HomeBusinessCSR Documentation क्या होता है और किन कंपनियों के लिए अनिवार्य है?

CSR Documentation क्या होता है और किन कंपनियों के लिए अनिवार्य है?

बड़ी कंपनियां सिर्फ मुनाफा कमाकर नहीं रुक सकतीं, कानून उन्हें समाज के लिए भी कुछ वापस देने के लिए बाध्य करता है। लेकिन यह जिम्मेदारी सिर्फ पैसा खर्च करने तक सीमित नहीं, बल्कि सही CSR Documentation तैयार करना भी उतना ही जरूरी है। आइए इसे पूरी गहराई से समझते हैं।

CSR Documentation क्या है

CSR Documentation उन सभी दस्तावेजों को कहा जाता है, जो किसी कंपनी को Companies Act 2013 की धारा 135 के तहत अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी को साबित करने के लिए तैयार करने होते हैं। इसमें CSR पॉलिसी, बोर्ड रिजॉल्यूशन, खर्च के रिकॉर्ड और सरकार को दी जाने वाली रिपोर्ट्स शामिल हैं। सही CSR Documentation न सिर्फ कानूनी अनुपालन दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि कंपनी ने पैसा सही जगह और सही तरीके से खर्च किया है।

किन कंपनियों पर CSR लागू होता है

धारा 135 उन कंपनियों पर लागू होती है, जो पिछले वित्त वर्ष में इनमें से कोई एक शर्त पूरी करती हैं, यानी टर्नओवर ₹1,000 करोड़ या उससे ज्यादा, नेटवर्थ ₹500 करोड़ या उससे ज्यादा, या नेट प्रॉफिट ₹5 करोड़ या उससे ज्यादा। यह नियम भारतीय कंपनियों के साथ-साथ भारत में शाखा या प्रोजेक्ट ऑफिस रखने वाली विदेशी कंपनियों पर भी लागू होता है। Corporate Laws Amendment Bill 2026 में नेट प्रॉफिट की सीमा ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन जब तक यह बिल पास और अधिसूचित नहीं होता, तब तक मौजूदा सीमा ही लागू रहेगी।

कितना खर्च करना अनिवार्य है

पात्र कंपनियों को पिछले तीन वित्त वर्षों के औसत नेट प्रॉफिट का कम से कम 2% CSR गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है, और यह खर्च Schedule VII में बताई गई गतिविधियों तक ही सीमित रहना चाहिए। यह प्रॉफिट धारा 198 के तहत निकाला जाता है, जो इनकम टैक्स एक्ट के हिसाब से निकाले गए प्रॉफिट से अलग होता है, इसलिए गलत आंकड़ा इस्तेमाल करने से अंडर-स्पेंडिंग की गलती हो सकती है।

CSR Documentation पर हस्ताक्षर करते कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स
CSR Documentation को सही तरीके से तैयार करना अनुपालन के लिए जरूरी है

जरूरी दस्तावेज कौन-कौन से हैं

सबसे पहले बोर्ड को CSR कमेटी की सिफारिशों के आधार पर एक CSR पॉलिसी बनानी होती है, जिसे कंपनी की वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य है। इसके साथ ही बोर्ड रिजॉल्यूशन और CSR कमेटी की मीटिंग मिनट्स भी संभालकर रखनी होती हैं।

जो ट्रस्ट, सोसाइटी या Section 8 कंपनियां कंपनी की तरफ से CSR प्रोजेक्ट चलाती हैं, उन्हें Form CSR-1 के जरिए पहले से रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है, जो 14 जुलाई 2025 से पूरी तरह वेब-बेस्ड हो चुका है और अब PDF के रूप में डाउनलोड नहीं किया जा सकता। इसके अलावा सालाना Board Report में CSR रिपोर्ट शामिल करनी होती है, और यह जानकारी Form CSR-2 के जरिए AOC-4 फाइलिंग के साथ अलग से जमा करनी होती है।

अगर किसी कंपनी का तीन साल का औसत CSR Documentation दायित्व ₹10 करोड़ या उससे ज्यादा है, तो किसी स्वतंत्र एजेंसी से इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट भी तैयार करानी पड़ती है। इसके साथ ही खर्च का सबूत दिखाने के लिए बैंक स्टेटमेंट और रसीदें भी संभालकर रखनी जरूरी हैं।

2026 में क्या बदलाव हो रहे हैं

2026 में सबसे बड़ा बदलाव Form CSR-1 का पूरी तरह वेब-बेस्ड होना है, जिससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अब सीधे MCA21 पोर्टल पर होती है। इसके अलावा Corporate Laws Amendment Bill 2026 के तहत नेट प्रॉफिट की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है, जिससे अगर यह पास होता है, तो कुछ छोटी कंपनियां CSR दायरे से बाहर हो सकती हैं। हालांकि जब तक आधिकारिक अधिसूचना नहीं आती, कंपनियों को मौजूदा नियमों का ही पालन करना चाहिए।

गैर-पालन पर क्या होता है

CSR Documentation रिपोर्टिंग को नजरअंदाज करना या गलत जानकारी देना कंपनी को ROC यानी Registrar of Companies की जांच के दायरे में ला सकता है, जिसमें आगे चलकर एडजुडिकेशन प्रोसीडिंग्स भी शुरू हो सकती हैं। हालांकि CSR के लिए कोई अलग स्टेट्यूटरी ऑडिट नहीं है, फिर भी स्टैचुटरी ऑडिटर सालाना ऑडिट के दौरान CSR डिस्क्लोजर की समीक्षा करता है और गैर-पालन पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट में टिप्पणी भी कर सकता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. CSR Documentation क्या है?
यह वे सभी दस्तावेज हैं, जो कंपनी को अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी साबित करने के लिए कानून के तहत तैयार करने होते हैं।

2. CSR Documentation किन कंपनियों पर लागू होता है?
₹1,000 करोड़ टर्नओवर, ₹500 करोड़ नेटवर्थ, या ₹5 करोड़ नेट प्रॉफिट में से कोई एक शर्त पूरी करने वाली कंपनियों पर यह लागू होता है।

3. Form CSR-1 और CSR-2 में क्या फर्क है?
CSR-1 इम्प्लीमेंटिंग एजेंसी के रजिस्ट्रेशन के लिए है, जबकि CSR-2 सालाना CSR खर्च की रिपोर्ट AOC-4 फाइलिंग के साथ जमा करने के लिए इस्तेमाल होता है, इनकी पूरी प्रक्रिया MCA के पोर्टल पर उपलब्ध है।

4. इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट कब जरूरी होती है?
अगर किसी कंपनी का तीन साल का औसत CSR दायित्व ₹10 करोड़ या उससे ज्यादा है, तो स्वतंत्र एजेंसी से इम्पैक्ट असेसमेंट कराना जरूरी है।

5. गलत CSR Documentation पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
ROC की जांच और एडजुडिकेशन प्रोसीडिंग्स शुरू हो सकती हैं, इसलिए सही और समय पर रिपोर्टिंग करना जरूरी है।

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। सटीक और व्यक्तिगत सलाह के लिए कंपनी सेक्रेटरी या चार्टर्ड अकाउंटेंट से संपर्क करें।

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