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Cash Envelope System क्या है? जानें ओवरस्पेंडिंग रोकने का पुराना लेकिन असरदार तरीका

ऑनलाइन पेमेंट और कार्ड के इस दौर में भी कई लोग बजट बनाकर उसे फॉलो नहीं कर पाते। यहीं पर Cash Envelope System काम आता है, जो एक पुरानी लेकिन बेहद असरदार बजटिंग तकनीक है। कार्ड से खर्च करने पर पैसे खत्म होने का एहसास देर से होता है, जबकि नकद में यह तुरंत दिखाई देता है। यही वजह है कि यह पुराना तरीका आज भी फाइनेंशियल प्लानर्स के बीच लोकप्रिय बना हुआ है। आइए इसके बारे में पूरी जानकारी विस्तार से समझते हैं।

Cash Envelope System क्या है?

Cash Envelope System में महीने के बजट को अलग-अलग खर्च की कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग लिफाफों में बांटा जाता है।

हर लिफाफे पर राशन, ट्रांसपोर्ट, मनोरंजन जैसी कैटेगरी लिखी जाती है और उसमें उतनी ही नकद राशि रखी जाती है।

जब किसी लिफाफे का पैसा खत्म हो जाता है, तो उस कैटेगरी में महीने के बाकी दिनों तक खर्च करना बंद कर दिया जाता है।

Cash Envelope System कैसे काम करता है?

सबसे पहले महीने की कुल आमदनी और जरूरी खर्चों की एक लिस्ट बनाई जाती है।

इसके बाद हर खर्च कैटेगरी के लिए एक तय राशि तय की जाती है, जैसे राशन के लिए पांच हजार या मनोरंजन के लिए दो हजार रुपये।

तय राशि को उसी कैटेगरी के लिफाफे में नकद के रूप में रख दिया जाता है।

खर्च करते समय सिर्फ उसी लिफाफे से पैसा निकाला जाता है, जिससे बाकी कैटेगरी का बजट सुरक्षित रहता है।

महीने के अंत में बचे हुए पैसे को अगले महीने की सेविंग में जोड़ा जा सकता है।

कुछ लोग एक कैटेगरी के लिफाफे से बचा हुआ पैसा दूसरी जरूरी कैटेगरी में भी शिफ्ट कर लेते हैं, बशर्ते कुल बजट सीमा पार न हो।

इस तकनीक के फायदे

सबसे बड़ा फायदा यह है कि आंखों के सामने पैसा कम होते देखकर ओवरस्पेंडिंग अपने आप रुक जाती है।

यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए कारगर है, जिन्हें कार्ड से खर्च करते समय बजट का अंदाजा नहीं रहता।

हर कैटेगरी अलग होने से यह भी साफ पता चलता है कि किस चीज पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है।

यह तरीका बिना किसी ऐप या तकनीकी जानकारी के भी आसानी से अपनाया जा सकता है।

परिवार के सभी सदस्यों को भी इसमें शामिल करना आसान होता है, क्योंकि हर कोई अपने-अपने लिफाफे से खर्च का हिसाब खुद रख सकता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

बड़ी मात्रा में नकद घर पर रखना सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए सीमित राशि ही नकद में रखनी चाहिए।

जिन खर्चों के लिए ऑनलाइन पेमेंट अनिवार्य है, जैसे बिजली बिल या EMI, उनके लिए यह तरीका पूरी तरह उपयुक्त नहीं है।

ऐसे फिक्स्ड खर्चों को इस सिस्टम से अलग रखकर सामान्य बैंकिंग तरीके से ही निपटाना बेहतर रहता है।

इसे डिजिटल वॉलेट में अलग-अलग सब-अकाउंट बनाकर भी अपनाया जा सकता है, जो आज के दौर में ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. Cash Envelope System किसके लिए सबसे उपयुक्त है?
जिन लोगों को ओवरस्पेंडिंग की समस्या रहती है, उनके लिए यह तरीका सबसे ज्यादा असरदार साबित होता है।

2. क्या इसे डिजिटल तरीके से भी अपनाया जा सकता है?
हां, कई बैंकिंग ऐप्स में अलग-अलग सब-अकाउंट बनाकर यही तरीका डिजिटल रूप में अपनाया जा सकता है।

3. अगर किसी लिफाफे का पैसा खत्म हो जाए तो क्या करें?
उस कैटेगरी में महीने के बाकी दिनों तक खर्च रोकना ही इस सिस्टम का मूल नियम है।

4. क्या यह तरीका बड़े खर्चों के लिए भी सही है?
यह मुख्य रूप से रोजमर्रा और छोटे नियमित खर्चों के लिए ज्यादा उपयुक्त है, बड़े खर्चों के लिए अलग सेविंग प्लान बेहतर रहता है।

5. क्या यह तरीका आधुनिक बजटिंग टूल्स से बेहतर है?
यह किसी एक की जगह पूरक की तरह भी काम कर सकता है, इस बारे में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया पर पढ़ा जा सकता है।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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