पंजाब की Lovely Professional University (LPU) में छात्र विरोध और हिंसा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने आरोप लगाया है कि LPU को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया और विश्वविद्यालय के संस्थापक-चांसलर अशोक मित्तल के BJP में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने यूनिवर्सिटी पर दबाव बढ़ाया।
चन्नी ने पुलिस की भूमिका और छात्रों के साथ कथित मारपीट पर भी सवाल उठाए। हालांकि, उनके लगाए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
चन्नी ने क्या आरोप लगाए?
चन्नी ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि LPU परिसर में बाहर से लोग आए और हिंसा में शामिल हुए। उन्होंने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि कथित तौर पर बाहरी लोगों की मौजूदगी और हिंसा की जांच होनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मित्तल के BJP में जाने के बाद AAP सरकार ने विश्वविद्यालय को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर विश्वविद्यालय को करीब 100 करोड़ रुपये के नुकसान की खबरें सामने आई हैं तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी होगी।
हालांकि, चन्नी ने खुद भी स्पष्ट किया कि 100 करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा उन्हें रिपोर्टों के जरिए मिला है और वह इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकते।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल
चन्नी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ छात्रों के साथ गंभीर मारपीट हुई और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर किसी छात्रा के साथ यौन अपराध हुआ था, तो तत्काल FIR और मेडिकल रिपोर्ट जैसी कानूनी प्रक्रिया क्यों नहीं हुई। LPU में प्रदर्शन की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित यौन उत्पीड़न और छात्रा की मौत से जुड़े दावों के बाद हुई थी। इन दावों की पुष्टि को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं।
LPU में कैसे शुरू हुआ विवाद?
LPU में विरोध प्रदर्शन रविवार से उस समय तेज हुआ जब एक छात्रा से कथित बलात्कार और उसकी मौत से जुड़ा दावा सोशल मीडिया पर फैलने लगा। विश्वविद्यालय और प्रशासन की ओर से इन दावों की सत्यता को लेकर अलग-अलग स्तर पर जांच की बात सामने आई।
इसके बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने परिसर में प्रदर्शन किया। मामला धीरे-धीरे हिंसक हो गया और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी। रिपोर्टों के मुताबिक वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं तथा पुलिस पर पथराव भी किया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय में सुरक्षा बढ़ा दी गई।
LPU में 10 दिन के लिए कक्षाएं बंद, परीक्षाएं स्थगित
हिंसा के बाद LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं निलंबित कर दीं। विश्वविद्यालय ने मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक स्थगित कर दी हैं।
कई छात्र अपने घर लौटने लगे, जबकि परिसर में रहने वाले छात्रों को सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए गए। पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में जवान तैनात किए। रिपोर्टों के मुताबिक 2,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
‘बाहरी लोगों’ के आरोप पर पुलिस ने क्या कहा?
चन्नी समेत कुछ राजनीतिक नेताओं ने दावा किया कि बाहर से आए लोगों ने परिसर में हिंसा को बढ़ावा दिया। लेकिन पंजाब पुलिस ने ऐसे दावों पर अलग तस्वीर पेश की है।
पुलिस के मुताबिक, परिसर में वॉकी-टॉकी लेकर दिखाई देने वाले कुछ लोगों की पहचान भारतीय सेना के अधिकारियों के रूप में हुई। पुलिस ने कहा कि वे एक सेना अधिकारी के बच्चे को लेने के लिए परिसर में मौजूद थे और उन्हें बाहरी उपद्रवी नहीं माना गया। मामले की अन्य पहलुओं की जांच के लिए पुलिस ने Special Investigation Team (SIT) भी गठित की है।
पूर्व डिप्टी CM रंधावा ने भी सरकार पर उठाए सवाल
पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी LPU मामले में सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रशासन को छात्रों के सड़क पर उतरने के बाद तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए था।
रंधावा ने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि छात्रों का आंदोलन किसी AAP कार्यक्रम को बाधित करने के उद्देश्य से था। उन्होंने कहा कि छात्रों को इस तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए।
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राजनीतिक आरोपों के बीच जांच पर नजर
LPU विवाद अब केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहा है। एक ओर छात्र सुरक्षा, कथित यौन अपराध के दावों और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर घटना को राजनीतिक रंग देने के आरोप लगा रहे हैं।
चन्नी का आरोप है कि मित्तल के BJP में जाने के बाद विश्वविद्यालय को निशाना बनाया गया, जबकि पुलिस ने बाहरी लोगों से जुड़े कुछ दावों पर स्पष्टीकरण दिया है। ऐसे में SIT की जांच और उपलब्ध CCTV, डिजिटल साक्ष्यों तथा अन्य सबूतों से यह स्पष्ट होना बाकी है कि हिंसा की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार थे।
फिलहाल प्रशासन के सामने प्राथमिक चुनौती परिसर में शांति बनाए रखने, छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच पूरी करने की है।

