HomeNational Headlinesराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने UPI और टैक्स से जुड़े कानूनों को दी...

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने UPI और टैक्स से जुड़े कानूनों को दी मंजूरी, शुल्क लगाने का रास्ता साफ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डिजिटल भुगतान और कर व्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण कानूनों को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 और Payment and Settlement Systems से संबंधित संशोधन कानून अब प्रभावी कानूनी ढांचे का हिस्सा बन गए हैं। इन बदलावों का सबसे अधिक असर देश के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान तंत्र, खासकर UPI और RuPay पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अब हर UPI लेनदेन पर तुरंत शुल्क लगना शुरू हो जाएगा। इसके लिए आगे सरकार की ओर से अधिसूचना और संबंधित नियमों की जरूरत होगी।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सरकार के पास भविष्य में कुछ डिजिटल भुगतान लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) या अन्य शुल्क से संबंधित व्यवस्था तय करने का कानूनी आधार तैयार हो गया है। मौजूदा व्यवस्था में UPI को उपभोक्ताओं के लिए लगभग शुल्क-मुक्त डिजिटल भुगतान माध्यम के तौर पर बढ़ावा दिया गया है। नए संशोधन से इसी व्यवस्था को बदलने की संभावित गुंजाइश पैदा हुई है।

क्या अब UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज?UPI

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब Google Pay, PhonePe, Paytm, BHIM या अन्य माध्यमों से UPI भुगतान करने पर ग्राहकों को शुल्क देना होगा।

इसका सीधा जवाब है—अभी ऐसा नहीं हुआ है। कानून में बदलाव ने शुल्क लगाने की संभावना का कानूनी रास्ता जरूर खोला है, लेकिन प्रत्येक UPI भुगतान पर कोई निश्चित शुल्क तत्काल लागू नहीं किया गया है। किस प्रकार के लेनदेन पर शुल्क लगेगा, कितना लगेगा और किससे वसूला जाएगा, यह आगे की सरकारी अधिसूचना और नियमों पर निर्भर करेगा।

यानी राष्ट्रपति की मंजूरी को UPI शुल्क लागू होने का अंतिम आदेश नहीं, बल्कि भविष्य की शुल्क व्यवस्था के लिए कानूनी आधार के रूप में समझना अधिक सही होगा।

MDR क्या है और क्यों है चर्चा में?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया में व्यापारी या संबंधित भुगतान तंत्र से जुड़ी संस्थाओं के बीच लिया जा सकता है। इसका संबंध भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी और भुगतान नेटवर्क से जुड़ी लागत से होता है।

UPI के विस्तार के बाद सरकार ने छोटे कारोबारियों और आम ग्राहकों के लिए डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से UPI पर MDR को शून्य रखने की नीति अपनाई थी। इससे दुकानदारों के लिए QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार करना आसान और कम लागत वाला बना।

अब नए कानूनी बदलाव ने इस शून्य-MDR व्यवस्था को भविष्य में संशोधित करने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है।

71 प्रतिशत UPI ट्रांजेक्शन वैल्यू को लेकर क्या है तस्वीर?

इससे पहले संसद में पारित संशोधन से जुड़ी रिपोर्टों में बताया गया था कि UPI लेनदेन की कुल राशि का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान से जुड़ा हो सकता है। ऐसे लेनदेन पर शुल्क लगाने की स्थिति अलग हो सकती है। संसद में पारित प्रावधान में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि किन लेनदेन पर और कितनी राशि के बाद शुल्क लागू होगा।

इसका अर्थ है कि भविष्य में यदि MDR व्यवस्था लागू की जाती है तो जरूरी नहीं कि हर प्रकार के UPI भुगतान पर समान शुल्क लगाया जाए। सरकार लेनदेन के प्रकार, मूल्य या अन्य मानदंडों के आधार पर अलग-अलग नियम बना सकती है।

ग्राहकों पर क्या होगा असर?

आम UPI उपयोगकर्ताओं के लिए फिलहाल तत्काल कोई बदलाव नहीं है। राष्ट्रपति की मंजूरी अपने आप में ग्राहकों से शुल्क वसूलने की शुरुआत नहीं करती।

लेकिन भविष्य में सरकार यदि कुछ श्रेणियों के डिजिटल भुगतान पर MDR लागू करती है तो उसका प्रभाव भुगतान तंत्र में शामिल बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और व्यापारियों पर पड़ सकता है। इसके बाद यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इस लागत को अंततः व्यापारी वहन करते हैं या किसी हिस्से का असर ग्राहकों तक पहुंचता है।

सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि डिजिटल भुगतान के विस्तार और भुगतान प्रणाली की वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।

सरकार को क्यों करनी पड़ी कानूनी व्यवस्था में तब्दीली?

UPI का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है। करोड़ों लोग रोजाना छोटे-बड़े भुगतान के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। इसके चलते UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत प्रणालियों में शामिल हो गया है।

दूसरी तरफ, इतने बड़े भुगतान नेटवर्क को संचालित करने में बैंक, पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर और तकनीकी संस्थाएं लागत वहन करती हैं। MDR से जुड़ी बहस का एक हिस्सा इसी लागत की भरपाई से संबंधित है।

सरकार के सामने एक तरफ UPI को आम लोगों के लिए सस्ता और सुविधाजनक बनाए रखने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर भुगतान प्रणाली को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखना भी जरूरी है।

RuPay को भी मिल सकता है असर

संशोधन की चर्चा केवल UPI तक सीमित नहीं है। RuPay से जुड़े डिजिटल भुगतान लेनदेन पर भी भविष्य की MDR व्यवस्था का असर पड़ सकता है। नए कानूनी ढांचे से सरकार को अधिसूचना के जरिए अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेनदेन श्रेणियों के लिए शुल्क संबंधी व्यवस्था तय करने की शक्ति मिलती है।

इससे डिजिटल भुगतान क्षेत्र में अलग-अलग माध्यमों के बीच लागत और प्रतिस्पर्धा को लेकर भी नई बहस शुरू हो सकती है।

सरकार के सामने संतुलन की चुनौती

UPI भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति का प्रमुख आधार रहा है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यवसायों तक QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार करना अब सामान्य हो चुका है।

यदि भविष्य में शुल्क व्यवस्था लागू होती है तो सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इससे छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ न पड़े। खासकर छोटे मूल्य के लेनदेन में अतिरिक्त शुल्क डिजिटल भुगतान को प्रभावित कर सकता है।

वहीं, भुगतान कंपनियों और बैंकों के लिए शुल्क व्यवस्था एक स्थायी राजस्व मॉडल उपलब्ध करा सकती है। इसलिए आने वाले समय में सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले नियम बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

विपक्ष और विशेषज्ञों की नजर भी रहेगी

UPI शुल्क को लेकर पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक बहस चल रही है। कुछ विशेषज्ञों ने सरकार को UPI पर MDR लागू करने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। Global Trade Research Initiative (GTRI) ने भी UPI पर शुल्क लगाने के विचार को लेकर चिंता जताई थी और सरकार से डिजिटल भुगतान की मौजूदा कम लागत वाली प्रकृति को बनाए रखने का आग्रह किया था।

विशेषज्ञों के अनुसार, UPI की सबसे बड़ी ताकत उसकी सरलता, कम लागत और व्यापक स्वीकार्यता है। किसी भी शुल्क व्यवस्था को लागू करते समय इन तीनों पहलुओं पर असर का आकलन करना जरूरी होगा।

आगे और समाचार पढ़े:

आगे क्या होगा?

अब अगला कदम सरकार की ओर से संभावित अधिसूचना और नियमों का होगा। इसमें यह स्पष्ट किया जा सकता है कि किन भुगतान माध्यमों या लेनदेन पर MDR लागू होगा और उसकी दर क्या होगी।

जब तक ऐसी अधिसूचना जारी नहीं होती, आम UPI उपयोगकर्ताओं के लिए वर्तमान भुगतान व्यवस्था में तत्काल शुल्क लागू होने की बात नहीं कही जा सकती।

निष्कर्ष

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद डिजिटल भुगतान और कर कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव कानूनी रूप से लागू हो गए हैं। इनमें सबसे अधिक चर्चा UPI और RuPay पर संभावित MDR व्यवस्था को लेकर हो रही है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि कानून में शुल्क लगाने की संभावना का रास्ता साफ होना और वास्तविक शुल्क लागू होना दो अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल आम ग्राहकों के UPI भुगतान पर कोई तत्काल शुल्क लागू नहीं हुआ है। भविष्य में सरकार किस प्रकार की MDR व्यवस्था अधिसूचित करती है, किस लेनदेन को इससे बाहर रखती है और लागत का बोझ किस पर पड़ता है—इन्हीं सवालों से इस कानून का वास्तविक प्रभाव तय होगा।

भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UPI ने देश में भुगतान के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। अब सरकार के सामने चुनौती है कि वह भुगतान प्रणाली की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करते हुए UPI की कम लागत, आसान पहुंच और आम जनता की सुविधा को भी बरकरार रखे।

WhatsApp Group
Join Now
PandeyAbhishek
PandeyAbhishek
Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular