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फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने से पहले दूर करें अपनी उलझन, समझें Sweep-in FD और Normal FD का पूरा गणित

Sweep-in FD vs Normal FD का सवाल अक्सर उन लोगों के मन में आता है, जो अपनी बचत पर अच्छा ब्याज भी चाहते हैं और जरूरत पड़ने पर पैसा तुरंत निकालने की सुविधा भी। दोनों ही बैंक की सुरक्षित योजनाएं हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका काफी अलग है। गलत विकल्प चुनने पर या तो ब्याज का नुकसान होता है या जरूरत के समय पैसा फंस जाता है।

नॉर्मल एफडी क्या होती है?

नॉर्मल एफडी में आप एक तय रकम को तय समय के लिए बैंक में जमा करते हैं। बदले में बैंक पहले से तय ब्याज दर देता है, जो पूरी अवधि तक नहीं बदलती। अवधि 7 दिन से लेकर 10 साल तक हो सकती है। मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालने पर ज्यादातर बैंक पेनल्टी काटते हैं, जो आमतौर पर 0.5 से 1 प्रतिशत तक होती है।

Sweep-in FD क्या होती है?

यह आपके सेविंग्स या करंट अकाउंट से जुड़ी एक सुविधा है। आप एक सीमा तय करते हैं और उससे ऊपर का पैसा अपने आप एफडी में बदल जाता है, जिस पर एफडी जितना ब्याज मिलता है। जब खाते में बैलेंस सीमा से कम हो जाता है, तो बैंक जरूरत के हिसाब से एफडी का उतना हिस्सा तोड़कर पैसा वापस खाते में डाल देता है। इसे रिवर्स स्वीप कहा जाता है। इस सुविधा को अलग अलग बैंक ऑटो स्वीप, मनी मल्टीप्लायर या मल्टी ऑप्शन डिपॉजिट जैसे नामों से पेश करते हैं।

Sweep-in FD vs Normal FD: मुख्य अंतर

पैसे की उपलब्धता Sweep-in FD में पैसा हमेशा आपके खाते से जुड़ा रहता है और डेबिट कार्ड, यूपीआई या चेक से कभी भी इस्तेमाल हो सकता है। नॉर्मल एफडी में पैसा निकालने के लिए एफडी तुड़वानी पड़ती है। ब्याज की कमाई नॉर्मल एफडी में पूरी रकम पूरी अवधि तक तय दर पर ब्याज कमाती है।

बैंक की खास स्कीम या लंबी अवधि चुनने पर यहां दर भी थोड़ी बेहतर मिल सकती है। Sweep-in FD में ब्याज उतने ही समय का मिलता है, जितने दिन पैसा एफडी में रहा। बार बार पैसा निकलने पर कुल कमाई कम हो सकती है, फिर भी यह सामान्य सेविंग्स ब्याज से ज्यादा रहती है।

पेनल्टी के नियम

नॉर्मल एफडी समय से पहले तोड़ने पर पेनल्टी लगभग तय है। Sweep-in FD में कई बैंक रिवर्स स्वीप पर कोई पेनल्टी नहीं लेते, जबकि कुछ बैंक उस हिस्से पर कम दर से ब्याज देते हैं, इसलिए अपने बैंक के नियम जरूर पढ़ें। न्यूनतम बैलेंस और सुविधा स्वीप सुविधा वाले खातों में अक्सर ज्यादा औसत बैलेंस रखना पड़ता है। दूसरी तरफ नॉर्मल एफडी कुछ हजार रुपये से भी शुरू की जा सकती है और इसके लिए खाते में अलग से बड़ा बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होती।

टैक्स और सुरक्षा

दोनों में एक जैसे दोनों तरह की एफडी पर मिलने वाला ब्याज आपकी आय में जुड़ता है और स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। एक वित्त वर्ष में एक बैंक से ब्याज 50,000 रुपये से ज्यादा होने पर टीडीएस कटता है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये है। सुरक्षा के मामले में भी दोनों बराबर हैं। डीआईसीजीसी के तहत एक बैंक में एक जमाकर्ता की कुल जमा राशि 5 लाख रुपये तक बीमित रहती है, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल हैं।

Sweep-in FD
Sweep-in FD

आपके लिए कौन सा विकल्प सही है?

अगर आपकी सैलरी हर महीने खाते में आती है और खर्च कब कितना होगा यह तय नहीं है, तो Sweep-in FD सुविधा बेहतर है। इमरजेंसी फंड रखने के लिए भी यह अच्छा तरीका है, क्योंकि पैसा ब्याज कमाता है और तुरंत मिल भी जाता है। अगर आपके पास ऐसी रकम है जिसकी अगले एक दो साल तक जरूरत नहीं पड़ेगी, तो नॉर्मल एफडी ज्यादा फायदेमंद रहेगी।

बच्चों की पढ़ाई या किसी तय लक्ष्य के लिए जमा पैसा इसी में रखना समझदारी है। बहुत से लोग दोनों को साथ इस्तेमाल करते हैं। रोजमर्रा और इमरजेंसी का पैसा स्वीप में और लंबी अवधि की बचत नॉर्मल एफडी में रखकर Sweep-in FD vs Normal FD की बहस को आसानी से सुलझाया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या Sweep-in FD के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता है?

ज्यादातर बैंकों में इसे नेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप या शाखा में जाकर चालू करवाना होता है। कुछ खास खातों में यह पहले से चालू रहती है।

2. रिवर्स स्वीप में कौन सी एफडी पहले टूटती है?

ज्यादातर बैंक सबसे नई एफडी को पहले तोड़ते हैं, ताकि पुरानी एफडी पर ज्यादा समय तक ब्याज मिलता रहे। फिर भी यह नियम बैंक के हिसाब से बदल सकता है।

3. क्या नॉर्मल एफडी पर लोन मिल सकता है?

हां, ज्यादातर बैंक एफडी की रकम के 90 प्रतिशत तक लोन या ओवरड्राफ्ट देते हैं, जिससे एफडी तोड़े बिना पैसा मिल जाता है।

4. जमा बीमा की पूरी जानकारी कहां मिलेगी?

बैंक जमा पर बीमा के नियम डीआईसीजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर विस्तार से दिए गए हैं।

आगे और समाचार पढ़े:

बचत और एफडी से जुड़ी ये जानकारियां भी पढ़ें: ऑटो स्वीप एफडी क्या है और कैसे काम करती है, एफडी में क्यूम्यूलेटिव और नॉन क्यूम्यूलेटिव विकल्प का अंतर और एफडी समय से पहले तुड़वाने पर कितना नुकसान होता है।

Sweep-in FD के अलावा ये बड़ी खबरें भी पढ़ें:

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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