HomeInsuranceHealth Insurance Claim Rejection Reasons: क्लेम रिजेक्ट होने की 5 बड़ी वजहें...

Health Insurance Claim Rejection Reasons: क्लेम रिजेक्ट होने की 5 बड़ी वजहें और बचने का तरीका (2026)

Health Insurance Claim Rejection Reasons को समझना हर पॉलिसीहोल्डर के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि एक छोटी सी भूल पूरे क्लेम को खतरे में डाल सकती है।

सोचिए, अस्पताल में इमरजेंसी के बाद जब आप क्लेम फाइल करते हैं और कुछ दिनों बाद जवाब आता है “Claim Rejected” — यह झटका किसी को भी परेशान कर सकता है।

IRDAI की रिपोर्ट के मुताबिक FY 2024-25 में करीब ₹30,000 करोड़ के हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट या रिपुडिएट हुए, जो पिछले साल से करीब 15% ज्यादा है।

इसके पीछे ज्यादातर मामलों में वही कुछ गिनी-चुनी गलतियां जिम्मेदार होती हैं।

इस आर्टिकल में हम Health Insurance Claim Rejection Reasons की टॉप 5 वजहें, उनसे बचने के तरीके और क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या करना चाहिए — सब कुछ आसान भाषा में समझेंगे।

Health Insurance Claim Rejection Reasons: टॉप 5 वजहें

1. पहले से मौजूद बीमारी न बताना (Non-Disclosure)

Health Insurance Claim Rejection Reasons में सबसे बड़ा कारण यही है — प्रपोज़ल फॉर्म में डायबिटीज, बीपी या थायरॉइड जैसी पहले से मौजूद बीमारी छुपाना। ज्यादातर सीरियस रिजेक्शन इसी वजह से होते हैं।

राहत की बात यह है कि IRDAI के 2024 मास्टर सर्कुलर के तहत एक राहत भी है।

अगर आपने लगातार 5 साल तक पॉलिसी बिना ब्रेक के रिन्यू की है, तो इंश्योरर सिर्फ प्रूव्ड फ्रॉड की स्थिति में ही non-disclosure के आधार पर क्लेम रिजेक्ट कर सकता है।

पहले यह मोरेटोरियम पीरियड 8 साल था।

अगर आपने पूरे परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लिया है, तो हर सदस्य की मेडिकल हिस्ट्री अलग-अलग और सही तरीके से बतानी उतनी ही जरूरी है।

2. पॉलिसी लैप्स और ग्रेस पीरियड की गलतफहमी

Health Insurance Claim Rejection Reasons में पॉलिसी लैप्स भी एक बहुत आम वजह है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि 30 दिन का ग्रेस पीरियड मतलब कवरेज जारी रहता है, लेकिन ऐसा नहीं है।

ग्रेस पीरियड सिर्फ वेटिंग पीरियड क्रेडिट और नो-क्लेम बोनस बचाता है, कवरेज को एक्सटेंड नहीं करता।

अगर पॉलिसी लैप्स होने के दौरान अस्पताल में भर्ती हुए, तो क्लेम रिजेक्ट लगभग तय है, भले ही आप अगले ही दिन रिन्यू कर लें।

बेहतर है ड्यू डेट से कम से कम 2 हफ्ते पहले प्रीमियम भर दें।

3. वेटिंग पीरियड के दौरान क्लेम करना

Health Insurance Claim Rejection Reasons की लिस्ट में वेटिंग पीरियड का उल्लंघन भी शामिल है। IRDAI के नियमों के तहत पहले से मौजूद बीमारियों का वेटिंग पीरियड अधिकतम 36 महीने तक हो सकता है।

जबकि हर्निया या कैटरैक्ट जैसी कुछ खास बीमारियों पर 24 महीने तक की अलग वेटिंग लागू होती है।

वेटिंग पीरियड की पूरी डिटेल Health Insurance Waiting Period गाइड में समझी जा सकती है।

4. डॉक्यूमेंटेशन में गड़बड़ी

IRDAI के जनवरी 2026 के अनिवार्य डिस्क्लोज़र डेटा के मुताबिक, Q4 2025 में रीइम्बर्समेंट क्लेम रिजेक्शन के 32% से ज्यादा मामले सिर्फ अस्पताल की अस्पष्ट या अधूरी डिस्चार्ज समरी की वजह से हुए।

यह Health Insurance Claim Rejection Reasons में सबसे आसानी से टाला जा सकने वाला कारण है।

अस्पताल से डिस्चार्ज समरी साफ और पूरी लें, और सभी बिल-रसीदें संभालकर रखें।

5. सब-लिमिट और एक्सक्लूजन क्लॉज़

Health Insurance Claim Rejection Reasons में आखिरी बड़ी वजह सब-लिमिट और एक्सक्लूजन क्लॉज़ है। बहुत सी पॉलिसी में रूम रेंट, कुछ खास ट्रीटमेंट या मेडिसिन पर सब-लिमिट होती है।

अगर खर्च इस लिमिट से ज्यादा हुआ, तो बाकी अमाउंट खुद भरना पड़ सकता है, या एक्सक्लूजन क्लॉज़ लागू होने पर पूरा क्लेम भी रिजेक्ट हो सकता है।

Health Insurance Claim Rejection Reasons से कैसे बचें

Health Insurance Claim Rejection Reasons से बचना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ी सी सावधानी चाहिए।

  • प्रपोज़ल फॉर्म में सभी बीमारियां और आदतें ईमानदारी से बताएं
  • रिन्यूअल ड्यू डेट से 2 हफ्ते पहले प्रीमियम भरें
  • अस्पताल से साफ और पूरी डिस्चार्ज समरी लें
  • पॉलिसी डॉक्यूमेंट में वेटिंग पीरियड और सब-लिमिट जरूर पढ़ें
  • क्लेम इंटिमेशन इंश्योरर या TPA को समय पर दें
  • Car Insurance Claim Rejection जैसे दूसरे इंश्योरेंस में भी क्लेम करते वक्त यही सावधानियां अपनाएं

Claim Reject हो जाए तो क्या करें

Health Insurance Claim Rejection Reasons समझने के बाद भी अगर क्लेम रिजेक्ट हो जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं।

IRDAI के नियम के मुताबिक, इंश्योरर को सभी डॉक्यूमेंट मिलने के 15 दिन के अंदर क्लेम सेटल या रिजेक्ट करना होता है।

बिना वजह देरी होने पर इंश्योरर को मूलधन के साथ 2% कंपाउंड इंटरेस्ट भी देना पड़ता है।

1 जुलाई 2026 से IRDAI का नया एनफोर्समेंट ड्राइव लागू हो चुका है।

जो इंश्योरर 95% क्लेम सेटलमेंट कंप्लायंस पूरा नहीं करते, उन पर हर उल्लंघन पर ₹2 लाख तक का जुर्माना लग सकता है।

अगर क्लेम गलत तरीके से रिजेक्ट हुआ लगे, तो पहले इंश्योरर के ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर (GRO) से लिखित शिकायत करें।

फिर IRDAI के Bima Bharosa पोर्टल पर एस्केलेट करें, और जरूरत पड़े तो इंश्योरेंस ओम्बड्समैन या कंज्यूमर कोर्ट का रास्ता अपनाएं।

आगे और समाचार पढ़ें:

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. Health Insurance Claim Rejection Reasons में सबसे common वजह क्या है? पहले से मौजूद बीमारी (जैसे डायबिटीज या बीपी) न बताना सबसे बड़ी और सबसे common वजह है।

2. क्या रिजेक्ट हुआ क्लेम दोबारा मिल सकता है? Health Insurance Claim Rejection Reasons में से कई वजहें फिक्स होने वाली हैं।

अगर वजह डॉक्यूमेंटेशन गैप जैसी हो, तो सही कागज जमा करने पर क्लेम रिवर्स हो सकता है।

3. क्या ग्रेस पीरियड में हुए क्लेम को कवरेज मिलती है? नहीं, ग्रेस पीरियड सिर्फ वेटिंग पीरियड क्रेडिट बचाता है, कवरेज इस दौरान एक्टिव नहीं रहती।

4. क्लेम रिजेक्ट होने पर कितने दिन में शिकायत करनी चाहिए? जितनी जल्दी हो सके इंश्योरर के GRO को लिखित शिकायत दें, फिर Bima Bharosa पोर्टल पर एस्केलेट करें।

5. क्या 5 साल के बाद भी इंश्योरर non-disclosure पर क्लेम रिजेक्ट कर सकता है? नहीं, सिर्फ प्रूव्ड फ्रॉड के मामलों को छोड़कर, 5 साल की निरंतर पॉलिसी के बाद यह आधार लागू नहीं होता।

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। किसी भी वित्तीय या इंश्योरेंस निर्णय से पहले प्रमाणित सलाहकार या अपनी इंश्योरेंस कंपनी से सलाह जरूर लें।

WhatsApp Group
Join Now
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular