पीएम मोदी रविवार को दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच गए। यह उनकी मध्य एशिया की चार दिवसीय यात्रा का दूसरा चरण है। इससे पहले उन्होंने उज्बेकिस्तान का दौरा किया था। बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदर जापारोव के निमंत्रण पर पहुंचे प्रधानमंत्री की यात्रा को भारत की मध्य एशिया नीति और क्षेत्रीय कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के बिश्केक पहुंचने पर किर्गिस्तान के मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष एडिलबेक कासिमालियेव ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक किर्गिज नृत्य प्रस्तुति भी आयोजित की गई। भारतीय समुदाय और स्थानीय लोगों के बीच भी प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर उत्साह देखने को मिला।
SCO सम्मेलन में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा
बिश्केक में होने वाला SCO शिखर सम्मेलन भारत के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं रखने का मंच होगा। सम्मेलन में सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, उग्रवाद, संपर्क व्यवस्था, व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत SCO के साथ मिलकर क्षेत्र को आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त बनाने के प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहता है। भारत की प्राथमिकताओं में क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक अवसरों के साथ-साथ सुरक्षित संपर्क व्यवस्था को मजबूत करना भी शामिल है।
SCO की स्थापना वर्ष 2001 में चीन, रूस और मध्य एशियाई देशों के सहयोग से हुई थी। भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना। वर्तमान में संगठन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस समेत 10 सदस्य देश हैं।
पीएम मोदी की पहले दिन कई नेताओं से मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी के बिश्केक दौरे के पहले दिन कई SCO नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम है। इन मुलाकातों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों नेताओं की मुलाकात SCO सम्मेलन के इतर प्रस्तावित है। भारत-रूस संबंधों में ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ भी द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। क्षेत्रीय संपर्क, ऊर्जा और पश्चिम एशिया की परिस्थितियां इस बातचीत के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकती हैं।
चीन और पाकिस्तान के नेताओं की मौजूदगी भी अहम
बिश्केक सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई प्रमुख नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में SCO मंच भारत के लिए क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाता है।
भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी मुद्दों पर बातचीत जारी है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क बढ़ा है। ऐसे माहौल में SCO सम्मेलन भारत-चीन संबंधों के लिए भी एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच उपलब्ध कराता है।
वहीं, पाकिस्तान की मौजूदगी के कारण आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी भारत के लिए विशेष महत्व रखता है। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त और प्रभावी कार्रवाई की वकालत करता रहा है।
पीएम मोदी का ‘फ्रेंड्स ऑफ इंडिया’ से भी संवाद
प्रधानमंत्री मोदी बिश्केक में ‘फ्रेंड्स ऑफ इंडिया’ के साथ भी संवाद करेंगे। इसके बाद वह महात्मा गांधी मेमोरियल पार्क जाएंगे और वहां महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। यह प्रतिमा प्रधानमंत्री मोदी की वर्ष 2015 की किर्गिस्तान यात्रा के दौरान स्थापित की गई थी।
महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि भारत और किर्गिस्तान के बीच ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करने का अवसर भी होगी। दोनों देशों के बीच शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, पर्यटन और आर्थिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं लगातार तलाश की जा रही हैं।
मध्य एशिया पर भारत का बढ़ता फोकस
प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदा यात्रा को भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। मध्य एशिया भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के साथ संबंध मजबूत करने के अलावा भारत इस क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी संपर्क और सहयोग बढ़ाने पर जोर देता रहा है।
व्यापार मार्गों, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क के विस्तार के लिए मध्य एशिया की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में SCO जैसे बहुपक्षीय मंच भारत को इन मुद्दों पर व्यापक स्तर पर बातचीत का अवसर देते हैं।
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SCO में भारत की प्राथमिकताएं
भारत SCO को केवल सुरक्षा केंद्रित संगठन के रूप में नहीं देखता, बल्कि आर्थिक विकास और क्षेत्रीय संपर्क के लिए भी महत्वपूर्ण मंच मानता है। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग के साथ-साथ आर्थिक विकास, डिजिटल सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे विषयों पर भारत का दृष्टिकोण सामने आने की उम्मीद है।
SCO के भीतर सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी हैं। इसके बावजूद संगठन भारत को रूस, चीन, मध्य एशिया और ईरान जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ एक ही मंच पर संवाद करने का अवसर देता है। यही कारण है कि भारत SCO में अपनी सक्रिय भागीदारी को रणनीतिक महत्व देता है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिश्केक पहुंचना भारत की सक्रिय मध्य एशिया कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दो दिवसीय किर्गिस्तान यात्रा के दौरान वह 26वें SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ कई सदस्य देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे।
सम्मेलन में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे भारत की प्राथमिकताओं में रहेंगे। रूस, चीन, ईरान और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बनाती है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत मध्य एशिया के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने तथा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपनी भूमिका को प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है। बिश्केक में होने वाली बैठकों और SCO शिखर सम्मेलन में भारत के रुख से आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सहयोग और कूटनीतिक समीकरणों की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।

