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पाकिस्तान क्रिकेट पर फिर फिक्सिंग का साया, खिलाड़ियों के फोन जब्त; 7 खिलाड़ी स्वदेश लौटाए गए

पाकिस्तान क्रिकेट एक बार फिर गंभीर संकट में घिरता नजर आ रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ जारी तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने बड़ा कदम उठाते हुए सात खिलाड़ियों को स्वदेश भेज दिया है। इनमें अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा, इमाम-उल-हक, अली उस्मान, खुर्रम शहजाद, आमिर जमाल और मोहम्मद अवैस जफर शामिल हैं। इसके साथ ही मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी उनके पदों से हटा दिया गया है। घटनाक्रम के बीच कुछ खिलाड़ियों के मोबाइल फोन PCB के कब्जे में लिए जाने की खबर ने मैच फिक्सिंग की आशंकाओं को और हवा दे दी है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि किसी खिलाड़ी के खिलाफ फिक्सिंग साबित हुई है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान की टीम इंग्लैंड दौरे पर बेहद खराब प्रदर्शन से जूझ रही है। पहले टेस्ट में पारी और 103 रन से हार के बाद लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी पाकिस्तान को 194 रन की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। दो टेस्ट हारने के बाद पाकिस्तान सीरीज में 0-2 से पिछड़ गया और इसके बाद PCB ने अचानक बड़े स्तर पर टीम में बदलाव कर दिए।

पाकिस्तान के खिलाड़ियों के फोन जब्त होने से बढ़ा संदेहपाकिस्तान

PCB द्वारा खिलाड़ियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में लेने की खबर ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ खिलाड़ियों के फोन बोर्ड के अधिकारियों को सौंपे गए हैं और तीसरे टेस्ट के खत्म होने तक वे PCB के पास रहेंगे। हालांकि, बोर्ड ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन खिलाड़ियों के फोन लिए गए और इस कार्रवाई का आधिकारिक कारण क्या है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ियों के मोबाइल फोन पर पहले से ही कुछ प्रतिबंध लागू हैं, खासकर मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम और अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों में। लेकिन लंबे समय तक फोन अपने कब्जे में रखना सामान्य मैच-दिवस प्रोटोकॉल से अलग मामला है। इसी वजह से इस कार्रवाई को लेकर मैच फिक्सिंग या भ्रष्टाचार जांच की अटकलें तेज हुई हैं। हालांकि, PCB ने अभी तक किसी खिलाड़ी को फिक्सिंग का दोषी नहीं बताया है।

सात खिलाड़ियों को अचानक भेजा गया घर

PCB की कार्रवाई के तहत सात खिलाड़ियों को इंग्लैंड दौरे से वापस भेज दिया गया। यह फैसला टीम में भारी उथल-पुथल के बीच लिया गया। मोहम्मद रिजवान और इमाम-उल-हक जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का बाहर होना सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना है।

इसके अलावा सलमान अली आगा, अली उस्मान, खुर्रम शहजाद, आमिर जमाल और मोहम्मद अवैस जफर को भी टीम से अलग कर दिया गया। बोर्ड ने इसके साथ कोचिंग स्टाफ में भी बड़ा बदलाव किया और सरफराज अहमद तथा उमर गुल को हटा दिया।

बाद में PCB ने सात खिलाड़ियों को वापस बुलाए जाने के बाद आंतरिक अनुशासनात्मक जांच शुरू करने की पुष्टि की। बोर्ड के मीडिया निदेशक आमिर मीर ने जांच की जानकारी दी, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कार्रवाई के पीछे कौन-से विशिष्ट आरोप हैं। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया PCB के नियमों के अनुसार चलेगी और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

फिक्सिंग का आरोप अभी साबित नहीं

पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू मैच फिक्सिंग की चर्चा है। खिलाड़ियों के फोन जब्त किए जाने और अचानक उन्हें टीम से बाहर करने के कारण सोशल मीडिया तथा क्रिकेट जगत में फिक्सिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में रिजवान और इमाम-उल-हक समेत वरिष्ठ खिलाड़ियों को लेकर जांच की बात सामने आई है।

लेकिन यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फोन जब्त होना या टीम से बाहर किया जाना अपने आप में मैच फिक्सिंग का सबूत नहीं है। PCB ने किसी खिलाड़ी पर अभी तक आधिकारिक तौर पर मैच फिक्सिंग का आरोप या दोष सिद्ध नहीं किया है। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही निकाला जा सकता है।

पाकिस्तान क्रिकेट के पुराने जख्म फिर हरे

फिक्सिंग का नाम सामने आते ही पाकिस्तान क्रिकेट के पुराने विवाद भी चर्चा में आ गए हैं। 2010 के इंग्लैंड दौरे के दौरान पाकिस्तान के खिलाड़ियों पर स्पॉट फिक्सिंग के गंभीर आरोप लगे थे। उस मामले में सलमान बट, मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर पर कार्रवाई हुई थी और बाद में उन्हें क्रिकेट तथा आपराधिक मामलों में सजा का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद 2017 में पाकिस्तान सुपर लीग से जुड़ा स्पॉट फिक्सिंग विवाद भी सामने आया। इन घटनाओं के कारण पाकिस्तान क्रिकेट में भ्रष्टाचार विरोधी व्यवस्था और खिलाड़ियों की निगरानी को लेकर लगातार बहस होती रही है।यही वजह है कि मौजूदा घटनाक्रम में खिलाड़ियों के फोन की जांच जैसी खबरें सामने आते ही क्रिकेट जगत में पुरानी चिंताएं फिर से उभर आई हैं।

PCB की ‘पैनिक बटन’ रणनीति पर सवाल

पूर्व पाकिस्तानी खिलाड़ियों और क्रिकेट विशेषज्ञों ने PCB के अचानक किए गए बड़े बदलावों पर सवाल उठाए हैं। पूर्व कप्तानों ने टीम में भारी फेरबदल को ‘पैनिक बटन’ दबाने जैसा बताया है। उनका तर्क है कि लगातार खराब प्रदर्शन का समाधान एक टेस्ट सीरीज के बीच बड़ी संख्या में खिलाड़ियों और कोचों को हटाना नहीं हो सकता।

पूर्व कप्तान मिस्बाह-उल-हक ने भी PCB की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे ऐसी ‘कॉस्मेटिक सर्जरी’ बताया जो पाकिस्तान क्रिकेट की मूल समस्याओं को ठीक नहीं कर सकती। उनके अनुसार, टीम को दीर्घकालिक योजना, स्थिर नेतृत्व और मजबूत घरेलू क्रिकेट ढांचे की जरूरत है।

पूर्व कप्तान अजहर अली ने भी पाकिस्तान क्रिकेट में लगातार बदलते नेतृत्व, अस्थिर प्रबंधन और स्पष्ट दीर्घकालिक दृष्टि की कमी को समस्या बताया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट किसी एक साल में पैदा नहीं हुआ और इसे सुधारने में कई साल लग सकते हैं।

तीसरे टेस्ट से पहले बड़ा बदलाव

पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच सीरीज का तीसरा और अंतिम टेस्ट ऐसे माहौल में होने जा रहा है, जब पाकिस्तान की टीम का संयोजन पूरी तरह बदल गया है। नए मुख्य कोच के रूप में माइक हेसन को जिम्मेदारी दी गई है। हेसन ने स्पष्ट किया है कि सात खिलाड़ियों को हटाने का फैसला उनके पद संभालने से पहले ही लिया जा चुका था।

अंतिम टेस्ट के लिए टीम में कई नए और कम अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए चुनौती केवल इंग्लैंड के खिलाफ मैच बचाने की नहीं, बल्कि टीम के भीतर स्थिरता और भरोसा कायम करने की भी है।

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आगे क्या होगा?

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि PCB की आंतरिक जांच में क्या सामने आता है। यदि फोन या अन्य डिजिटल डेटा से किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो मामला ICC की भ्रष्टाचार विरोधी प्रक्रिया तक भी पहुंच सकता है। लेकिन यदि जांच में फिक्सिंग से संबंधित कोई ठोस सबूत नहीं मिलता, तो मौजूदा कार्रवाई को मुख्य रूप से अनुशासन और टीम प्रबंधन से जुड़ा मामला माना जाएगा।

फिलहाल पाकिस्तान क्रिकेट पर फिक्सिंग का साया जरूर मंडरा रहा है, लेकिन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। PCB की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक वजह क्या थी।

निष्कर्ष

इंग्लैंड दौरे पर लगातार दो बड़ी हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट में मचा भूचाल अब खिलाड़ियों के मोबाइल फोन जब्त किए जाने और फिक्सिंग की अटकलों तक पहुंच गया है। सात खिलाड़ियों को स्वदेश भेजना, दो कोचों को हटाना और आंतरिक अनुशासनात्मक जांच शुरू करना PCB के लिए असाधारण कदम हैं।

हालांकि, फिलहाल मैच फिक्सिंग का कोई आरोप साबित नहीं हुआ है। इसलिए इस पूरे मामले में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है। इतना जरूर है कि पाकिस्तान क्रिकेट के लिए यह संकट केवल मैदान पर खराब प्रदर्शन का नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, प्रबंधन और संस्थागत स्थिरता का भी सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में PCB की जांच यह तय करेगी कि मौजूदा विवाद केवल टीम के भीतर अनुशासन का मामला था या इसके पीछे भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई गंभीर पहलू भी मौजूद है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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