानी समूह की कुछ सूचीबद्ध कंपनियों की सार्वजनिक हिस्सेदारी से जुड़े मामलों में 2020 में शिकायतें मिली थीं। इसके बाद नियामक ने 23 अक्टूबर 2020 को प्रारंभिक जांच शुरू की।
जांच पूरी होने के बाद SEBI ने सितंबर 2024 में शो-कॉज नोटिस जारी किया। इसके बाद मार्च 2025 में एक supplementary show-cause notice भी जारी किया गया। इन नोटिसों में Securities Contracts (Regulation) Rules, पुराने Listing Agreement और SEBI के Listing Obligations and Disclosure Requirements यानी LODR नियमों से जुड़े कथित उल्लंघनों का उल्लेख था।
1.48 करोड़ रुपये में हुआ सेटलमेंट
SEBI के settlement order के तहत चारों कंपनियों और संबंधित आवेदकों ने कुल करीब 1.482 करोड़ रुपये का भुगतान किया। रिपोर्ट के मुताबिक चार समूहों के लिए करीब 37.05 लाख रुपये प्रत्येक की संयुक्त राशि तय हुई थी।
महत्वपूर्ण बात यह है कि settlement का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित पक्षों ने SEBI के आरोपों को स्वीकार कर लिया। नियामक के आदेश के मुताबिक कार्यवाही को बिना आरोपों या कानूनी निष्कर्षों को स्वीकार या अस्वीकार किए समाप्त किया गया। भुगतान 26 अगस्त 2026 को किया गया था।
विनोद Adani से जुड़े आरोपों पर भी स्थिति साफ
इसी व्यापक मामले में विनोद अडानी से जुड़े आरोप भी जांच के दायरे में थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक SEBI की जांच में उनके खिलाफ कुछ प्रमुख आरोप पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं हुए। खास तौर पर दो विदेशी फंडों पर नियंत्रण से जुड़े आरोपों के संबंध में पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई है।
हालांकि, SEBI ने मामले से जुड़े कुछ अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की है। Nasser Ali Shaban Ahli और Chang Chung-Ling पर अधूरी या सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के लिए 20-20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
Adani समूह के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अडानी समूह लंबे समय से अलग-अलग नियामकीय और बाजार संबंधी जांचों के केंद्र में रहा है। 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलर Hindenburg Research की रिपोर्ट के बाद समूह की कंपनियों और शेयरहोल्डिंग संरचना को लेकर कई सवाल उठे थे। उसके बाद SEBI ने अलग-अलग पहलुओं की जांच की।
MPS मामले का निपटारा समूह के लिए एक अलग नियामकीय प्रक्रिया के समापन को दर्शाता है। हालांकि, इसे अडानी समूह से जुड़े सभी नियामकीय मामलों का अंत नहीं माना जा सकता, क्योंकि अन्य मामलों में अलग-अलग जांच और कार्यवाहियां जारी रही हैं।
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SEBI के फैसले का निवेशकों के लिए क्या मतलब?
इस आदेश से संबंधित चार कंपनियों के खिलाफ MPS मामले की कार्यवाही समाप्त हो गई है। लेकिन settlement order को इस रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि SEBI ने हर आरोप पर विस्तृत मेरिट-आधारित क्लीन चिट दी है। इस मामले में भुगतान के जरिए proceedings का निपटारा हुआ है और आरोपों को स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया गया।
वहीं, जहां SEBI ने जांच में आरोपों को पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं पाया, वहां संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी। इस अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि “सेटलमेंट” और “आरोपों से पूरी तरह मुक्त होना” कानूनी रूप से एक ही बात नहीं हैं।
ताजा आदेश से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अडानी समूह की चार कंपनियों और संबंधित पक्षों से जुड़ी MPS कार्यवाही का यह चरण SEBI के सामने समाप्त हो गया है।

