Indian Navy 2026 के दूसरे Commanders’ Conference की मेजबानी नई दिल्ली में करने जा रही है। नौसेना का यह शीर्ष स्तर का द्विवार्षिक सम्मेलन समुद्री सुरक्षा, ऑपरेशनल तैयारियों, नई तकनीकों, स्वदेशीकरण और हिंद महासागर क्षेत्र में बदलती रणनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच होगा। सम्मेलन में नौसेना के वरिष्ठ कमांडर और शीर्ष नेतृत्व भाग लेंगे तथा भविष्य की परिचालन और क्षमता विकास संबंधी प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
इस साल नौसेना के पहले Commanders’ Conference का आयोजन अप्रैल में नई दिल्ली स्थित नौसेना भवन में हुआ था। उस सम्मेलन में operational preparedness, capability development, logistics, training, human resources और emerging technologies जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।
समुद्री सुरक्षा पर रहेगा खास फोकस
नौसेना के Commanders’ Conference का मुख्य उद्देश्य देश की समुद्री सुरक्षा से जुड़े मौजूदा और उभरते खतरों की समीक्षा करना है। हिंद महासागर क्षेत्र भारत की समुद्री रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है और यहां बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच नौसेना की मौजूदगी तथा तैयारियों को लेकर लगातार समीक्षा की जाती है।
अप्रैल में हुए सम्मेलन में नौसेना प्रमुख ने बदलते भू-रणनीतिक माहौल और समुद्री सुरक्षा की बढ़ती जटिलताओं के बीच combat readiness पर जोर दिया था। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रही थी।
ऑपरेशनल रेडीनेस और भविष्य की तैयारियों पर चर्चा
दूसरे सम्मेलन में नौसेना की operational readiness का व्यापक आकलन किए जाने की उम्मीद है। इसमें विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में तैनात बलों की तैयारियों, लॉजिस्टिक्स, रखरखाव, प्रशिक्षण और संसाधनों की उपलब्धता जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।
नौसेना के लिए तेजी से बदलता युद्ध का स्वरूप भी महत्वपूर्ण चुनौती है। आधुनिक संघर्ष अब केवल पारंपरिक युद्धपोत और मिसाइलों तक सीमित नहीं हैं। ड्रोन, साइबर सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली और अन्य unmanned platforms सैन्य अभियानों का हिस्सा बन रहे हैं।
अप्रैल के सम्मेलन में भी नौसेना नेतृत्व ने emerging technologies को अपनाकर Future Ready Force तैयार करने पर जोर दिया था।
AI और अनमैन्ड सिस्टम पर बढ़ेगा जोर
भारतीय नौसेना अपनी operational क्षमता बढ़ाने के लिए Artificial Intelligence और data-driven technologies के इस्तेमाल पर काम कर रही है। पहले Commanders’ Conference में Pan-Navy AI roadmap और seamless operations के लिए data-based technologies की समीक्षा का प्रावधान था।
इसके अलावा uncrewed systems यानी बिना चालक वाले प्लेटफॉर्म भी नौसैनिक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे सिस्टम निगरानी, reconnaissance और अन्य मिशनों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। सम्मेलन में इन तकनीकों की operational utility और उन्हें व्यापक रूप से शामिल करने की दिशा पर चर्चा महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
Tri-Service Coordination भी एजेंडे में
आधुनिक युद्ध में Army, Navy और Air Force के बीच बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नौसेना के पिछले सम्मेलन में Chief of Defence Staff ने तेजी से बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए planning और jointness पर जोर दिया था।
ऐसे में Commanders’ Conference में तीनों सेनाओं के बीच interoperability, संयुक्त अभियानों और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से जुड़े मुद्दों पर भी विचार हो सकता है। इसका उद्देश्य विभिन्न सैन्य शाखाओं की क्षमताओं को एकीकृत तरीके से इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ना है।
आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक पर जोर
नौसेना के लिए indigenisation और Aatmanirbharta भी लगातार प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है। युद्धपोतों, हथियार प्रणालियों, सेंसर, संचार उपकरणों और अन्य सैन्य तकनीकों के घरेलू विकास पर जोर दिया जा रहा है।
पहले सम्मेलन में innovation और indigenisation के साथ capability enhancement तथा maintenance और refit से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की गई थी। दूसरे सम्मेलन में भी स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने और भविष्य की नौसैनिक जरूरतों के लिए घरेलू रक्षा उद्योग के साथ तालमेल पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।
हिंद महासागर में भारत की भूमिका
भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान देती है। नौसेना ने Friendly Foreign Countries के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यासों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को अपनी रणनीति का हिस्सा बताया है।
Commanders’ Conference में क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों, समुद्री सहयोग और भारत की भूमिका की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है। नौसेना का व्यापक लक्ष्य हिंद महासागर और Indo-Pacific क्षेत्र में एक विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करना है।
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बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक
नई दिल्ली में होने वाला दूसरा Commanders’ Conference ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। सम्मेलन के दौरान नौसेना नेतृत्व operational preparedness, नई तकनीक, संयुक्त अभियानों, स्वदेशीकरण और संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल को लेकर आगे की दिशा तय करेगा।
पहले सम्मेलन में जिन क्षेत्रों—combat readiness, emerging technologies, logistics, training, AI और indigenisation—को प्राथमिकता दी गई थी, उनके आधार पर दूसरा सम्मेलन नौसेना की दीर्घकालिक क्षमता और भविष्य की तैयारियों के लिए रणनीतिक दिशा तय करने वाला मंच बन सकता है।

