पूर्वोत्तर भारत के दो राज्यों मणिपुर और सिक्किम में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। चुनाव आयोग की ओर से अंतिम फोटो मतदाता सूची जारी किए जाने के बाद दोनों राज्यों को मिलाकर करीब 1.85 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। मणिपुर में 1,32,456 और सिक्किम में 52,614 नाम हटाए गए। अंतिम सूची के मुताबिक अब मणिपुर में 19,60,620 और सिक्किम में 4,18,467 पंजीकृत मतदाता हैं।
यह पुनरीक्षण ऐसे समय हुआ है जब मणिपुर में 2023 से जारी जातीय संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हैं। विस्थापित समुदायों, विशेष रूप से कुकी-जो समूहों की ओर से पहले ही आशंका जताई गई थी कि लंबे समय से अपने मूल मतदान केंद्रों से दूर रहने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। हालांकि, सरकार और चुनाव अधिकारियों ने ऐसी आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया था।
SIR में मणिपुर में 6.3 फीसदी मतदाताओं के नाम हटे
SIR शुरू होने से पहले मणिपुर में 20,93,076 मतदाता पंजीकृत थे। अंतिम पुनरीक्षण के बाद यह संख्या घटकर 19,60,620 रह गई। यानी करीब 1,32,456 नाम हटाए गए, जो शुरुआती मतदाता संख्या का लगभग 6.3 फीसदी है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, SIR के दौरान 20,93,076 मतदाताओं के लिए फॉर्म वितरित किए गए थे। इनमें से 19,34,399 फॉर्म डिजिटल रूप से दर्ज हुए, जबकि 1,58,677 फॉर्म ‘uncollectable’ श्रेणी में रहे। इसके बाद दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया भी पूरी की गई और 6 सितंबर को अंतिम सूची प्रकाशित की गई।
मणिपुर की अंतिम मतदाता सूची में एक और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। यहां अब महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है। अंतिम सूची में 10,06,962 महिला और 9,53,350 पुरुष मतदाता हैं। इसके अलावा 308 थर्ड-जेंडर मतदाता भी दर्ज हैं। इस तरह राज्य में प्रति 1,000 पुरुष मतदाताओं पर 1,056 महिला मतदाता हैं।
विस्थापित मतदाताओं को लेकर क्यों उठी चिंता?
मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुए जातीय संघर्ष के बाद हजारों लोग अपने मूल क्षेत्रों से विस्थापित हुए हैं। राहत शिविरों और दूसरे इलाकों में रहने वाले कई लोग लंबे समय से अपने स्थायी पते से दूर हैं।
SIR के दौरान मतदाता सत्यापन के लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की ओर से घर-घर संपर्क और दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। ऐसे में उन लोगों को लेकर सवाल उठे जो अपने मूल मतदान क्षेत्र में मौजूद नहीं थे।
कुकी-जो समूहों ने आशंका जताई थी कि संघर्ष के कारण विस्थापित लोगों के नाम हटने से वे आगामी चुनाव में मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना और मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाना बताया है।
SIR में सिक्किम में 11.2 फीसदी नाम हटे
सिक्किम में SIR के दौरान मतदाता सूची में कमी का प्रतिशत मणिपुर से भी अधिक रहा। शुरुआती सूची में करीब 4,71,081 मतदाता थे, जबकि अंतिम सूची में यह संख्या 4,18,467 रह गई।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार करीब 52,614 नाम हटाए गए, यानी लगभग 11.2 फीसदी मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में नहीं रहे। हालांकि, सिक्किम के मुख्य चुनावी अधिकारियों से जुड़े आंकड़ों और स्थानीय रिपोर्टों में हटाए गए नामों की संख्या में मामूली अंतर दिखाई देता है; इसलिए अंतिम आधिकारिक रिकॉर्ड को आधार माना जाना महत्वपूर्ण है।
सिक्किम की स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक अंतिम सूची में 2,12,534 पुरुष, 2,05,931 महिला और दो थर्ड-जेंडर मतदाता शामिल हैं। हटाए गए नामों में ‘Absent, Shifted, Dead and Duplicate’ यानी ASDD श्रेणी के मतदाता भी शामिल हैं। इसके अलावा कुछ मतदाता सत्यापन के दौरान दस्तावेजों या अन्य तार्किक विसंगतियों के कारण अपात्र पाए गए।
SIR का उद्देश्य क्या है?
चुनाव आयोग ने SIR को मतदाता सूची को स्वच्छ, समावेशी और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया बताया है। आयोग के अनुसार उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
इस प्रक्रिया में घर-घर सत्यापन, पुराने रिकॉर्ड से मिलान, दस्तावेजों की जांच और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया शामिल रही। मणिपुर में SIR का अंतिम प्रकाशन 6 सितंबर को किया गया। आयोग ने इससे पहले 5 जुलाई को ड्राफ्ट सूची जारी की थी और 5 जुलाई से 4 अगस्त तक दावे एवं आपत्तियां आमंत्रित की थीं।
नाम हटने के बाद क्या कर सकते हैं मतदाता?
किसी पात्र नागरिक का नाम अंतिम सूची में नहीं है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। चुनाव आयोग की व्यवस्था के तहत नए या छूटे हुए पात्र मतदाता Form 6 के जरिए नामांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ पहचान, उम्र और निवास से जुड़े आवश्यक दस्तावेज देने पड़ सकते हैं।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान हटाए गए सभी नामों का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति स्थायी रूप से मतदान के अधिकार से वंचित हो गया है। पात्रता साबित करने और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने पर नाम दोबारा जोड़ा जा सकता है।
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राजनीतिक और सामाजिक असर पर नजर
मणिपुर में SIR का महत्व केवल प्रशासनिक नहीं है। राज्य पहले से जातीय तनाव और विस्थापन की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव का राजनीतिक प्रभाव भी पड़ सकता है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के लिए चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि वास्तविक रूप से पात्र कोई मतदाता केवल विस्थापन, स्थानांतरण या दस्तावेज संबंधी समस्या के कारण अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए।
निष्कर्ष
मणिपुर और सिक्किम में SIR के बाद करीब 1.85 लाख नाम मतदाता सूची से हटना पूर्वोत्तर के चुनावी परिदृश्य में बड़ा बदलाव है। मणिपुर में 1,32,456 और सिक्किम में 52,614 नाम हटाए गए हैं।
मणिपुर में खास तौर पर यह प्रक्रिया संवेदनशील है, क्योंकि 2023 के जातीय संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हैं। ऐसे में अंतिम मतदाता सूची की विश्वसनीयता और समावेशिता पर विशेष नजर रहेगी।
चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को शामिल रखना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को हटाना है। अब असली परीक्षा यह होगी कि जिन पात्र नागरिकों के नाम छूट गए हैं, वे समय पर दावा कर सकें और अंतिम चुनावी प्रक्रिया में उनका मताधिकार सुरक्षित रहे।

